विधानसभा के विशेष सत्र के बीच महिला कांग्रेस ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। अलका लांबा के नेतृत्व में महिलाओं ने घेराव कर महिला आरक्षण लागू करने और OBC महिलाओं को शामिल करने की मांग उठाई।
विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान राजधानी में राजनीतिक माहौल उस समय गरमा गया, जब अलका लांबा के नेतृत्व में अखिल भारतीय महिला कांग्रेस ने विधानसभा का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया। सैकड़ों की संख्या में पहुंची महिला कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए महिला आरक्षण को तुरंत लागू करने की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर “महिला आरक्षण लागू करो, आज करो, अभी करो” और “OBC महिलाओं को शामिल करो” जैसे नारे लगाए। पूरे इलाके में विरोध की आवाज गूंजती रही और माहौल काफी देर तक तनावपूर्ण बना रहा।

अलका लांबा का सरकार पर सीधा हमला
महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष अलका लांबा ने प्रदर्शन के दौरान केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि वर्ष 2023 में सभी दलों के सहयोग से “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” पारित कराया गया था, लेकिन अब तक उसे लागू नहीं किया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब कानून पास हो चुका है तो उसे लागू करने में देरी क्यों हो रही है।
लांबा ने कहा कि “सरकार महिलाओं के मुद्दे पर केवल राजनीति कर रही है। अगर नीयत साफ है तो लोकसभा की 528 सीटों पर तुरंत महिला आरक्षण लागू किया जाना चाहिए।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नरेन्द्र मोदी सरकार महिलाओं को गुमराह कर रही है और उनके नाम पर राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास कर रही है।
शिल्पी अरोड़ा का बयान: “यह महिला आरक्षण नहीं, संरक्षण बिल”
अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की महासचिव एवं प्रभारी शिल्पी अरोड़ा ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि संसद में पारित किया गया बिल वास्तविक महिला आरक्षण बिल नहीं है। उन्होंने इसे “मोदी संरक्षण बिल” बताते हुए कहा कि देश की जनता को गलत नैरेटिव दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि अगर सरकार वास्तव में महिलाओं को सशक्त बनाना चाहती है तो महिला आरक्षण को तत्काल लागू करे और उसमें OBC महिलाओं को भी उचित प्रतिनिधित्व दिया जाए।

प्रदर्शन में दिखी भारी भागीदारी
इस प्रदर्शन में दिल्ली की विभिन्न जिला इकाइयों की अध्यक्षों सहित बड़ी संख्या में महिला कार्यकर्ता शामिल हुईं। पुष्पा सिंह और उस्मान भाई समेत कई स्थानीय नेता भी मौके पर मौजूद रहे। प्रदर्शनकारियों ने एकजुट होकर सरकार के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की और महिला अधिकारों की मांग को जोरदार तरीके से उठाया।
महिलाओं ने स्पष्ट कहा कि अब वे केवल आश्वासन नहीं, बल्कि अपने अधिकार चाहती हैं। उनका कहना था कि जब तक महिला आरक्षण को पूरी पारदर्शिता और न्यायसंगत तरीके से लागू नहीं किया जाएगा, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
पुतला दहन और नारेबाजी
प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री का पुतला दहन कर विरोध दर्ज कराया। इस दौरान “महिलाओं के अधिकार दो” और “सरकार जवाब दो” जैसे नारे लगाए गए। पुतला दहन के साथ ही विरोध प्रदर्शन और अधिक तीखा हो गया।

कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि महिलाओं के सम्मान और राजनीतिक भागीदारी के मुद्दे पर सरकार पूरी तरह विफल रही है। उनका कहना था कि महिलाओं को केवल चुनावी मुद्दा बनाकर छोड़ दिया जाता है, जबकि जमीनी स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता।
महिला आरक्षण पर बढ़ता दबाव
महिला कांग्रेस के इस प्रदर्शन के बाद महिला आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि आगामी चुनावों को देखते हुए यह मुद्दा और भी गर्मा सकता है।
महिला नेताओं ने यह भी कहा कि देश की आधी आबादी को उनका अधिकार दिलाने के लिए वे किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। उनका कहना था कि यह लड़ाई केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय की लड़ाई है।
महिला कांग्रेस ने संकेत दिए हैं कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। उन्होंने देशभर में इसी तरह के प्रदर्शन करने की योजना भी बनाई है।
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