शारदा विश्वविद्यालय में विश्व नवकार महामंत्र दिवस के अवसर पर सामूहिक जाप कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसमें छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों ने भाग लेकर आध्यात्मिक एकता और मानसिक शांति का अनुभव किया।
नोएडा स्थित शारदा विश्वविद्यालय में 9 अप्रैल 2026 को विश्व नवकार महामंत्र दिवस के अवसर पर एक विशेष और आध्यात्मिक आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम पूरे विश्वविद्यालय परिवार द्वारा उत्साह, श्रद्धा और सामूहिक सहभागिता के साथ मनाया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य शांति, एकता और भाईचारे का संदेश देना था।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के छात्र, शिक्षक और कर्मचारी एक साथ एकत्र हुए और सामूहिक रूप से नवकार महामंत्र का जाप किया। कार्यक्रम के दौरान पूरे वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिकता का माहौल देखने को मिला। सामूहिक जाप ने सभी प्रतिभागियों को आंतरिक शांति और मानसिक संतुलन का अनुभव कराया, जिससे यह आयोजन केवल एक कार्यक्रम न होकर एक साझा आध्यात्मिक अनुभव बन गया।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस अवसर को “एक साथ, एक मंत्र, एक शक्ति” के भाव के साथ मनाया। यह विचार इस बात को दर्शाता है कि जब लोग एक उद्देश्य और एक विचार के साथ एकजुट होते हैं, तो उसका प्रभाव न केवल व्यक्तिगत स्तर पर बल्कि सामूहिक रूप से भी सकारात्मक होता है।

कार्यक्रम में वाई. के. गुप्ता ने अपने संबोधन में नवकार महामंत्र के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि यह मंत्र केवल शब्दों का समूह नहीं है, बल्कि यह जीवन को दिशा देने वाली एक गहरी आध्यात्मिक शक्ति है। उनके अनुसार, जब इस मंत्र का सामूहिक रूप से जाप किया जाता है, तो यह वातावरण को शुद्ध करता है और व्यक्तियों के भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।
उन्होंने यह भी कहा कि आधुनिक जीवन की भागदौड़ और तनाव के बीच इस तरह के आध्यात्मिक अभ्यास लोगों को संतुलन बनाए रखने में मदद करते हैं। नवकार महामंत्र न केवल आत्मिक उन्नति का माध्यम है, बल्कि यह व्यक्ति को मानसिक रूप से भी मजबूत बनाता है और उसे जीवन की चुनौतियों का सामना करने की शक्ति देता है।
इस आयोजन में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के वरिष्ठ सदस्य भी उपस्थित रहे। छात्र कल्याण विभाग के डीन डॉ. प्रमोद कुमार, डायरेक्टर डॉ. राजीव गुप्ता, डॉ. सुदीप, डॉ. अमित, डॉ. रुचि जैन, डॉ. दीप्ति पाराशर और डॉ. सुमन लताधर सहित अनेक फैकल्टी सदस्य, डीन, कर्मचारी और छात्र इस कार्यक्रम में शामिल हुए।

सामूहिक जाप के दौरान छात्रों ने भी अपनी भावनाएं साझा कीं। कई छात्रों का कहना था कि इस तरह के कार्यक्रम उन्हें न केवल मानसिक शांति प्रदान करते हैं, बल्कि उनके भीतर सकारात्मक सोच और अनुशासन भी विकसित करते हैं। कुछ प्रतिभागियों ने इसे एक ऐसा अनुभव बताया, जो उन्हें लंबे समय तक प्रेरित करता रहेगा।
विश्वविद्यालय का मानना है कि शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उसमें जीवन मूल्यों, नैतिकता और आध्यात्मिक विकास का भी समावेश होना चाहिए। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए समय-समय पर इस तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, ताकि छात्रों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित हो सके।
यह आयोजन इस बात का भी प्रतीक बना कि कैसे सामूहिक प्रयासों के माध्यम से समाज में शांति और सद्भाव को बढ़ावा दिया जा सकता है। नवकार महामंत्र जैसे आध्यात्मिक अभ्यास लोगों को एकजुट करने और उनके बीच सकारात्मक संबंध स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
अंत में, शारदा विश्वविद्यालय में आयोजित यह कार्यक्रम एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आया, जिसने यह दिखाया कि शिक्षा संस्थान केवल ज्ञान के केंद्र नहीं, बल्कि सामाजिक और आध्यात्मिक जागरूकता के भी महत्वपूर्ण मंच हो सकते हैं। इस आयोजन ने सभी प्रतिभागियों को एकता, शांति और सकारात्मक ऊर्जा के साझा अनुभव से जोड़ दिया।
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