उत्तर प्रदेश सरकार ने 24,717 अंशकालिक अनुदेशकों का मानदेय 9 हजार रुपये से बढ़ाकर 17 हजार रुपये प्रतिमाह कर दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोकभवन में आयोजित सम्मान समारोह में चयनित अनुदेशकों को चेक वितरित किए और शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलावों की घोषणा की।
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने बेसिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत कार्यरत हजारों अंशकालिक अनुदेशकों को बड़ी राहत देते हुए उनके मानदेय में ऐतिहासिक वृद्धि की है। अब प्रदेश के 24,717 अंशकालिक अनुदेशकों को 9 हजार रुपये की जगह 17 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ स्थित लोकभवन सभागार में आयोजित सम्मान समारोह में चयनित अनुदेशकों को चेक वितरित कर इस फैसले का औपचारिक शुभारंभ किया।
कार्यक्रम के दौरान भावुक दृश्य भी देखने को मिले। वर्षों से कम मानदेय पर सेवाएं दे रहे अनुदेशकों ने मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार ने उनकी पुरानी मांग पूरी कर उन्हें सम्मान देने का काम किया है। मुख्यमंत्री के हाथों चेक पाकर कई अनुदेशकों के चेहरे खुशी से खिल उठे।
9 हजार से सीधे 17 हजार हुआ मानदेय
सरकार ने 1 अप्रैल 2026 से अंशकालिक अनुदेशकों का मानदेय बढ़ाने का फैसला लागू किया है। इससे पहले वर्ष 2022 में योगी सरकार ने मानदेय 7 हजार रुपये से बढ़ाकर 9 हजार रुपये किया था। अब एक साथ 8 हजार रुपये की वृद्धि कर इसे 17 हजार रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार का मानना है कि शिक्षा की नींव मजबूत करने वाले शिक्षकों और अनुदेशकों को सम्मानजनक मानदेय और सामाजिक सुरक्षा मिलनी चाहिए।
5 लाख तक की कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा
सरकार ने केवल मानदेय वृद्धि ही नहीं की बल्कि अनुदेशकों और उनके परिवारों के लिए 5 लाख रुपये तक की कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा की भी घोषणा की। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि सभी अनुदेशक बेसिक शिक्षा परिषद के पोर्टल पर पंजीकरण कराएं ताकि जल्द स्वास्थ्य कार्ड वितरित किए जा सकें।
लखनऊ के अनुदेशक कौशलेन्द्र सिंह चौहान ने कहा कि यह फैसला अनुदेशकों के आत्मसम्मान और आर्थिक मजबूती दोनों को बढ़ाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार ने पहली बार अनुदेशकों की समस्याओं को गंभीरता से समझा है।
लोकभवन में सम्मान समारोह बना यादगार
लोकभवन सभागार में आयोजित कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए 14 अनुदेशकों को मुख्यमंत्री ने चेक सौंपकर सम्मानित किया। इनमें गोरखपुर के देवेंद्र लाल, रायबरेली की शिखा सिंह, अयोध्या के उपेंद्र कुमार शुक्ला, लखनऊ के कौशलेन्द्र सिंह, उन्नाव की रश्मि यादव समेत कई अन्य अनुदेशक शामिल रहे।

रायबरेली की शिखा सिंह ने कहा कि पहले 9 हजार रुपये में परिवार चलाना मुश्किल था, लेकिन अब 17 हजार रुपये मिलने से बड़ी राहत मिलेगी। वहीं अयोध्या के उपेंद्र कुमार शुक्ला ने कहा कि सेवा में आने के बाद पहली बार अनुदेशकों के लिए इतना भव्य सम्मान समारोह आयोजित किया गया है।
शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव का ऐलान
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्यक्रम के दौरान शिक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर कई महत्वपूर्ण घोषणाएं भी कीं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार बेसिक शिक्षा परिषद की व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए 20 हजार नए शिक्षक और अनुदेशकों की भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है। इनमें 10 हजार नए शिक्षकों का अधियाचन शिक्षा सेवा चयन आयोग को भेजा जा चुका है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उच्च प्राथमिक विद्यालयों में नए अनुदेशकों की नियुक्ति से छात्र-शिक्षक अनुपात बेहतर होगा और शिक्षा की गुणवत्ता मजबूत होगी।
‘होलिस्टिक रिपोर्ट कार्ड’ का विमोचन
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने ‘होलिस्टिक रिपोर्ट कार्ड’ का भी विमोचन किया। यह रिपोर्ट कार्ड बाल वाटिका से कक्षा 8 तक के विद्यार्थियों के लिए तैयार किया गया है।

इसमें विद्यार्थियों के केवल शैक्षणिक प्रदर्शन ही नहीं बल्कि उनके शारीरिक, सामाजिक, भावनात्मक और व्यक्तित्व विकास का भी मूल्यांकन किया जाएगा। इसे नई शिक्षा नीति के अनुरूप बड़ा कदम माना जा रहा है।
96 प्रतिशत विद्यालयों में पहुंचीं बुनियादी सुविधाएं
मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘ऑपरेशन कायाकल्प’ और ‘स्कूल चलो अभियान’ के जरिए बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों की स्थिति में बड़ा बदलाव आया है। आज 96 प्रतिशत विद्यालयों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं और ड्रॉपआउट दर 17-18 प्रतिशत से घटकर करीब 3 प्रतिशत रह गई है।
उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य हर बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाना है और कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे।
डिजिटल शिक्षा और बालिका शिक्षा पर फोकस
बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री संदीप सिंह ने बताया कि प्रदेश में 1129 डिजिटल लाइब्रेरी संचालित हैं। इसके अलावा 746 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं और बाकी विकासखंडों में भी नए विद्यालय खोले जाएंगे। समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए 1,64,882 बच्चों को मुफ्त सहायक उपकरण भी वितरित किए गए हैं।
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