NEET UG 2026 री-एग्जाम के बाद सोशल मीडिया पर एक पोस्ट ने देशभर के लाखों छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। X पर एक यूजर ने दावा किया कि परीक्षा का प्रश्नपत्र टेलीग्राम के प्राइवेट चैनल पर 25-25 हजार रुपये में बेचा गया। हालांकि NTA ने इन दावों को फर्जी बताते हुए जांच शुरू कर दी है और कहा है कि अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ FIR दर्ज कराई जाएगी।
देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। 21 जून 2026 को आयोजित री-एग्जाम के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर वायरल हुए एक पोस्ट ने परीक्षा प्रणाली को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। पोस्ट में दावा किया गया कि प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले टेलीग्राम के एक निजी चैनल पर 25-25 हजार रुपये लेकर 100 से अधिक छात्रों को उपलब्ध कराया गया। हालांकि, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने इन दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए उन्हें भ्रामक और आधारहीन बताया है।
क्या है पूरा मामला?
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर मोहम्मद मुजम्मिल नाम के एक यूजर ने दावा किया कि 21 जून को आयोजित NEET UG री-एग्जाम का प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले टेलीग्राम के एक प्राइवेट ग्रुप में बेचा गया। पोस्ट में यह भी आरोप लगाया गया कि करीब 100 से ज्यादा छात्रों ने 25-25 हजार रुपये देकर कथित रूप से प्रश्नपत्र हासिल किया।
यूजर ने अपने दावे के समर्थन में कुछ स्क्रीनशॉट और वीडियो क्लिप साझा करने का भी दावा किया तथा इसे "100 प्रतिशत कन्फर्म पेपर लीक" बताया। यह पोस्ट वायरल होते ही सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई और हजारों छात्रों व अभिभावकों के बीच चिंता का माहौल बन गया।
NTA ने तुरंत दी आधिकारिक प्रतिक्रिया
वायरल पोस्ट के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने तत्काल प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर किए जा रहे पेपर लीक के दावों में कोई पुष्टि नहीं है। एजेंसी ने स्पष्ट किया कि वायरल वीडियो और स्क्रीनशॉट की तकनीकी जांच की जा रही है।
NTA के अनुसार, वायरल सामग्री में दिखाई दे रहे प्रश्नपत्र पर एक यूनिक Question Paper ID (QP ID) अंकित है। इसी पहचान संख्या के आधार पर यह पता लगाया जा सकता है कि संबंधित प्रश्नपत्र किस परीक्षा केंद्र और किस अभ्यर्थी को जारी किया गया था।
एजेंसी ने कहा कि इसी तकनीकी प्रक्रिया के जरिए पूरे मामले की जांच की जा रही है और यदि किसी प्रकार की फर्जीवाड़े की पुष्टि होती है तो उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
'फर्जी वीडियो बनाना भी अपराध'
NTA ने अपने आधिकारिक बयान में यह भी कहा कि टेलीग्राम या अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर व्यूज, फॉलोअर्स या आर्थिक लाभ के लिए फर्जी वीडियो, एडिटेड प्रश्नपत्र या भ्रामक सामग्री प्रसारित करना एक गंभीर आपराधिक कृत्य है।
एजेंसी ने चेतावनी दी कि साइबर सेल की सहायता से ऐसे लोगों और चैनलों की पहचान की जा रही है जो जानबूझकर गलत सूचनाएं फैला रहे हैं। यदि जांच में ऐसे लोग दोषी पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
री-एग्जाम के बाद फिर बढ़ी छात्रों की चिंता
हालांकि NTA ने पेपर लीक के दावों को खारिज कर दिया है, लेकिन इस विवाद ने लाखों छात्रों और उनके परिवारों की चिंता एक बार फिर बढ़ा दी है।
देशभर के अनेक अभ्यर्थियों का कहना है कि महीनों की कठिन तैयारी के बाद परीक्षा देने के बावजूद यदि बार-बार पेपर लीक जैसी खबरें सामने आती हैं, तो इससे उनकी मानसिक स्थिति प्रभावित होती है। कई अभिभावकों ने भी मांग की है कि ऐसे मामलों की जांच पूरी पारदर्शिता के साथ की जाए ताकि छात्रों का परीक्षा प्रणाली पर भरोसा बना रहे।
सोशल मीडिया पर दावों और जांच के बीच फर्क समझना जरूरी
विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली हर जानकारी को तथ्य नहीं माना जा सकता। किसी भी वायरल पोस्ट की सत्यता की पुष्टि जांच एजेंसियों द्वारा की जाती है।
इस मामले में भी अभी तक पेपर लीक की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल केवल सोशल मीडिया पर दावा किया गया है, जबकि NTA ने इसे अफवाह बताते हुए जांच शुरू कर दी है।
ऐसे में छात्रों और अभिभावकों को केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करना चाहिए और अपुष्ट संदेशों को साझा करने से बचना चाहिए।
तकनीकी जांच पर टिकी निगाहें
NTA का कहना है कि प्रश्नपत्र पर मौजूद यूनिक आईडी पूरी जांच की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। यदि वायरल वीडियो में दिखाया गया प्रश्नपत्र वास्तविक है, तो उसकी पहचान कर यह पता लगाया जा सकता है कि वह किस अभ्यर्थी तक पहुंचा था।
इसी तकनीकी प्रक्रिया के आधार पर एजेंसी यह तय करेगी कि वायरल सामग्री वास्तविक है, एडिटेड है या पूरी तरह फर्जी।
क्या फिर उठेंगे पारदर्शिता पर सवाल?
पिछले कुछ वर्षों में NEET परीक्षा कई बार विवादों में रही है। ऐसे में हर नया दावा छात्रों और अभिभावकों के बीच असमंजस पैदा करता है।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती और आधिकारिक रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं होती, तब तक किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। साथ ही परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और डिजिटल सुरक्षा को और मजबूत करने की जरूरत लगातार महसूस की जा रही है।
जांच जारी, अंतिम निष्कर्ष का इंतजार
फिलहाल NTA वायरल पोस्ट, वीडियो और प्रश्नपत्र की तकनीकी जांच कर रही है। एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि अफवाह फैलाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा और यदि किसी भी स्तर पर आपराधिक गतिविधि सामने आती है तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
वहीं दूसरी ओर लाखों छात्र और अभिभावक इस जांच के निष्कर्ष का इंतजार कर रहे हैं, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि सोशल मीडिया पर किए गए दावे सही थे या केवल भ्रामक सामग्री के जरिए भ्रम फैलाने की कोशिश की गई।
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