करीब दो महीने से उत्तर प्रदेश पुलिस और STF के लिए सिरदर्द बना एक लाख रुपये का इनामी शूटर संजय उर्फ संजीव आखिरकार लखनऊ में पुलिस मुठभेड़ में मारा गया। संजीव रियल एस्टेट कारोबारी संदीप सिंह की दिनदहाड़े हत्या का मुख्य शूटर था और उसका नाम कई संगठित आपराधिक घटनाओं में सामने आ चुका था।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में शनिवार सुबह हुई एक पुलिस मुठभेड़ ने पिछले कई सप्ताह से चर्चा में रहे संदीप सिंह हत्याकांड की जांच को एक बड़ा मोड़ दे दिया। स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने एक लाख रुपये के इनामी और कुख्यात शूटर संजय उर्फ संजीव को मुठभेड़ में मार गिराया। संजीव वही आरोपी था जिसकी तलाश पुलिस पिछले करीब दो महीने से लगातार कर रही थी और जिसे रियल एस्टेट कारोबारी संदीप सिंह की हत्या का मुख्य शूटर माना जा रहा था।
पुलिस के अनुसार, शनिवार तड़के STF को सूचना मिली कि संजय उर्फ संजीव लखनऊ के इंदिरा कैनाल रोड क्षेत्र में मौजूद है। सूचना मिलते ही STF और पुलिस की संयुक्त टीम ने इलाके की घेराबंदी कर दी। जैसे ही पुलिस टीम आरोपी के करीब पहुंची, उसने खुद को घिरता देख भागने का प्रयास किया और पुलिस पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी।
पुलिस ने पहले आरोपी को आत्मसमर्पण करने का मौका दिया, लेकिन लगातार हो रही फायरिंग के बीच जवाबी कार्रवाई करनी पड़ी। मुठभेड़ में संजय गंभीर रूप से घायल हो गया। पुलिस टीम ने उसे तुरंत हिरासत में लेकर डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

27 मई की हत्या जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया
दरअसल, 27 मई को लखनऊ के पीजीआई थाना क्षेत्र में रियल एस्टेट कारोबारी संदीप सिंह की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। यह वारदात बेहद सुनियोजित तरीके से अंजाम दी गई थी। घटना के बाद सामने आए सीसीटीवी फुटेज में दो शूटर साफ दिखाई दिए थे, जिसके बाद पुलिस ने पूरे मामले की गहन जांच शुरू की।
प्रारंभिक जांच में हत्या की साजिश के पीछे रियल एस्टेट कारोबारी दिनेश यादव का नाम सामने आया। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दिनेश यादव के साथ उसके ड्राइवर मुकरबीन और मुबीन को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। हालांकि हत्या को अंजाम देने वाले दोनों शूटर लगातार फरार थे, जिससे यह मामला पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ था।
लंबे समय से STF की रडार पर था संजय
STF के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक दीपक सिंह के अनुसार, संजय उर्फ संजीव की गिरफ्तारी पर उत्तर प्रदेश पुलिस ने एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया था। वह लगातार अपनी लोकेशन बदल रहा था और गिरफ्तारी से बचने के लिए अलग-अलग जिलों में छिपता फिर रहा था।
शनिवार सुबह उसकी मौजूदगी की पुख्ता सूचना मिलने के बाद विशेष रणनीति के तहत ऑपरेशन चलाया गया, जिसके दौरान मुठभेड़ हुई और अंततः पुलिस को बड़ी सफलता मिली।

अंबेडकरनगर का रहने वाला था कुख्यात अपराधी
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार मारा गया अपराधी संजय उर्फ संजीव पुत्र हरीराम अंबेडकरनगर जिले के अहिरौली थाना क्षेत्र के ग्राम चक कोदार का निवासी था।
उसके खिलाफ अंबेडकरनगर, बस्ती और अयोध्या सहित कई जिलों में हत्या, रंगदारी और अन्य गंभीर आपराधिक मामलों के मुकदमे दर्ज थे। पुलिस का कहना है कि वह लंबे समय से संगठित अपराध की दुनिया में सक्रिय था और कई बड़ी घटनाओं में उसकी भूमिका सामने आ चुकी थी।
खान मुबारक गैंग और दिलीप वर्मा से जुड़े होने का आरोप
STF के मुताबिक संजय का संबंध पूर्वांचल के कुख्यात अपराधी दिलीप वर्मा और खान मुबारक गैंग से भी रहा है। जांच एजेंसियों का दावा है कि उसने गैंग के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर कई गंभीर आपराधिक घटनाओं को अंजाम दिया था।
इसी नेटवर्क की वजह से वह लंबे समय तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर रहा और हर बार अपनी लोकेशन बदलकर जांच एजेंसियों को चकमा देता रहा।
क्या खत्म हो गया संदीप सिंह हत्याकांड?
मुख्य शूटर के मारे जाने के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या अब संदीप सिंह हत्याकांड पूरी तरह सुलझ गया है? पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मुठभेड़ में मुख्य शूटर के मारे जाने के बावजूद जांच अभी जारी रहेगी।
जांच एजेंसियां अब इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि हत्या की पूरी साजिश में और कौन-कौन लोग शामिल थे, किसने आर्थिक मदद पहुंचाई और किन लोगों ने शूटरों को संरक्षण दिया। पुलिस का मानना है कि इस मामले में अभी कई महत्वपूर्ण कड़ियां सामने आनी बाकी हैं।
STF की बड़ी सफलता
संजय उर्फ संजीव का एनकाउंटर STF के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है। एक लाख के इनामी अपराधी के मारे जाने से न केवल संदीप सिंह हत्याकांड की जांच को नई दिशा मिली है, बल्कि प्रदेश में सक्रिय संगठित अपराध के नेटवर्क पर भी बड़ा संदेश गया है।
हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मामले की कानूनी और विवेचनात्मक कार्रवाई अभी जारी है और हत्याकांड से जुड़े सभी पहलुओं की गहन जांच की जाएगी।
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