ग्रेटर नोएडा के जीएल बजाज में भारत-अफ्रीका खाद्य सुरक्षा, कृषि व्यापार एवं निवेश शिखर सम्मेलन 2026 का शुभारंभ हुआ। 30 से अधिक अफ्रीकी देशों के प्रतिनिधियों, राजनयिकों, सरकारी अधिकारियों, वैज्ञानिकों, कृषि विशेषज्ञों, उद्योग जगत और शिक्षाविदों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन में खाद्य सुरक्षा, कृषि तकनीक, बीज, सिंचाई, मृदा स्वास्थ्य, व्यापार और निवेश के साथ भविष्य की वैश्विक खाद्य प्रणालियों पर चर्चा हुई।
भारत और अफ्रीका के बीच सहयोग को एक नई दिशा देने की कोशिश ग्रेटर नोएडा में देखने को मिली, जहां भारत-अफ्रीका खाद्य सुरक्षा, कृषि व्यापार एवं निवेश शिखर सम्मेलन 2026 का शुभारंभ हुआ। जीएल बजाज परिसर में आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में 30 से अधिक अफ्रीकी देशों के प्रतिनिधि एक मंच पर जुटे।
यहां सिर्फ कृषि की बात नहीं हुई, बल्कि खाद्य सुरक्षा से लेकर तकनीक, व्यापार, निवेश और सतत विकास तक ऐसे कई मुद्दों पर चर्चा हुई, जिनका सीधा संबंध आने वाली पीढ़ियों की खाद्य और आर्थिक सुरक्षा से है।
अंतरराष्ट्रीय व्यापार एवं प्रतिनिधिमंडल महासंघ (ITDFC) की ओर से “समृद्धि के लिए साझेदारी, आने वाली पीढ़ियों के पोषण के लिए सहयोग” विषय के तहत आयोजित इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य भारत और अफ्रीका के बीच कृषि, खाद्य सुरक्षा, प्रौद्योगिकी, व्यापार और सतत विकास के क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करना रहा।
30 से ज्यादा अफ्रीकी देशों की भागीदारी
सम्मेलन में अफ्रीकी देशों के प्रतिनिधियों के साथ राजनयिक, सरकारी अधिकारी, वैज्ञानिक, कृषि विशेषज्ञ, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और शिक्षाविद शामिल हुए। कार्यक्रम में डॉ. अलका राव, निदेशक, सीएसआईआर-आईएमटेक, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार, सेशेल्स गणराज्य की उच्चायुक्त महामहिम श्रीमती हरिसोआ ललातियाना अकोचे, चाड गणराज्य की राजदूत महामहिम श्रीमती इल्दजिमा बद्दा मल्लोट, कांगो गणराज्य के राजदूत महामहिम श्री रेमंड सर्ज बाले और टोगो गणराज्य की प्रभारी राजदूत महामहिम डॉ. मालेम्दा कमेले समेत कई गणमान्य प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
प्रतिनिधियों की मौजूदगी ने सम्मेलन को केवल एक औपचारिक आयोजन के बजाय भारत-अफ्रीका संवाद के महत्वपूर्ण मंच का रूप दिया।
बीज से लेकर एग्रीटेक तक, कृषि के हर पहलू पर चर्चा
सम्मेलन में कृषि क्षेत्र से जुड़े कई अहम विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। इनमें बीज एवं कृषि अनुसंधान, जैव प्रौद्योगिकी, चावल, अनाज एवं दलहन, मृदा स्वास्थ्य, सिंचाई, उर्वरक और एग्रीटेक प्रमुख रहे।
इसके साथ ही जलवायु-स्मार्ट कृषि पर भी विशेष ध्यान दिया गया। बदलते मौसम और कृषि पर बढ़ते दबाव के बीच ऐसी तकनीकों और तरीकों की जरूरत लगातार महसूस की जा रही है, जो कम संसाधनों में बेहतर और टिकाऊ उत्पादन सुनिश्चित कर सकें।
खाद्य प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, व्यापार गलियारों, आपूर्ति श्रृंखला और ई-कॉमर्स जैसे विषयों को भी चर्चा का हिस्सा बनाया गया। यानी खेत से बाजार तक पूरी कृषि व्यवस्था को एक साथ देखने की कोशिश इस सम्मेलन में दिखाई दी।
जीएल बजाज ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग को दिया मंच
जीएल बजाज एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस, ग्रेटर नोएडा/मथुरा के उपाध्यक्ष श्री पंकज अग्रवाल ने सम्मेलन में शामिल विशिष्ट अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने भारत और अन्य देशों के बीच अंतरराष्ट्रीय सहयोग के महत्व पर प्रकाश डाला।
