लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कांग्रेस और उसके सहयोगियों पर लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता कमजोर करने, बांग्लादेश जैसी सत्ता परिवर्तन की बात करने और चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाकर राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने के आरोप लगाए। उन्होंने राहुल गांधी के वोट चोरी के दावों, कांग्रेस के पुराने राजनीतिक फैसलों और मोदी सरकार के कार्यकाल में भारत की वैश्विक स्थिति पर भी अपनी बात रखी।
देश में चुनावी प्रक्रिया, निर्वाचन आयोग और विपक्ष के विरोध प्रदर्शनों को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच रक्षा मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता राजनाथ सिंह ने कांग्रेस तथा उसके सहयोगी दलों पर तीखा हमला बोला है। लखनऊ स्थित भाजपा के प्रदेश मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष लोकतांत्रिक संस्थाओं पर सवाल उठाने के बहाने देश में अराजकता का माहौल बनाने और बांग्लादेश जैसी सत्ता परिवर्तन की स्थिति पैदा करने की कोशिश कर रहा है।
राजनाथ सिंह के मुताबिक, विपक्ष की लड़ाई चुनाव सुधार, एफआईआर, मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार या युवाओं के भविष्य के लिए नहीं, बल्कि सत्ता हासिल करने के लिए है। उन्होंने दावा किया कि राजनीतिक स्वार्थ को राष्ट्रीय हित से ऊपर रखने के कारण लोकतांत्रिक विमर्श में तथ्यों की जगह भ्रामक प्रचार ले रहा है। हालांकि, सत्ता परिवर्तन की साजिश और अराजकता फैलाने से जुड़े ये आरोप राजनाथ सिंह के राजनीतिक बयान हैं।
आपातकाल से कारसेवकों पर गोलीबारी तक, कांग्रेस के इतिहास पर सवाल
रक्षा मंत्री ने कांग्रेस के राजनीतिक इतिहास का उल्लेख करते हुए तीन घटनाओं को गंभीर और अक्षम्य बताया। इनमें 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लगाया गया आपातकाल, 1984 के सिख विरोधी दंगे और 1990 में रामभक्तों तथा कारसेवकों पर हुई गोलीबारी शामिल हैं। उन्होंने कांग्रेस पर इन घटनाओं के लिए जिम्मेदारी और संरक्षण से जुड़े सवाल उठाए।
राजनाथ सिंह ने आरोप लगाया कि अब संविधान और संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने की कोशिश एक चौथे गंभीर कृत्य के रूप में सामने आ रही है। उन्होंने इंदिरा गांधी के दौर के आपातकाल की तुलना राहुल गांधी की मौजूदा राजनीति से करते हुए कहा कि एक समय लोकतंत्र को कैद किया गया था, जबकि अब संविधान की रक्षा के नाम पर अराजकता फैलाने की कोशिश हो रही है।

उन्होंने राहुल गांधी और उनके सहयोगियों से कानून का सम्मान करने, जनादेश स्वीकार करने और लोकतंत्र के नाम पर संस्थाओं की विश्वसनीयता को नुकसान नहीं पहुंचाने की अपील भी की। उनके अनुसार, लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध का अधिकार है, लेकिन इसके नाम पर अव्यवस्था पैदा करना उचित नहीं है।
निर्वाचन आयोग पर कांग्रेस के पुराने फैसलों का जिक्र
राजनाथ सिंह ने निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता को लेकर कांग्रेस के मौजूदा सवालों के जवाब में उसके पुराने कार्यकाल का जिक्र किया। उन्होंने 1993 में दो अतिरिक्त निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति और 2006 में तत्कालीन मुख्य निर्वाचन आयुक्त एन. गोपालस्वामी द्वारा निर्वाचन आयुक्त नवीन चावला को हटाने की सिफारिश का उल्लेख किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि नवीन चावला पर कांग्रेस नेताओं के साथ निकटता और संवेदनशील जानकारी साझा किए जाने से संबंधित आरोप लगे थे, लेकिन उन्हें हटाने के बजाय बाद में मुख्य निर्वाचन आयुक्त बनाया गया। राजनाथ सिंह ने इसे संस्थागत स्वतंत्रता के प्रति कांग्रेस के रवैये से जोड़कर पेश किया। उन्होंने कांग्रेस शासनकाल में निर्वाचन आयुक्त रहे एम.एस. गिल के बाद में दो बार केंद्रीय मंत्री बनने का भी उल्लेख किया।
‘वोट चोरी’ के दावों पर राहुल गांधी से मांगा जवाब
राहुल गांधी के कथित वोट चोरी के दावों पर सवाल उठाते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि कांग्रेस को पहले अपने चुनावी प्रदर्शन की समीक्षा करनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस उत्तर प्रदेश में 1985 के बाद विधानसभा चुनाव में सत्ता हासिल नहीं कर सकी और 1984 के बाद लोकसभा में अपने दम पर बहुमत नहीं जुटा पाई।
