पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 के दूसरे चरण की वोटिंग के दौरान EVM में छेड़छाड़ के आरोपों ने सियासत गरमा दी है। BJP ने TMC पर गंभीर आरोप लगाए, जबकि TMC ने इसे सिरे से खारिज किया।
पश्चिम बंगाल में जारी विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे चरण के मतदान के बीच एक बड़ा विवाद सामने आया है, जिसने सियासी माहौल को और अधिक गर्म कर दिया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि कई मतदान केंद्रों पर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) में छेड़छाड़ की गई है।
बीजेपी का आरोप है कि फलता इलाके के कई पोलिंग बूथों पर EVM में बीजेपी के चुनाव चिन्ह वाले बटन पर टेप चिपका दिया गया, जिससे मतदाता उस विकल्प को चुन ही नहीं सके।यह पूरा मामला डायमंड हार्बर क्षेत्र से जुड़ा है, जिसे ममता बनर्जी के भतीजे और सांसद अभिषेक बनर्जी का मजबूत गढ़ माना जाता है।
बीजेपी का कहना है कि इस इलाके में चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए सुनियोजित तरीके से छेड़छाड़ की गई, ताकि पार्टी को नुकसान पहुंचाया जा सके।

बीजेपी के आईटी सेल प्रमुख और मीडिया प्रभारी अमित मालवीय ने इस मुद्दे को सोशल मीडिया पर उठाते हुए कहा कि यह “डायमंड हार्बर मॉडल” है, जिसके जरिए पहले भी चुनाव प्रभावित किए गए थे।उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा कि कई मतदान केंद्रों पर टेप लगाकर बीजेपी को वोट देने का विकल्प खत्म कर दिया गया, जिससे मतदाताओं को उनके अधिकार से वंचित किया गया।
अमित मालवीय ने चुनाव आयोग से मांग की है कि जिन बूथों पर इस तरह की गड़बड़ी सामने आई है, वहां दोबारा मतदान कराया जाए।
बीजेपी ने इस कथित धांधली को गंभीर लोकतांत्रिक उल्लंघन बताते हुए पुनर्मतदान (re-poll) की मांग की है। पार्टी का कहना है कि निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए यह जरूरी कदम है।
वहीं, तृणमूल कांग्रेस ने बीजेपी के इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। पार्टी के प्रवक्ता रिजु दत्ता ने पलटवार करते हुए कहा कि यह सब बीजेपी की राजनीतिक साजिश है।उन्होंने कहा कि बीजेपी के बजाय चुनाव आयोग को देखना चाहिए कि पर्यवेक्षक के तौर पर तैनात अधिकारियों की भूमिका क्या है।

टीएमसी ने चुनाव पर्यवेक्षक अजय पाल शर्मा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी का कहना है कि वह फलता क्षेत्र में घूम-घूमकर मतदाताओं और टीएमसी उम्मीदवारों को डराने की कोशिश कर रहे हैं।टीएमसी ने यह भी कहा कि यह मामला पूरी तरह चुनाव आयोग के दायरे में आता है और आयोग को इस पर तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।
इस पूरे विवाद के बीच चुनाव आयोग की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। बीजेपी और टीएमसी दोनों ही एक-दूसरे पर आरोप लगाते हुए आयोग से कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।टीएमसी ने यहां तक कहा कि बीजेपी के नेताओं को सोशल मीडिया पर बयान देने के बजाय औपचारिक शिकायत करनी चाहिए। साथ ही, पार्टी ने चुनाव अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग उठाई है।फिलहाल, इस मामले की सच्चाई क्या है, यह जांच के बाद ही साफ हो पाएगा। लेकिन जिस तरह से वोटिंग के बीच इस तरह के आरोप सामने आए हैं, उसने चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पश्चिम बंगाल का चुनाव पहले से ही हाई-वोल्टेज माना जाता है, लेकिन इस तरह के आरोपों ने इसे और अधिक संवेदनशील बना दिया है।जहां एक तरफ बीजेपी चुनावी धांधली का आरोप लगाकर आक्रामक रुख अपनाए हुए है, वहीं टीएमसी इसे साजिश बताकर पलटवार कर रही है।वोटिंग के बीच EVM से जुड़ा यह विवाद केवल एक तकनीकी मुद्दा नहीं, बल्कि लोकतंत्र की विश्वसनीयता से जुड़ा सवाल बन गया है।
अब सभी की नजरें चुनाव आयोग की कार्रवाई और जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या इन आरोपों में सच्चाई सामने आती है या यह केवल चुनावी राजनीति का एक और अध्याय बनकर रह जाएगा।
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