ग्रेटर नोएडा स्थित शारदा यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ डेंटल साइंसेज़ द्वारा शुकाई स्पेशल स्कूल में विशेष बच्चों के लिए एक विशेष डेंटल हेल्थ कैंप आयोजित किया गया। कैंप में बच्चों की डेंटल जांच, ओरल हाइजीन जागरूकता और डेंटल हेल्थ किट वितरण किया गया। विशेषज्ञ डॉक्टरों और इंटर्न्स ने बच्चों को स्वस्थ दांतों के महत्व के बारे में जागरूक किया।
ग्रेटर नोएडा में शारदा यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ डेंटल साइंसेज़ ने समाज के विशेष बच्चों के लिए एक सराहनीय पहल करते हुए शुकाई स्पेशल स्कूल में विशेष इनक्लूसिव डेंटल हेल्थ कैंप का आयोजन किया। इस कैंप का उद्देश्य विशेष आवश्यकता वाले बच्चों तक बेहतर ओरल हेल्थ सेवाएं पहुंचाना, उन्हें दांतों की सही देखभाल के प्रति जागरूक करना और स्वस्थ जीवनशैली के लिए प्रेरित करना था।
यह विशेष कैंप शारदा यूनिवर्सिटी के पब्लिक हेल्थ डेंटिस्ट्री विभाग की ओर से आयोजित किया गया, जिसमें डॉक्टरों और डेंटल इंटर्न्स की टीम ने बच्चों की डेंटल जांच करने के साथ-साथ उन्हें सही ओरल हाइजीन के बारे में व्यावहारिक जानकारी भी दी।

बच्चों के लिए दोस्ताना माहौल में हुई डेंटल जांच
कैंप का संचालन डॉ. स्वाति शर्मा की निगरानी में किया गया। उनके साथ डॉ. निश्था और डेंटल इंटर्न्स शिखा, शिवम, शिवांगी, श्रेया, श्रेयश, सिमरन और शुभांगी ने सक्रिय भूमिका निभाई।
टीम ने विशेष बच्चों के साथ बेहद संवेदनशील और दोस्ताना व्यवहार करते हुए उनकी डेंटल जांच की। डॉक्टरों ने बच्चों को यह भी सिखाया कि दांतों की सही सफाई कैसे की जाती है और नियमित ओरल केयर क्यों जरूरी है।
विशेष बच्चों के लिए आयोजित इस कैंप में डॉक्टरों ने यह सुनिश्चित किया कि बच्चे किसी प्रकार की झिझक या डर महसूस न करें। टीम ने बच्चों के साथ सहज संवाद स्थापित कर उन्हें मुस्कुराते हुए उपचार और जागरूकता प्रदान की।
ओरल हेल्थ जागरूकता पर विशेष जोर
कैंप का मुख्य उद्देश्य केवल दांतों की जांच तक सीमित नहीं था, बल्कि बच्चों और उनके अभिभावकों को ओरल हेल्थ के महत्व के प्रति जागरूक करना भी था।
विशेषज्ञों ने बताया कि कई बार विशेष आवश्यकता वाले बच्चों में ओरल हेल्थ की समस्याएं सामान्य बच्चों की तुलना में अधिक होती हैं, लेकिन जागरूकता की कमी और नियमित देखभाल न होने के कारण ये समस्याएं बढ़ जाती हैं।

कैंप के दौरान बच्चों को सही ब्रशिंग तकनीक, दांतों की सफाई के तरीके, नियमित चेकअप और स्वस्थ खानपान के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
“हर बच्चे को समान स्वास्थ्य सुविधाएं मिलना उसका अधिकार”
शारदा स्कूल ऑफ डेंटल साइंसेज़ के डीन डॉ. हेमंत साहनी ने इस अवसर पर कहा कि हर बच्चे को समान रूप से ओरल हेल्थ सुविधाएं मिलना उसका अधिकार है।
उन्होंने कहा,
“इस कैंप का उद्देश्य केवल डेंटल जांच करना नहीं था, बल्कि बच्चों और उनके अभिभावकों को सही ओरल हाइजीन की आदतें सिखाना भी था। हम चाहते हैं कि बच्चे आत्मविश्वास के साथ अपने स्वास्थ्य का ध्यान रख सकें और एक स्वस्थ भविष्य की ओर बढ़ें।”
डॉ. साहनी ने कहा कि इस तरह के सामाजिक और समावेशी कार्यक्रमों के जरिए विश्वविद्यालय समाज के हर वर्ग तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने का प्रयास कर रहा है।

समावेशी समाज बनाने की दिशा में पहल
शारदा यूनिवर्सिटी के डायरेक्टर पीआर डॉ. अजीत कुमार ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के कैंप केवल स्वास्थ्य सेवाएं देने तक सीमित नहीं होते, बल्कि समाज में संवेदनशीलता और जागरूकता बढ़ाने का भी कार्य करते हैं।
उन्होंने कहा,
“विशेष बच्चों के लिए आयोजित ऐसे कैंप समाज को अधिक संवेदनशील और समावेशी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। यह पहल बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के साथ-साथ उन्हें आत्मविश्वास और सुरक्षा का एहसास भी कराती है।”
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय भविष्य में भी इस प्रकार के सामाजिक सरोकार से जुड़े कार्यक्रमों का आयोजन करता रहेगा।

बच्चों को वितरित की गई डेंटल हाइजीन किट
कैंप के अंत में सभी विशेष बच्चों को डेंटल हाइजीन किट वितरित की गई। इन किट्स में टूथब्रश, टूथपेस्ट और अन्य आवश्यक ओरल केयर सामग्री शामिल थी।
बच्चों और स्कूल स्टाफ ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के कार्यक्रम बच्चों के स्वास्थ्य और जागरूकता के लिए बेहद लाभकारी साबित होते हैं।
शुकाई स्पेशल स्कूल के बच्चों ने पूरे उत्साह के साथ कैंप में भाग लिया और डॉक्टरों से ओरल हेल्थ से जुड़े कई सवाल भी पूछे।

सामाजिक जिम्मेदारी का उदाहरण बना कैंप
शारदा यूनिवर्सिटी का यह विशेष डेंटल हेल्थ कैंप केवल एक मेडिकल कैंप नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी और समावेशी सोच का उदाहरण बनकर सामने आया।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बच्चों को प्रारंभिक स्तर पर ओरल हेल्थ के प्रति जागरूक किया जाए तो भविष्य में कई गंभीर डेंटल समस्याओं से बचा जा सकता है।
इस पहल ने यह संदेश भी दिया कि समाज के हर वर्ग, विशेषकर विशेष आवश्यकता वाले बच्चों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
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