उत्तर प्रदेश में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए एक लाख रुपये तक के ब्याजमुक्त ऋण की योजना पर जोर दिया गया है। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने प्रति आवेदन 250 रुपये की प्रस्तावित प्रोत्साहन राशि, महिला उद्यमिता और ग्रामीण आजीविका मिशन के लक्ष्यों की समीक्षा की।
ग्रामीण क्षेत्रों में अपना छोटा कारोबार शुरू करने का सपना देखने वाली महिलाओं के लिए उत्तर प्रदेश सरकार की एक योजना चर्चा में है। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी पात्र महिलाओं को एक लाख रुपये तक का ब्याजमुक्त ऋण उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया है। इसके साथ ही आवेदन से लेकर ऋण के पूर्ण भुगतान तक महिलाओं की मदद करने वाली समूह की दीदियों के लिए प्रति आवेदन 250 रुपये की प्रोत्साहन राशि का प्रस्ताव भी सामने आया है।
सोमवार को उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की अध्यक्षता में उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की समीक्षा बैठक हुई। इसमें महिला उद्यमिता, ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से रोजगार के अवसर मजबूत करने पर चर्चा की गई। बैठक में प्रमुख सचिव ग्राम्य विकास सौरभ बाबू, मिशन निदेशक अरुण कुमार सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।
एक लाख रुपये तक का ब्याजमुक्त ऋण, तीन चरणों में मिलेगी मदद
बैठक में प्रस्तुत योजना के अनुसार, पात्र स्वयं सहायता समूह की महिलाएं अपना कारोबार शुरू करने, मौजूदा व्यवसाय का विस्तार करने या छोटे उद्यम स्थापित करने के लिए कुल एक लाख रुपये तक का ब्याजमुक्त ऋण प्राप्त कर सकेंगी। ऋण उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को तीन चरणों में संचालित करने का प्रस्ताव है।
इसका उद्देश्य महिलाओं को केवल आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि उन्हें अपने पैरों पर खड़ा होने और नियमित आय का साधन विकसित करने में मदद करना है। हालांकि, ऋण की पात्रता, स्वीकृति और वितरण संबंधित नियमों तथा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार होगा।
आवेदन से पूरा भुगतान तक, ऐसे प्रस्तावित हैं ₹250
इस योजना में स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को आवेदन और ऋण प्रक्रिया में सहयोग देने वाली कैडर दीदियों के लिए कुल 250 रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रस्तावित की गई है। यह राशि एक साथ नहीं, बल्कि तीन चरणों में दिए जाने का प्रावधान बताया गया है।
इस व्यवस्था का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि महिलाओं को केवल आवेदन भरने तक सहायता न मिले, बल्कि ऋण स्वीकृत कराने और उसके भुगतान की प्रक्रिया में भी मार्गदर्शन मिलता रहे।
यहां ध्यान देने वाली बात है कि 250 रुपये की राशि प्रति आवेदन के हिसाब से प्रस्तावित है। इसे प्रत्येक महिला को मिलने वाली अतिरिक्त नकद सहायता या ऋण पर मिलने वाली छूट नहीं समझना चाहिए। यह प्रोत्साहन राशि योजना के क्रियान्वयन में सहयोग करने वाली कैडर दीदियों के लिए है।

सिर्फ कर्ज नहीं, महिलाओं को सफल उद्यमी बनाने की तैयारी
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने अधिकारियों से कहा कि योजना का लाभ पात्र महिलाओं तक पहुंचाने के लिए व्यापक कार्ययोजना बनाई जाए। गांव, विकासखंड और जिला स्तर पर बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए, ताकि जानकारी के अभाव में कोई पात्र महिला योजना से वंचित न रहे।
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि महिलाओं को ऋण उपलब्ध करा देना ही पर्याप्त नहीं है। उन्हें कारोबार के चयन, प्रशिक्षण, उत्पादों की गुणवत्ता, पैकेजिंग, विपणन और बाजार से जुड़ने में भी मदद मिलनी चाहिए।
ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं खाद्य प्रसंस्करण, सिलाई-कढ़ाई, हस्तशिल्प, दुग्ध उत्पादन, कृषि आधारित गतिविधियों और घरेलू उत्पादों से जुड़े व्यवसाय शुरू कर सकती हैं। सही प्रशिक्षण और बाजार तक पहुंच मिलने पर ये छोटे कारोबार परिवार की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
तीन करोड़ दीदियों को समूहों से जोड़ने का लक्ष्य
बैठक में ग्रामीण आजीविका मिशन के बड़े लक्ष्यों की भी समीक्षा की गई। उपमुख्यमंत्री ने प्रदेश में तीन करोड़ दीदियों को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ने और एक करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनाने के लक्ष्य को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए।
स्वयं सहायता समूह ग्रामीण महिलाओं को बचत, सामूहिक आर्थिक गतिविधियों, स्वरोजगार और उद्यमिता से जोड़ने का माध्यम हैं। सरकार की मंशा है कि महिलाएं केवल योजनाओं की लाभार्थी बनकर न रहें, बल्कि अपनी आमदनी बढ़ाने वाले कारोबार की संचालक भी बनें।
इसके साथ ही रिवॉल्विंग फंड, सामुदायिक निवेश कोष और ब्लॉक मिशन प्रबंधन इकाइयों के कामकाज में पारदर्शिता, गुणवत्ता और नियमित निगरानी सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
लापरवाही पर कार्रवाई, शिकायतों का समय पर समाधान करने के निर्देश
केशव प्रसाद मौर्य ने अधिकारियों को निर्धारित लक्ष्यों की नियमित समीक्षा करने और काम में लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने भारत सरकार के दिशा-निर्देशों का पालन करने तथा प्रगति रिपोर्ट समय पर संबंधित पोर्टलों पर अपलोड करने को भी कहा।
उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि स्वयं सहायता समूहों की दीदियों को किसी तरह की परेशानी होने पर उसका तत्काल समाधान किया जाए। इसके लिए अधिकारियों को नोडल जिम्मेदारी सौंपने पर जोर दिया गया, ताकि शिकायतों के निस्तारण में अनावश्यक देरी न हो।
अब इस पहल की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि प्रस्तावित ऋण और प्रोत्साहन व्यवस्था पात्र महिलाओं तक कितनी प्रभावी ढंग से पहुंचती है। यदि ऋण प्रक्रिया आसान होती है, प्रशिक्षण मिलता है और कारोबार को बाजार से जोड़ने में मदद मिलती है, तो ग्रामीण महिलाओं के लिए यह योजना आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण अवसर बन सकती है।
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