उत्तर प्रदेश के खाद्य एवं रसद मंत्री मनोज कुमार पाण्डेय ने किसानों को फसल का उचित मूल्य और अधिकतम 48 घंटे में भुगतान देने का दावा किया है। खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में 65 लाख मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य रखा गया है। वहीं राशन वितरण में घटतौली और अवैध वसूली पर कार्रवाई, 8,753 अन्नपूर्णा भवनों के संचालन तथा पांच रुपये में भोजन उपलब्ध कराने की तैयारी की जानकारी भी दी गई है।
उत्तर प्रदेश में किसानों से अनाज खरीद और गरीब परिवारों तक राशन पहुंचाने की व्यवस्था को लेकर सरकार ने सख्त रुख अपनाने का संदेश दिया है। खाद्य एवं रसद मंत्री मनोज कुमार पाण्डेय ने कहा है कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य और समय पर भुगतान कराना तथा पात्र लाभार्थियों को निर्धारित मात्रा में पूरा राशन उपलब्ध कराना प्रदेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में खाद्यान्न खरीद और सार्वजनिक वितरण प्रणाली को पारदर्शी, सुगम और जवाबदेह बनाने पर जोर दिया जा रहा है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि घटतौली, अनियमितता या अवैध वसूली की शिकायत मिलने पर कठोर कार्रवाई होगी।
धान खरीद के लिए 5,047 केंद्र, 65 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य
खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) कॉमन श्रेणी के लिए 2,441 रुपये और ग्रेड-ए के लिए 2,461 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। प्रदेश में 65 लाख मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य रखा गया है, जिसके लिए 5,047 क्रय केंद्र संचालित हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 12 अक्टूबर और पूर्वी उत्तर प्रदेश में 1 नवंबर 2026 से खरीद शुरू हो चुकी है।
मंत्री के मुताबिक, अब तक 7,230 किसानों से 40,447 मीट्रिक टन धान खरीदा गया है और लगभग 50 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है।
धान खरीद में पारदर्शिता के लिए ऑनलाइन किसान पंजीकरण, भूलेख पोर्टल का ई-उपार्जन पोर्टल से एकीकरण और ई-पॉप मशीनों के माध्यम से आधार आधारित बायोमीट्रिक सत्यापन की व्यवस्था की गई है। इससे वास्तविक किसानों से सीधे खरीद और बिचौलियों पर अंकुश लगाने में मदद मिलने की बात कही गई है।
पिछले वर्षों में धान और गेहूं खरीद के आंकड़े
सरकार के आंकड़ों के अनुसार, खरीफ विपणन वर्ष 2012-13 से 2016-17 के बीच 14.87 लाख किसानों से 123.61 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा गया और 17,190.85 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ। वहीं 2017-18 से 2025-26 तक 80.39 लाख किसानों से 528.39 लाख मीट्रिक टन धान खरीदकर 99,733.10 करोड़ रुपये दिए गए।
वर्ष 2025-26 में 60 लाख मीट्रिक टन के लक्ष्य के मुकाबले रिकॉर्ड 62.30 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा गया। इस दौरान 10.53 लाख किसानों को 14,883 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया।
गेहूं खरीद में भी सरकार ने पिछले आंकड़े साझा किए। रबी विपणन वर्ष 2012-13 से 2016-17 तक 19.02 लाख किसानों से 94.38 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदकर 12,808.67 करोड़ रुपये दिए गए। इसके मुकाबले 2017-18 से 2026-27 तक 55.89 लाख किसानों से 265.82 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदकर 51,550.10 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया।

बाजरा, ज्वार और मक्का पर भी MSP का लाभ
