ग्रेटर नोएडा के ग्राम खेड़ा चौगानपुर में अवैध निर्माण को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। GNIDA द्वारा सीलिंग की कार्रवाई के कुछ ही दिनों बाद खसरा नंबर 109 पर दोबारा बहुमंजिला निर्माण शुरू हो गया। मौके पर मजदूर, निर्माण सामग्री और तेजी से खड़ा हो रहा ढांचा प्रशासनिक कार्रवाई की साख पर सवाल खड़े कर रहा है।
ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण यानी GNIDA की कार्रवाई एक बार फिर सवालों के घेरे में है। मामला GNIDA के वर्क सर्किल-3 के अंतर्गत आने वाले ग्राम खेड़ा चौगानपुर के खसरा नंबर 109 का है, जहां अवैध बताए जा रहे बहुमंजिला निर्माण को लेकर प्रशासनिक सख्ती की तस्वीर अब उलटी नजर आ रही है।
कुछ ही दिन पहले GNIDA ने इस निर्माण को अवैध मानते हुए मौके पर सीलिंग की कार्रवाई की थी। उस समय दावा किया गया था कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। लेकिन अब जो तस्वीर सामने आ रही है, उसने पूरी कार्रवाई की गंभीरता और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जमीनी हकीकत यह है कि सीलिंग के बाद भी निर्माण कार्य न सिर्फ जारी है, बल्कि पहले की तरह तेज गति से चल रहा है। मौके पर मजदूर काम करते दिखाई दे रहे हैं, निर्माण सामग्री लगातार पहुंच रही है और बहुमंजिला ढांचा तेजी से खड़ा किया जा रहा है।
क्या सीलिंग सिर्फ दिखावा थी?
स्थानीय लोगों और सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, सीलिंग के बाद कुछ समय तक निर्माण रुका जरूर था, लेकिन जल्द ही दोबारा काम शुरू हो गया। यही वजह है कि अब लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर यह कैसी कार्रवाई थी, जिसका जमीन पर कोई असर ही दिखाई नहीं दिया?
यदि निर्माण वास्तव में अवैध था, तो उसे दोबारा शुरू करने की अनुमति किसने दी?
क्या GNIDA की कार्रवाई सिर्फ कैमरों और कागजों तक सीमित रह गई?
क्या भू-माफियाओं के सामने प्रशासन पूरी तरह कमजोर पड़ चुका है?
ये सवाल अब सिर्फ स्थानीय लोगों के बीच ही नहीं, बल्कि पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन चुके हैं।

भू-माफियाओं के हौसले बुलंद?
जिस तरह से सीलिंग के बाद दोबारा निर्माण शुरू हुआ है, उससे साफ संकेत मिलते हैं कि निर्माण कराने वालों को किसी कार्रवाई का डर नहीं है। यही वजह है कि अब भू-माफियाओं के बढ़ते प्रभाव को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बिना किसी बड़े संरक्षण के सीलिंग के बाद इस स्तर पर दोबारा निर्माण शुरू होना संभव नहीं है। लोगों के बीच यह चर्चा भी तेज है कि कहीं न कहीं सिस्टम की कमजोरी या मिलीभगत के कारण ही नियमों को खुलेआम चुनौती दी जा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि अगर प्रशासन की कार्रवाई का यही हाल रहा, तो अवैध निर्माण करने वालों के हौसले और बढ़ेंगे।
GNIDA Work Circle-3 पर उठे सवाल
इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा सवाल GNIDA के Work Circle-3 पर उठ रहे हैं।
क्योंकि जिस विभाग ने खुद कार्रवाई की, वही विभाग अब अपनी कार्रवाई को कायम रखने में असफल नजर आ रहा है।
लोग पूछ रहे हैं—
क्या विभाग ने जानबूझकर आंखें मूंद ली हैं?
क्या कार्रवाई केवल दिखावे के लिए की जाती है?
या फिर सिस्टम के भीतर ऐसी कमजोरियां हैं, जिनका फायदा भू-माफिया खुलेआम उठा रहे हैं?
प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि यदि किसी सील किए गए स्थल पर दोबारा निर्माण शुरू हो जाए और विभाग को इसकी जानकारी तक न हो, तो यह गंभीर लापरवाही मानी जाएगी। वहीं अगर जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई न हो, तो सवाल और भी गंभीर हो जाते हैं।

पुलिस प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल
मामला केवल GNIDA तक सीमित नहीं है। स्थानीय लोग पुलिस प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठा रहे हैं।
लोगों का कहना है कि इतने बड़े स्तर पर निर्माण कार्य जारी रहने के बावजूद यदि किसी को इसकी जानकारी नहीं है, तो यह बात समझ से परे है। वहीं यदि जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही, तो यह कानून व्यवस्था की साख पर सीधा सवाल है।
कानून से ऊपर हो चुके हैं भू-माफिया?
खेड़ा चौगानपुर के खसरा नंबर 109 की तस्वीरें और मौजूदा हालात यही संकेत दे रहे हैं कि या तो भू-माफिया कानून से ऊपर हो चुके हैं, या फिर कानून लागू कराने वाली एजेंसियां उनके सामने बेबस नजर आ रही हैं।
सीलिंग जैसी कार्रवाई का मकसद अवैध निर्माण रोकना होता है, लेकिन यदि उसी जगह पर कुछ दिनों बाद फिर से काम शुरू हो जाए, तो आम जनता के बीच प्रशासन की विश्वसनीयता कमजोर होना तय है।
प्रशासन की साख दांव पर
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या GNIDA और पुलिस प्रशासन अपनी साख बचाने के लिए सख्त कदम उठाएंगे?
क्या दोबारा निर्माण शुरू कराने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी?
या फिर यह मामला भी धीरे-धीरे ठंडे बस्ते में चला जाएगा?
क्योंकि यह सिर्फ एक अवैध निर्माण का मामला नहीं है।
यह सवाल है कानून के सम्मान का…
यह सवाल है प्रशासनिक कार्रवाई की गंभीरता का…
और यह सवाल है उस सिस्टम का, जो अपनी ही कार्रवाई को जमीन पर लागू कराने में संघर्ष करता नजर आ रहा है।
फिलहाल पूरे मामले पर लोगों की नजर बनी हुई है और अब सबको इंतजार है कि प्रशासन आगे क्या कदम उठाता है।
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