Northern Railway ने इलेक्ट्रिक ट्रेनों की बिजली आपूर्ति से जुड़ी व्यवस्था को अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने के उद्देश्य से ट्रैक्शन पावर कंट्रोलर्स (TPCs) के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया है। गाजियाबाद में आयोजित पहले तीन दिवसीय बैच में छह मंडलों के 14 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। प्रशिक्षण में SCADA सिस्टम, आपातकालीन प्रबंधन, ट्रैक्शन सबस्टेशन की सुरक्षा और वास्तविक उपकरणों के संचालन से जुड़ी जानकारी दी गई।
इलेक्ट्रिक ट्रेनों का सुरक्षित और सुचारु संचालन केवल पटरियों, सिग्नल और ट्रेन के इंजन पर निर्भर नहीं करता, बल्कि इसके पीछे बिजली आपूर्ति की एक महत्वपूर्ण तकनीकी व्यवस्था भी काम करती है। इस व्यवस्था में किसी तरह की बाधा आने पर समय रहते स्थिति को समझना, संबंधित कर्मचारियों के साथ समन्वय बनाना और उचित परिचालन कदम उठाना बेहद जरूरी होता है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए Northern Railway के इलेक्ट्रिकल विभाग ने ट्रैक्शन पावर कंट्रोलर्स (TPCs) की तकनीकी दक्षता, परिचालन क्षमता और सुरक्षा संबंधी कौशल को मजबूत करने के लिए एक विशेष क्षमता निर्माण कार्यक्रम शुरू किया है।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य कर्मचारियों को केवल तकनीकी जानकारी देना नहीं, बल्कि उन्हें सामान्य परिचालन परिस्थितियों के साथ-साथ संभावित आपातकालीन स्थितियों से भी सुरक्षित और प्रभावी तरीके से निपटने के लिए तैयार करना है। इसके लिए कक्षा में प्रशिक्षण, सिम्युलेटर पर व्यावहारिक अभ्यास और वास्तविक रेलवे प्रतिष्ठानों में फील्ड ट्रेनिंग को एक साथ शामिल किया गया है।
छह मंडलों को कवर करने की योजना, पहले बैच में 14 प्रतिभागी
Northern Railway के इस क्षमता निर्माण कार्यक्रम का पहला तीन दिवसीय बैच 12 से 14 अक्टूबर 2026 तक आयोजित किया गया। यह छह निर्धारित बैचों की प्रशिक्षण श्रृंखला का पहला चरण है। योजना के अनुसार, नवंबर 2026 के अंत तक सभी छह बैच पूरे किए जाने हैं, ताकि Northern Railway के सभी छह मंडलों के ट्रैक्शन पावर कंट्रोलर्स को इस कार्यक्रम के अंतर्गत प्रशिक्षण दिया जा सके।

पहले बैच में कुल 14 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इनमें जम्मू, फिरोजपुर, अंबाला, दिल्ली, मुरादाबाद और लखनऊ मंडल के कर्मचारी शामिल रहे। इस तरह प्रशिक्षण कार्यक्रम में रेलवे के सभी छह मंडलों का प्रतिनिधित्व रहा।
कार्यक्रम का आयोजन गाजियाबाद स्थित इलेक्ट्रिक ट्रेनिंग सेंटर में किया गया। प्रशिक्षण को अधिक व्यावहारिक बनाने के लिए दिल्ली मंडल में SCADA और RCC से संबंधित व्यवस्थाओं का फील्ड विजिट भी कराया गया। इसके अतिरिक्त, प्रतिभागियों को चाणक्यपुरी स्थित 25 किलोवोल्ट (25 kV) ट्रैक्शन सबस्टेशन में भी व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
आखिर TPCs की भूमिका इतनी महत्वपूर्ण क्यों है?
ट्रैक्शन पावर कंट्रोलर्स यानी TPCs इलेक्ट्रिक ट्रेनों को बिजली की आपूर्ति से जुड़ी व्यवस्था की निगरानी और नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनकी जिम्मेदारियों में 25 kV ट्रैक्शन पावर सप्लाई की निगरानी करना, बिजली आपूर्ति से संबंधित परिचालन परिस्थितियों पर नियंत्रण रखना, फील्ड स्टाफ और ऑपरेटिंग कंट्रोल के बीच समन्वय स्थापित करना तथा आपूर्ति में व्यवधान आने पर उससे निपटने में सहायता करना शामिल है।
ऐसी जिम्मेदारियों में तकनीकी समझ के साथ-साथ सतर्कता, सही समय पर निर्णय और आपसी तालमेल भी जरूरी होता है। विशेष रूप से आपातकालीन परिस्थितियों में किसी समस्या पर त्वरित और व्यवस्थित प्रतिक्रिया देना परिचालन सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकता है।
इसी वजह से प्रशिक्षण कार्यक्रम में वास्तविक कार्य परिस्थितियों से जुड़े विषयों और अभ्यासों पर जोर दिया गया, जिससे कर्मचारियों की कार्यक्षमता को बेहतर बनाने में मदद मिल सके।