वहीं, जीएल बजाज एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री कार्तिकेय अग्रवाल ने छात्रों और शिक्षा जगत के लिए वैश्विक अनुभव, ज्ञान के आदान-प्रदान और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों की भूमिका को रेखांकित किया।

इस सम्मेलन का शैक्षणिक भागीदार जीएल बजाज इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट, ग्रेटर नोएडा रहा। संस्थान ने अंतरराष्ट्रीय ज्ञान-विनिमय और सहयोग के लिए मंच उपलब्ध कराया।
‘खाद्य सुरक्षा समृद्धि की नींव है’
सम्मेलन में ITDFC के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री सैयद अरीश हुसैन ने भारत और अफ्रीका के बीच संबंधों को और मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया।
उन्होंने कहा, “खाद्य सुरक्षा समृद्धि की नींव है और साझेदारी खाद्य सुरक्षा की आधारशिला है।”
उनका यह संदेश सम्मेलन की पूरी सोच को सामने रखता है। खाद्य सुरक्षा को केवल कृषि उत्पादन से जोड़कर नहीं देखा जा सकता। इसके लिए अनुसंधान, तकनीक, निवेश, मजबूत आपूर्ति श्रृंखला और देशों के बीच बेहतर व्यापारिक सहयोग भी जरूरी है।
2027 में एशिया-अफ्रीका सीड ट्रेड एंड इनोवेशन समिट
सम्मेलन के दौरान भविष्य की एक महत्वपूर्ण पहल की घोषणा भी की गई। एशिया-अफ्रीका सीड ट्रेड एंड इनोवेशन समिट 2027 आयोजित करने की घोषणा हुई है।
प्रस्तावित सम्मेलन में बीज व्यापार, कृषि नवाचार, प्रौद्योगिकी, अनुसंधान और निवेश के माध्यम से एशिया और अफ्रीका में मजबूत और टिकाऊ खाद्य प्रणालियों को बढ़ावा देने पर ध्यान दिया जाएगा।
यह पहल कृषि क्षेत्र में भारत-अफ्रीका सहयोग को आगे बढ़ाने के साथ-साथ दोनों महाद्वीपों के बीच नई कारोबारी और तकनीकी साझेदारियों के रास्ते खोल सकती है।
B2B, B2G और संस्थागत साझेदारी पर भी जोर
शिखर सम्मेलन ने भारत-अफ्रीका आर्थिक कूटनीति, B2B, B2G और संस्थागत साझेदारियों को मजबूत करने की जरूरत को भी सामने रखा। कृषि और खाद्य क्षेत्र में निवेश बढ़ाने के लिए सरकारी संस्थानों के साथ-साथ निजी कंपनियों, अनुसंधान संस्थानों और शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका को अहम माना गया।
इस पूरे सहयोग को विकसित भारत 2047 के व्यापक दृष्टिकोण से भी जोड़ा गया। भारत और अफ्रीका के बीच कृषि तथा खाद्य क्षेत्र में मजबूत साझेदारी वैश्विक खाद्य एवं पोषण सुरक्षा के लक्ष्यों में योगदान दे सकती है।
शिक्षा, उद्योग और वैश्विक अवसरों पर जीएल बजाज का फोकस
जीएल बजाज इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट, ग्रेटर नोएडा इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट और कंप्यूटर एप्लीकेशन की शिक्षा के साथ अनुसंधान, नवाचार, उद्योग संपर्क और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर जोर देता है।
संस्थान विद्यार्थियों को वैश्विक अनुभव, उद्योग विशेषज्ञों के साथ संवाद, अनुसंधान, स्टार्टअप और करियर विकास से जुड़ने के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रहा है। ऐसे अंतरराष्ट्रीय आयोजनों को इसी व्यापक दृष्टिकोण से देखा जा रहा है, जहां शिक्षा और उद्योग के साथ वैश्विक स्तर पर ज्ञान और अवसरों का आदान-प्रदान हो सके।
ग्रेटर नोएडा में शुरू हुआ यह भारत-अफ्रीका शिखर सम्मेलन इसी बड़ी तस्वीर का हिस्सा है—जहां खेत, तकनीक, व्यापार, शिक्षा और निवेश, सभी को एक साझा भविष्य से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।
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