सरकार धान और गेहूं के साथ मोटे अनाज के उत्पादकों को भी समर्थन मूल्य का लाभ देने की बात कह रही है। वर्तमान वर्ष में बाजरा का MSP 2,900 रुपये प्रति क्विंटल है। 2.20 लाख मीट्रिक टन लक्ष्य के लिए 285 केंद्र संचालित हैं। अब तक 2,244 किसानों से 8,716 मीट्रिक टन बाजरा खरीदकर 20.82 करोड़ रुपये दिए गए हैं। वर्ष 2022-23 से 2025-26 तक 7.14 लाख मीट्रिक टन बाजरा खरीदकर 1,48,718 किसानों को 1,854 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ।
हाइब्रिड ज्वार का MSP 4,023 रुपये प्रति क्विंटल है। 50 हजार मीट्रिक टन लक्ष्य के लिए 95 केंद्र हैं। अब तक 106 किसानों से 347 मीट्रिक टन खरीद और 93 लाख रुपये भुगतान हुआ है। वर्ष 2023-24 से 2025-26 तक 1.04 लाख मीट्रिक टन ज्वार खरीदकर 26,972 किसानों को 363.35 करोड़ रुपये दिए गए।
मक्का का MSP 2,410 रुपये प्रति क्विंटल है। 15 हजार मीट्रिक टन लक्ष्य के लिए 120 केंद्र संचालित हैं। वर्ष 2018-19 से 2025-26 तक 1.74 लाख मीट्रिक टन मक्का खरीदकर 40,322 किसानों को 349.06 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया।
फार्मर आईडी से पंजीकरण, 48 घंटे में भुगतान का दावा
खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में पंजीकरण और सत्यापन की प्रक्रिया सरल की गई है। किसान अपनी फार्मर आईडी में दर्ज विवरण से संतुष्ट हैं तो उसी आधार पर पंजीकरण करा सकते हैं। असंतुष्ट होने पर पिछले वर्ष की प्रक्रिया के अनुसार पंजीकरण कराकर उपज बेच सकते हैं। अब तक 1.40 लाख से अधिक किसान धान और मोटे अनाज की बिक्री के लिए ऑनलाइन पंजीकरण करा चुके हैं। खरीदी गई उपज का भुगतान अधिकतम 48 घंटे में PFMS के जरिए सीधे बैंक खातों में भेजने की व्यवस्था बताई गई है।
राशन में घटतौली और अवैध वसूली पर कार्रवाई
मंत्री ने कहा कि पात्र लाभार्थियों को निर्धारित मात्रा में पूरा राशन मिलना चाहिए। जिला पूर्ति अधिकारी या निरीक्षक द्वारा उचित दर विक्रेता से अवैध धन वसूली की शिकायत मिलने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। मुख्यमंत्री की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत निष्पक्ष कार्रवाई का निर्देश दिया गया है।
उचित दर विक्रेताओं का कमीशन दीपावली से पहले उनके बैंक खातों में भेजने के निर्देश भी दिए गए हैं। मंत्री ने राशन वितरण व्यवस्था में उनकी भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए देयकों का समय से भुगतान सुनिश्चित करने की बात कही।
8,753 अन्नपूर्णा भवन तैयार, पांच रुपये में भोजन की तैयारी
प्रदेश में 8,753 अन्नपूर्णा भवन बनकर तैयार हैं, जबकि 2,573 भवन निर्माणाधीन हैं। इन भवनों पर लाभार्थियों के बैठने और पेयजल, गुड़ एवं पेठे की व्यवस्था के लिए जिलों को धनराशि भेजी गई है। यह व्यवस्था जिलाधिकारियों की देखरेख में सुनिश्चित की जाएगी।
इसके अलावा प्रदेश की मंडियों और श्रमिक बहुल तथा अत्यंत गरीब क्षेत्रों में जरूरतमंदों को अन्नपूर्णा रसोई के माध्यम से मात्र पांच रुपये में भोजन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी। इससे किसानों, श्रमिकों और जरूरतमंद लोगों को सस्ती दर पर भोजन मिल सकेगा।
मंत्री ने बताया कि खरीद और वितरण व्यवस्था की जमीनी स्थिति जांचने के लिए औचक निरीक्षण किए जा रहे हैं। यह सिलसिला जारी रहेगा और प्रत्येक सप्ताह निरीक्षण किया जाएगा।
सरकार का संदेश साफ है—किसान को फसल का उचित मूल्य, गरीब को पूरा राशन और जरूरतमंद को सस्ता भोजन। अब इन घोषणाओं का वास्तविक लाभ लोगों तक कितनी प्रभावी तरीके से पहुंचता है, इस पर निगरानी और जवाबदेही अहम होगी।
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