पहले दिन से तीसरे दिन तक क्या-क्या सिखाया गया?
प्रशिक्षण के पहले दिन TPCs की जिम्मेदारियों, SCADA सिस्टम, ट्रैक्शन सबस्टेशन में इस्तेमाल होने वाली सुरक्षा प्रणालियों और फील्ड स्टाफ तथा कंट्रोल के साथ समन्वय से संबंधित विषयों को शामिल किया गया। इसका उद्देश्य प्रतिभागियों को उनके कार्यक्षेत्र और बिजली आपूर्ति व्यवस्था से जुड़े प्रमुख परिचालन पहलुओं की जानकारी देना था।
दूसरे दिन प्रशिक्षण का मुख्य केंद्र SCADA ट्रेनिंग सिम्युलेटर रहा। प्रतिभागियों ने इस सिम्युलेटर पर स्वयं अभ्यास किया और सिम्युलेटेड वातावरण में अलग-अलग परिचालन परिस्थितियों पर प्रतिक्रिया देने की प्रक्रिया को समझा। इस अभ्यास के माध्यम से उन्हें आपातकालीन स्थितियों में संभावित प्रतिक्रिया और परिचालन प्रबंधन का अभ्यास करने का अवसर मिला।
तीसरे दिन चाणक्यपुरी स्थित ट्रैक्शन सबस्टेशन में व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। यहां प्रतिभागियों को उपकरणों के संचालन और सुरक्षा से संबंधित व्यवस्थाओं को करीब से समझने का अवसर मिला। इस फील्ड ट्रेनिंग का उद्देश्य कक्षा और सिम्युलेटर में प्राप्त जानकारी को वास्तविक कार्यस्थल पर मौजूद उपकरणों और व्यवस्थाओं से जोड़ना था।
इस प्रकार तीनों दिन के प्रशिक्षण में सैद्धांतिक जानकारी, नियंत्रित वातावरण में अभ्यास और वास्तविक उपकरणों से परिचित होने पर विशेष ध्यान दिया गया।

ज्ञान का आकलन, फीडबैक और प्रमाणपत्र वितरण के साथ हुआ समापन
तीन दिवसीय कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों के ज्ञान का आकलन किया गया। इसके साथ ही प्रशिक्षण को लेकर उनका फीडबैक लिया गया और प्रमाणपत्र वितरित किए गए। इससे कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागियों की सीख और प्रशिक्षण अनुभव को समझने का अवसर मिला।
Northern Railway के इलेक्ट्रिकल विभाग की यह पहल कर्मचारियों की तकनीकी दक्षता और परिचालन कौशल को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसके जरिए विभाग का उद्देश्य कार्यस्थल पर बेहतर समन्वय विकसित करना और इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन पर चलने वाली ट्रेनों के सुरक्षित तथा भरोसेमंद संचालन को सहयोग देना है।
अब नवंबर 2026 के अंत तक निर्धारित सभी छह बैचों के आयोजन के साथ इस कार्यक्रम को Northern Railway के सभी छह मंडलों तक पहुंचाने की योजना है। प्रशिक्षण का व्यापक उद्देश्य यही है कि बिजली आपूर्ति से जुड़ी जिम्मेदारियां निभाने वाले कर्मचारी तकनीकी रूप से अधिक सक्षम हों और सामान्य परिचालन से लेकर आपातकालीन परिस्थितियों तक अपनी भूमिका प्रभावी ढंग से निभा सकें।
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