गौतमबुद्धनगर में गांधी जयंती और लाल बहादुर शास्त्री जयंती के अवसर पर कलेक्ट्रेट सभागार में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। एडीएम वित्त एवं राजस्व अजीत कुमार सिंह ने दोनों महापुरुषों को श्रद्धा सुमन अर्पित किए। विचार गोष्ठी में सत्य, अहिंसा, सादगी, अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और स्वच्छता को जीवन का हिस्सा बनाने का संदेश दिया गया।
देश के दो महान सपूतों महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर गौतमबुद्धनगर कलेक्ट्रेट में श्रद्धा और विचारों से जुड़ा कार्यक्रम आयोजित किया गया। कलेक्ट्रेट सभागार में हुए इस कार्यक्रम में अधिकारियों और कर्मचारियों ने दोनों महापुरुषों के चित्रों पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया।
कार्यक्रम में अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व अजीत कुमार सिंह ने महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री के चित्रों पर माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस दौरान अपर जिलाधिकारीगण, डिप्टी कलेक्टर और कलेक्ट्रेट स्टाफ ने भी पुष्पांजलि अर्पित करते हुए दोनों महान विभूतियों को श्रद्धापूर्वक याद किया।
सत्य और अहिंसा से लेकर सादगी और कर्तव्यनिष्ठा तक की चर्चा
श्रद्धांजलि कार्यक्रम के बाद विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री के जीवन-दर्शन, व्यक्तित्व और राष्ट्र के प्रति योगदान पर विस्तार से चर्चा हुई।

अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व अजीत कुमार सिंह ने कहा कि महात्मा गांधी का सत्य और अहिंसा का मार्ग तथा लाल बहादुर शास्त्री की सादगी, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा आज भी सार्वजनिक जीवन के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।
उन्होंने कहा कि दोनों महापुरुषों को केवल जयंती के अवसर पर याद करना ही पर्याप्त नहीं है। उनके जीवन से मिलने वाले मूल्यों को अपने आचरण में उतारना ही उनके प्रति वास्तविक सम्मान है।
एडीएम ने अधिकारियों और कर्मचारियों से कहा कि वे स्वयं इन आदर्शों को अपनाएं और अपने परिवार एवं बच्चों को भी महापुरुषों के जीवन तथा उनके सिद्धांतों के बारे में बताएं। उन्होंने कहा कि समाज में सकारात्मक बदलाव की शुरुआत किसी बड़े मंच से नहीं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति अपने घर से कर सकता है।
परिवार से शुरू हो सकती है बदलाव की कहानी
अजीत कुमार सिंह ने कहा कि सत्यनिष्ठा, अनुशासन, स्वच्छता, कर्तव्यबोध और सेवा की भावना जैसी आदतों को बचपन से विकसित किया जाना जरूरी है। इसके लिए परिवार की भूमिका महत्वपूर्ण है।
उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों से अपील की कि महापुरुषों के विचारों को केवल भाषण और स्मरण तक सीमित न रखा जाए, बल्कि इन्हें रोजमर्रा की जिंदगी में व्यवहार का हिस्सा बनाया जाए।

उनके मुताबिक, अगर हर व्यक्ति अपने स्तर पर जिम्मेदारी निभाए तो समाज में व्यापक सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।
स्वच्छता सिर्फ आदत नहीं, सामाजिक जिम्मेदारी
महात्मा गांधी के स्वच्छता संबंधी विचारों का उल्लेख करते हुए एडीएम वित्त एवं राजस्व ने कहा कि स्वच्छता केवल व्यक्तिगत आदत नहीं बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी भी है।
उन्होंने लोगों से अपने घर और आसपास स्वच्छ वातावरण बनाए रखने में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की। उन्होंने विशेष रूप से गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग रखने पर जोर दिया।
एडीएम ने कहा कि कचरे को निर्धारित व्यवस्था के माध्यम से सफाई मित्रों को उपलब्ध कराया जाना चाहिए, ताकि कचरे के उचित निस्तारण और प्रसंस्करण की व्यवस्था प्रभावी ढंग से संचालित हो सके।
उन्होंने कहा कि स्वच्छता को किसी अभियान या एक दिन की गतिविधि के रूप में नहीं, बल्कि नियमित जीवनचर्या का हिस्सा बनाने की जरूरत है। तभी स्वच्छ और स्वस्थ समाज की दिशा में प्रभावी कदम आगे बढ़ाया जा सकता है।
शास्त्री जी का ‘जय जवान, जय किसान’ संदेश भी याद किया गया
विचार गोष्ठी में पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के योगदान को भी याद किया गया। एडीएम ने कहा कि शास्त्री जी का सादा जीवन और उच्च आदर्श सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी और कर्तव्यपरायणता की मिसाल हैं।
उन्होंने शास्त्री जी के प्रसिद्ध संदेश ‘जय जवान, जय किसान’ का उल्लेख करते हुए कहा कि यह संदेश देश की सुरक्षा और कृषि क्षेत्र के महत्व को रेखांकित करता है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए अपने दायित्वों का ईमानदारी और निष्ठा के साथ निर्वहन करना शास्त्री जी के जीवन से मिलने वाली महत्वपूर्ण प्रेरणा है।
अधिकारियों ने भी रखे अपने विचार
विचार गोष्ठी के दौरान अपर जिलाधिकारी (भू0/रा0) अरुण कुमार सिंह, अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) प्रियंका, डिप्टी कलेक्टर प्रदीप सिंह, डिप्टी कलेक्टर पूर्वा शर्मा, अरुण कुमार, जिला पूर्ति अधिकारी नरेश उत्पल और सहायक आयुक्त खाद्य द्वितीय सर्वेश कुमार मिश्रा सहित संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने अपने विचार रखे।
सभी ने महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री के जीवन, व्यक्तित्व, राष्ट्रसेवा और आदर्शों पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में संबंधित अधिकारीगण और कलेक्ट्रेट स्टाफ मौजूद रहा।
गांधी जयंती और शास्त्री जयंती का यह कार्यक्रम केवल श्रद्धांजलि तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें सत्य, अहिंसा, सादगी, अनुशासन, स्वच्छता और कर्तव्यनिष्ठा जैसे मूल्यों को रोजमर्रा के जीवन में अपनाने का संदेश भी दिया गया।
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