गाजियाबाद में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) के तत्वावधान में स्वास्थ्य जागरूकता अभियान आयोजित किया गया। इसमें ब्लॉक कोऑर्डिनेटर अंजू चौहान ने नियमित टीकाकरण, गर्भावस्था के दौरान टीडी वैक्सीन और नवजात शिशुओं के टीकाकरण की समय-सारणी के बारे में जानकारी दी। PLV माया चौहान ने युवाओं से समाज में जागरूकता फैलाने की अपील की।
कई गंभीर बीमारियों से बचाव का रास्ता समय पर उठाए गए एक छोटे से कदम से होकर गुजरता है। खासकर बच्चों और गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य के मामले में नियमित टीकाकरण बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके बावजूद जानकारी की कमी, समय-सारणी को लेकर भ्रम और जागरूकता के अभाव में कई बार जरूरी टीके समय पर नहीं लग पाते। इसी विषय को ध्यान में रखते हुए गाजियाबाद में युवाओं और छात्रों को स्वास्थ्य सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए एक विशेष अभियान आयोजित किया गया।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA), गाजियाबाद के तत्वावधान में पराविधिक स्वयंसेवक (PLV) माया चौहान के सहयोग से 'इंदिरा महिला विकास एवं प्रशिक्षण संस्थान' के छात्रों और युवाओं के लिए यह कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें मुख्य वक्ता ब्लॉक कोऑर्डिनेटर अंजू चौहान ने नियमित टीकाकरण के महत्व और इससे होने वाले स्वास्थ्य लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवाओं को स्वास्थ्य संबंधी जरूरी जानकारियों से अवगत कराना और उन्हें अपने परिवार तथा आसपास के लोगों को जागरूक करने के लिए प्रेरित करना रहा।
12 गंभीर बीमारियों से बचाव में टीकाकरण की भूमिका
कार्यक्रम के दौरान ब्लॉक कोऑर्डिनेटर अंजू चौहान ने नियमित टीकाकरण की उपयोगिता पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि निर्धारित समय पर टीके लगवाने से बच्चों और गर्भवती महिलाओं को कई गंभीर बीमारियों से सुरक्षा मिल सकती है। उन्होंने टीकाकरण को केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य तक सीमित न मानते हुए परिवार और समाज की सुरक्षा से भी जोड़ा।

उन्होंने छात्रों और युवाओं को समझाया कि बच्चों के टीकाकरण में लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। जन्म के समय दिए जाने वाले टीकों से लेकर आगे की उम्र में निर्धारित समय पर लगने वाले टीकों तक, हर चरण का अपना महत्व है। अभिभावकों को बच्चों के टीकाकरण का रिकॉर्ड सुरक्षित रखना चाहिए और अगली खुराक की तारीख का ध्यान रखना चाहिए।
कार्यक्रम में 12 जानलेवा बीमारियों से बचाव के लिए नियमित टीकाकरण की भूमिका पर विशेष जानकारी दी गई। हालांकि, कौन-से टीके किस उम्र में लगने चाहिए, इसकी पुष्टि संबंधित स्वास्थ्य केंद्र या स्वास्थ्यकर्मी से कराना आवश्यक है।
गर्भवती महिलाओं के लिए टीकाकरण क्यों जरूरी?
अभियान में गर्भावस्था के दौरान टीकाकरण के महत्व पर भी विस्तार से चर्चा की गई। अंजू चौहान ने गर्भवती महिलाओं को टेटनस से सुरक्षा देने वाले टीडी (टेटनस और वयस्क डिप्थीरिया) टीके के महत्व और निर्धारित समय पर इसे लगवाने की आवश्यकता के बारे में जानकारी दी।
गर्भावस्था के दौरान उचित स्वास्थ्य देखभाल और अनुशंसित टीकाकरण मां तथा नवजात शिशु की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में गर्भवती महिलाओं को नियमित स्वास्थ्य जांच करानी चाहिए और डॉक्टर या स्वास्थ्यकर्मी की सलाह के अनुसार टीकाकरण कराना चाहिए।
कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि परिवार के सदस्यों को भी गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य के प्रति जिम्मेदारी निभानी चाहिए। टीकाकरण की तारीख, स्वास्थ्य जांच और जरूरी चिकित्सकीय सलाह को नजरअंदाज करने से बचना चाहिए।
जन्म के बाद से ही जरूरी है बच्चों की सुरक्षा
नवजात शिशुओं के टीकाकरण को लेकर भी छात्रों और युवाओं को जागरूक किया गया। कार्यक्रम में जन्म के तुरंत बाद दिए जाने वाले आवश्यक टीकों से लेकर आगे की निर्धारित खुराकों तक की समय-सारणी के बारे में जानकारी साझा की गई।

बच्चों को समय पर टीके लगवाने के लिए माता-पिता को टीकाकरण कार्ड संभालकर रखना चाहिए। यदि किसी कारण से कोई खुराक छूट जाए, तो स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क कर आगे की प्रक्रिया की जानकारी लेनी चाहिए। टीकाकरण संबंधी सही जानकारी मिलने से परिवार समय रहते जरूरी कदम उठा सकते हैं।
युवाओं से जागरूकता फैलाने की अपील
पराविधिक स्वयंसेवक (PLV) माया चौहान ने युवाओं से अपील की कि वे इस अभियान के संदेश को अपने घरों, पड़ोस और समुदाय तक पहुंचाएं। उन्होंने कहा कि बच्चों और गर्भवती महिलाओं के टीकाकरण को लेकर जागरूकता बढ़ाना सामाजिक जिम्मेदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
युवाओं की भागीदारी से उन परिवारों तक भी स्वास्थ्य संबंधी जानकारी पहुंचाई जा सकती है, जिन्हें सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं और टीकाकरण कार्यक्रमों के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं है। समय पर सही जानकारी मिलने से लोग अपने बच्चों और परिवार के स्वास्थ्य की बेहतर देखभाल कर सकते हैं।
जागरूकता से मजबूत होगी स्वास्थ्य सुरक्षा
गाजियाबाद में आयोजित यह अभियान स्वास्थ्य जागरूकता और सामुदायिक भागीदारी के महत्व को सामने लाता है। नियमित टीकाकरण के प्रति जागरूकता बढ़ाकर बच्चों और गर्भवती महिलाओं को कई गंभीर बीमारियों से बचाने में मदद मिल सकती है।
कार्यक्रम के माध्यम से छात्रों और युवाओं को यह संदेश दिया गया कि स्वास्थ्य सुरक्षा केवल स्वास्थ्य विभाग या चिकित्सकों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति की भागीदारी भी इसमें महत्वपूर्ण है। सही जानकारी साझा करना, टीकाकरण की समय-सारणी का पालन करना और जरूरत पड़ने पर स्वास्थ्यकर्मियों से सलाह लेना एक स्वस्थ समाज की दिशा में अहम कदम हैं।
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