दिवाली और छठ के त्योहारों से पहले चीनी की कीमतों में तेजी ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। पिछले एक महीने में चीनी खुदरा और थोक बाजार में 4 रुपये प्रति किलो से अधिक महंगी हुई है। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, औसत खुदरा कीमत 59.50 रुपये प्रति किलो पहुंच गई है। वहीं, कोलकाता में कीमत 65 रुपये और दिल्ली में 64 रुपये प्रति किलो दर्ज की गई है।
त्योहारों का मौसम आते ही घरों में मिठाइयों की तैयारी शुरू हो जाती है। कहीं मेहमानों के लिए मिठाई बनती है तो कहीं दिवाली की पूजा और छठ पर्व के प्रसाद के लिए जरूरी सामान जुटाया जाता है। लेकिन इस बार त्योहारों की इसी मिठास पर महंगाई का असर दिखाई देने लगा है। चीनी की लगातार बढ़ती कीमतों ने आम परिवारों के रसोई बजट को लेकर चिंता बढ़ा दी है। चाय में रोजाना इस्तेमाल होने वाली चीनी हो या घर में बनने वाली मिठाइयां, अब हर किलो के लिए पहले से ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं।
आंकड़े बताते हैं कि पिछले एक महीने में चीनी की खुदरा और थोक कीमतों में 4 रुपये प्रति किलो से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। ऐसे समय में जब देशभर में दिवाली और छठ की तैयारियां चल रही हैं, चीनी के दामों में यह उछाल आम उपभोक्ताओं के लिए किसी झटके से कम नहीं है।
औसत खुदरा कीमत 59.50 रुपये प्रति किलो पहुंची
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, चीनी की औसत खुदरा कीमत बढ़कर 59.50 रुपये प्रति किलो हो गई है। वहीं, थोक बाजार में इसकी औसत कीमत 55.40 रुपये प्रति किलो दर्ज की गई है। पिछले एक महीने के दौरान दोनों बाजारों में कीमतें 4 रुपये से अधिक बढ़ चुकी हैं।
अगर एक साल पहले के आंकड़ों से तुलना करें तो तस्वीर और भी चिंताजनक नजर आती है। एक साल पहले चीनी की औसत खुदरा कीमत 46.50 रुपये प्रति किलो थी, जो अब बढ़कर 59.50 रुपये हो गई है। यानी खुदरा बाजार में एक साल के भीतर करीब 13 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई है।
इसी तरह थोक बाजार में भी चीनी की कीमत 43.23 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 55.40 रुपये पहुंच गई है। इस हिसाब से थोक बाजार में भी एक साल के दौरान कीमत करीब 12 रुपये प्रति किलो बढ़ी है। इसका असर आगे चलकर दुकानों पर मिलने वाली मिठाइयों और अन्य खाद्य उत्पादों की कीमतों पर भी पड़ सकता है।
कोलकाता में 65 रुपये किलो, दिल्ली में भी कीमत 64 रुपये
चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी का असर देश के बड़े शहरों में भी साफ दिखाई दे रहा है। 3 नवंबर के आंकड़ों के मुताबिक, कोलकाता में चीनी की खुदरा कीमत सबसे ज्यादा 65 रुपये प्रति किलो दर्ज की गई। पिछले साल इसी समय यहां चीनी 50 रुपये प्रति किलो मिल रही थी।
राजधानी दिल्ली में भी चीनी की कीमत 64 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है, जबकि एक साल पहले इसका भाव 46 रुपये प्रति किलो था। वहीं, मुंबई में चीनी 61 रुपये प्रति किलो बिक रही है। पिछले साल मुंबई में इसकी कीमत 45 रुपये प्रति किलो थी।
इन आंकड़ों से साफ है कि प्रमुख शहरों में चीनी की कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। हालांकि, अलग-अलग बाजारों और दुकानों पर वास्तविक खुदरा कीमत में अंतर हो सकता है।
आखिर क्यों बढ़ रहे हैं चीनी के दाम?
चीनी की कीमतों में तेजी के पीछे कई वजहें बताई जा रही हैं। सबसे बड़ी वजह पिछले सीजन में चीनी का उत्पादन अनुमान से कम रहना है। जब बाजार में उपलब्धता मांग के मुकाबले कम होती है, तो कीमतों पर दबाव बढ़ने लगता है।
इसके अलावा त्योहारों के दौरान चीनी की मांग में बढ़ोतरी भी कीमतों को प्रभावित कर रही है। दिवाली और छठ जैसे पर्वों पर मिठाइयों, पकवानों और प्रसाद की तैयारी के कारण चीनी की खपत बढ़ जाती है। वहीं, फसलों को नुकसान पहुंचने, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई कम होने और जमाखोरी जैसी वजहों से भी बाजार में कीमतों पर दबाव बढ़ा है।
सरकार की ओर से स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। इनमें चीनी के स्टॉक पर सीमा तय करना, आयात बढ़ाना और बाजार की निगरानी करना शामिल है। इसके अलावा चीनी मिलों में पेराई का काम भी पहले शुरू कराया गया है, ताकि नए सीजन का उत्पादन जल्द बाजार में उपलब्ध हो सके।
नए सीजन में 8.45 लाख टन चीनी का उत्पादन
इस बीच चीनी के नए सीजन 2026-27 में उत्पादन शुरू हो चुका है। नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज (NFCSF) के मुताबिक, 30 अक्टूबर तक देश की 152 चीनी मिलों ने कुल 8.45 लाख टन चीनी का उत्पादन किया है। नए सीजन में चीनी की पेराई 8 अक्टूबर से शुरू हुई थी।
उम्मीद की जा रही है कि नए सीजन का उत्पादन बढ़ने से बाजार में चीनी की उपलब्धता बेहतर हो सकती है। हालांकि, इसका असर खुदरा कीमतों पर कितनी जल्दी और कितना पड़ेगा, यह आने वाले दिनों में उत्पादन की रफ्तार, बाजार में सप्लाई और त्योहारों के दौरान बनी रहने वाली मांग पर निर्भर करेगा।
फिलहाल तस्वीर यही है कि दिवाली और छठ से पहले चीनी की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। अब सवाल यह है कि नए सीजन का उत्पादन बाजार को राहत दे पाएगा या त्योहारों के बाद भी चीनी की मिठास जेब पर भारी पड़ती रहेगी?
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