उन्होंने मतदाता पहचान पत्रों के इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि देश में लंबे समय तक बिना वोटर आईडी कार्ड के चुनाव होते रहे और 1993 के आसपास मतदाता पहचान पत्रों की व्यवस्था को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाया गया। उन्होंने सवाल किया कि यदि कांग्रेस के वोट चोरी हो रहे हैं, तो उसके लंबे चुनावी संघर्ष की वजह क्या है।
राहुल गांधी द्वारा वोट चोरी के आरोपों को ‘हाइड्रोजन बम’ बताए जाने पर भी राजनाथ सिंह ने निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि मतदाता सूची से जुड़े उदाहरणों में एक 70 वर्षीय महिला को दो जगह वोट देने वाला बताया गया और एक 35 वर्षीय महिला की उम्र 124 वर्ष बताने का आरोप लगाया गया। उनके मुताबिक, ऐसे उदाहरणों से विपक्ष के दावों पर सवाल उठते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस ने मतदाता सूची के खिलाफ कोई औपचारिक अपील नहीं की, क्योंकि उसके पास पर्याप्त सबूत नहीं थे। ये सभी बातें राजनाथ सिंह द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस में रखे गए दावे हैं।
राजीव गांधी की हत्या के बाद चुनाव स्थगित करने पर भी सवाल
रक्षा मंत्री ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के बाद चुनाव स्थगित किए जाने के फैसले का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सामान्य तौर पर किसी उम्मीदवार की मृत्यु होने पर संबंधित निर्वाचन क्षेत्र में मतदान टालने की व्यवस्था रही है। ऐसे में उन्होंने सवाल किया कि राजीव गांधी की हत्या के बाद देशभर में चुनाव स्थगित करने की परिस्थितियां क्या थीं, जबकि अमेठी में मतदान पहले ही हो चुका था।

राजनाथ सिंह ने कहा कि कांग्रेस आज निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाती है, इसलिए उसे अपने शासनकाल के फैसलों पर भी जवाब देना चाहिए।
मोदी सरकार की उपलब्धियां गिनाईं, भारत की छवि पर विपक्ष को घेरा
प्रेस कॉन्फ्रेंस में राजनाथ सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा का भी उल्लेख किया। उन्होंने भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल बताया और डिजिटल लेनदेन, अंतरिक्ष कार्यक्रम तथा दो दर्जन से अधिक देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों का जिक्र किया। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को 35 देशों के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है।
रक्षा मंत्री के अनुसार, भारत का रक्षा उत्पादन लगभग 30 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर 1.78 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। उन्होंने कहा कि भारत अब रक्षा उपकरणों के आयातक से आगे बढ़कर निर्यातक देश बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उनका आरोप था कि कांग्रेस और उसके सहयोगी भारत की उपलब्धियों की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।
गांधी के नाम और कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति पर भी निशाना
राजनाथ सिंह ने चौराचौरा की घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि हिंसा के बाद महात्मा गांधी ने असहयोग आंदोलन स्थगित कर दिया था। उन्होंने इसकी तुलना मौजूदा राजनीतिक बयानों से करते हुए कांग्रेस पर नैतिक मूल्यों से समझौता करने का आरोप लगाया और कहा कि पार्टी को महात्मा गांधी के नाम का इस्तेमाल करने के अपने अधिकार पर आत्ममंथन करना चाहिए।
उन्होंने उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के 37 वर्षों से सत्ता से बाहर रहने का हवाला देते हुए पूछा कि क्या इसकी वजह वोट चोरी है या पार्टी की अपनी राजनीतिक कमजोरियां। उन्होंने रायबरेली से राहुल गांधी की जीत में समाजवादी पार्टी के समर्थन की भूमिका पर भी सवाल उठाया। साथ ही, कांग्रेस की प्रदेश इकाई के नेताओं के बीच सार्वजनिक बयानबाजी और कथित झड़पों का जिक्र कर कहा कि देश में अस्थिरता की बात करने वाली पार्टी को पहले अपने संगठन की स्थिति सुधारनी चाहिए।
फिलहाल, इस पूरे विवाद का केंद्र निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता, मतदाता सूचियों पर उठे सवाल और सत्ता पक्ष-विपक्ष के बीच तीखी होती राजनीतिक बयानबाजी है। राजनाथ सिंह ने विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक स्वार्थ से प्रेरित बताया है, जबकि इन दावों और जवाबी आरोपों का अंतिम आकलन तथ्यों, उपलब्ध साक्ष्यों और संवैधानिक प्रक्रियाओं के आधार पर ही किया जाना चाहिए।
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