लखनऊ के विद्याभवन, निशातगंज में दिव्यांग यात्रियों के लिए सार्वजनिक परिवहन को सुगम, सुरक्षित और बाधारहित बनाने के उद्देश्य से एक दिवसीय राज्य स्तरीय संवेदीकरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें प्रदेश के 28 जनपदों के लगभग 40 वरिष्ठ परिवहन अधिकारियों और कर्मचारियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में समान अधिकार, गरिमापूर्ण व्यवहार, कानूनी संरक्षण और सुगम्यता के मानकों पर विस्तार से चर्चा की गई।
सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करना किसी भी नागरिक के लिए रोजमर्रा की जरूरत हो सकती है, लेकिन दिव्यांगजनों के लिए बस या अन्य परिवहन सेवाओं से सफर करना कई बार आसान नहीं होता। कहीं सुविधाओं की कमी तो कहीं कर्मचारियों का असहयोगी रवैया उनकी यात्रा को मुश्किल बना देता है।
ऐसे में सवाल सिर्फ परिवहन सुविधा का नहीं, बल्कि समान अधिकार और सम्मान के साथ जीने के अवसर का भी है। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश में दिव्यांग यात्रियों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने और सार्वजनिक परिवहन को अधिक सुगम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है।
लखनऊ के निशातगंज स्थित विद्याभवन में बुधवार, 4 नवंबर 2026 को दिव्यांगजनों के लिए सार्वजनिक परिवहन को सुगम, सुरक्षित और बाधारहित बनाने के उद्देश्य से एक दिवसीय राज्य स्तरीय संवेदीकरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। राज्य आयुक्त दिव्यांगजन न्यायालय/कार्यालय की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में प्रदेश के 28 जनपदों से परिवहन विभाग के लगभग 40 वरिष्ठ अधिकारियों एवं कार्मिकों ने प्रतिभाग किया।

कार्यक्रम का आयोजन दृष्टिबाधित छात्रों के छात्रावास, विद्याभवन, निशातगंज स्थित सभागार में किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य दिव्यांगजनों के समानता के अधिकार, भेदभाव रहित व्यवहार, सुगम्यता और सुगम परिवहन से जुड़े कानूनी प्रावधानों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना था। साथ ही दिव्यांग यात्रियों के प्रति संवेदनशील और सम्मानजनक व्यवहार विकसित करने पर भी विशेष जोर दिया गया।
दिव्यांगजन दया नहीं, समान अधिकार और सम्मान के हकदार
कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ मुख्य अतिथि राज्य आयुक्त दिव्यांगजन प्रो. हिमांशु शेखर झा, उपायुक्त (प्रशासन) डॉ. अमित कुमार राय और उपायुक्त दिव्यांगजन शैलेन्द्र कुमार सोनकर ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।
पहले सत्र को संबोधित करते हुए प्रो. हिमांशु शेखर झा ने परिवहन विभाग से जुड़ी दिव्यांगजनों की प्रमुख समस्याओं और व्यावहारिक कठिनाइयों पर अधिकारियों के साथ विस्तार से विचार-विमर्श किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि दिव्यांगजन किसी की दया या विशेष कृपा के मोहताज नहीं हैं। वे संविधान प्रदत्त समान अधिकार, समान अवसर, गरिमापूर्ण व्यवहार और बाधारहित वातावरण के पूर्ण हकदार हैं।
उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों से अपेक्षा की कि वे अपनी वैधानिक और प्रशासनिक जिम्मेदारियों को केवल औपचारिक दायित्व मानकर पूरा न करें, बल्कि मानवीय संवेदनशीलता, सहानुभूति और आत्मीय सम्मान के साथ उनका निर्वहन करें।
प्रो. झा ने कहा कि सार्वजनिक परिवहन में किसी भी दिव्यांग यात्री को असुविधा, उपेक्षा या भेदभाव का सामना नहीं करना पड़ना चाहिए। प्रत्येक यात्री को सहज, सुरक्षित और सम्मानजनक यात्रा का अनुभव मिले, यह सुनिश्चित करना सभी सेवा प्रदाताओं की सामूहिक जिम्मेदारी है।

परिवहन सेवाओं को दिव्यांगजनों के अनुकूल बनाने पर जोर
कार्यक्रम में उपायुक्त (प्रशासन) डॉ. अमित कुमार राय ने सार्वजनिक परिवहन सेवाओं को दिव्यांगजनों के अनुकूल, सुलभ और सुरक्षित बनाने से जुड़े महत्वपूर्ण तकनीकी और व्यावहारिक पहलुओं पर प्रकाश डाला।
उन्होंने परिवहन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को यात्रियों के साथ सहयोगात्मक एवं गरिमापूर्ण व्यवहार अपनाने की आवश्यकता बताई। उनका जोर इस बात पर रहा कि परिवहन व्यवस्था में सुविधाओं के साथ-साथ कर्मचारियों का व्यवहार भी ऐसा होना चाहिए, जिससे दिव्यांग यात्रियों को किसी तरह की परेशानी या असहजता न हो।
दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम-2016 के प्रावधानों की दी जानकारी
दूसरे सत्र में उपायुक्त दिव्यांगजन शैलेन्द्र कुमार सोनकर ने दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के विभिन्न प्रावधानों पर विस्तृत व्याख्यान दिया। उन्होंने दिव्यांगजनों के कानूनी अधिकारों, उन्हें प्राप्त वैधानिक संरक्षण और अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी दी।
इसके साथ ही उन्होंने पिछले दो वर्षों के दौरान दिव्यांगजनों के अधिकारों के संरक्षण, उनकी समस्याओं के निराकरण और सुगम्यता का दायरा बढ़ाने की दिशा में किए गए प्रयासों की रूपरेखा भी साझा की। इस सत्र का उद्देश्य अधिकारियों को उनके कानूनी दायित्वों और दिव्यांगजनों को मिलने वाले अधिकारों के प्रति जागरूक करना था।

बाधारहित वातावरण बनाने के आधुनिक मानकों पर चर्चा
तीसरे सत्र में विषय विशेषज्ञ अमरेश चन्द्रा ने दिव्यांगजनों के लिए आधुनिक मानकों के अनुरूप बाधारहित और सुगम्य वातावरण तैयार करने की आवश्यकता पर व्याख्यान दिया। उन्होंने सुगम्यता के विभिन्न ढांचागत आयामों और निर्धारित मानकों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
कार्यक्रम के समापन सत्र में राज्य आयुक्त दिव्यांगजन ने उपस्थित अधिकारियों और कर्मचारियों की विभिन्न तकनीकी एवं व्यावहारिक जिज्ञासाओं का समाधान किया। इसके बाद सभी प्रतिभागियों को सहभागिता प्रमाण पत्र वितरित किए गए और कार्यक्रम का विधिवत समापन हुआ।
इस संवेदीकरण कार्यक्रम का संदेश स्पष्ट है कि दिव्यांगजनों के लिए परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाना केवल सुविधाएं उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। इसके लिए कानून का पालन, बाधारहित ढांचा और सम्मानजनक व्यवहार तीनों जरूरी हैं। अब महत्वपूर्ण सवाल यह है कि प्रशिक्षण के दौरान मिली सीख को परिवहन सेवाओं में जमीनी स्तर पर किस तरह लागू किया जाता है, ताकि दिव्यांग यात्रियों को वास्तव में समान और सम्मानजनक यात्रा का अनुभव मिल सके।
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