उत्तर प्रदेश के मऊ जिले को विद्युत व्यवस्था के क्षेत्र में बड़ी सौगात मिली है। ऊर्जा मंत्री ए. के. शर्मा ने 530 लाख रुपये की लागत से बनने वाले 33/11 केवी विद्युत उपकेंद्र का शिलान्यास किया। 5+5 एमवीए क्षमता वाले इस उपकेंद्र से लगभग 4,000 उपभोक्ताओं को निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण बिजली मिलेगी। इसके साथ ही क्षेत्र में लो-वोल्टेज, ओवरलोडिंग और फॉल्ट जैसी समस्याओं में भी उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है।
उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेश की विद्युत व्यवस्था को आधुनिक और अधिक भरोसेमंद बनाने की दिशा में लगातार बड़े कदम उठा रही है। इसी क्रम में मऊ जिले को भी एक महत्वपूर्ण सौगात मिली है। नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए. के. शर्मा ने बुधवार को बंधा रोड स्थित प्रस्तावित 33/11 केवी विद्युत उपकेंद्र का वैदिक मंत्रोच्चार एवं विधि-विधान के साथ भूमि पूजन कर शिलान्यास किया। लगभग 530 लाख रुपये की लागत से बनने वाला यह उपकेंद्र न केवल क्षेत्र की बिजली व्यवस्था को मजबूत करेगा, बल्कि हजारों उपभोक्ताओं को वर्षों से चली आ रही लो-वोल्टेज, ओवरलोडिंग और बार-बार बिजली बाधित होने जैसी समस्याओं से भी राहत दिलाएगा।
शिलान्यास के बाद बहुउद्देशीय भवन मंगलम में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ऊर्जा मंत्री ए. के. शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार विद्युत क्षेत्र को आधुनिक, सुदृढ़ और पूरी तरह उपभोक्ता-केंद्रित बनाने के लक्ष्य के साथ लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक नागरिक तक गुणवत्तापूर्ण, सुरक्षित, विश्वसनीय और निर्बाध बिजली पहुंचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।
ऊर्जा मंत्री ने कहा कि आज के दौर में बिजली केवल एक मूलभूत सुविधा नहीं, बल्कि प्रदेश के आर्थिक विकास की मजबूत आधारशिला है। उद्योग, व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और आम जनजीवन—सभी की गति बिजली पर निर्भर करती है। इसी सोच के साथ प्रदेशभर में विद्युत उत्पादन, पारेषण और वितरण व्यवस्था को लगातार मजबूत किया जा रहा है ताकि भविष्य की बढ़ती मांग को भी आसानी से पूरा किया जा सके।

उन्होंने बताया कि मऊ में बनने वाला नया 33/11 केवी विद्युत उपकेंद्र लगभग 530 लाख रुपये की लागत से तैयार होगा। इसकी क्षमता 5+5 एमवीए होगी। इसके अंतर्गत चार नए 11 केवी फीडरों का भी निर्माण किया जाएगा। इससे वर्तमान में संचालित विद्युत उपकेंद्रों पर पड़ने वाला अतिरिक्त भार कम होगा और पूरे क्षेत्र की विद्युत वितरण व्यवस्था अधिक संतुलित, व्यवस्थित और प्रभावी बन सकेगी।
ऊर्जा मंत्री ने बताया कि इस उपकेंद्र के शुरू होने के बाद पटन टोला, व्यारी टोला, संस्कृत पाठशाला क्षेत्र, हरिकेशपुरा, सदर चौक, मलिक टोला, हट्टी मदारी, औरंगाबाद, हनुमान घाट, ऑफिसर्स कॉलोनी, रेलवे क्वार्टर, गायघाट, खालसा, ख्वाजाजहांपुर तथा कागजीवनचक सहित कई इलाकों के करीब 4,000 उपभोक्ताओं को सीधा लाभ मिलेगा। इन क्षेत्रों में बिजली की गुणवत्ता बेहतर होगी और लंबे समय से चली आ रही आपूर्ति संबंधी समस्याओं में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलेगा।
उन्होंने कहा कि नए उपकेंद्र के संचालन के बाद 11 केवी विद्युत लाइनों की लंबाई कम हो जाएगी, जिससे तकनीकी हानियों में कमी आएगी। साथ ही बिजली आपूर्ति के दौरान होने वाले फॉल्ट भी कम होंगे। ओवरलोडिंग की समस्या पर प्रभावी नियंत्रण होगा और उपभोक्ताओं को लो-वोल्टेज जैसी परेशानी से राहत मिलेगी। इससे न केवल बिजली आपूर्ति अधिक स्थिर होगी बल्कि बार-बार ट्रिपिंग और अनावश्यक बिजली कटौती की घटनाओं में भी कमी आएगी।
ऊर्जा मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल बिजली उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि ऐसी व्यवस्था विकसित करना है जो भविष्य की जरूरतों के अनुरूप भी हो। इसके लिए प्रदेशभर में नए विद्युत उपकेंद्र, ट्रांसमिशन लाइनें, फीडर और अन्य विद्युत अवसंरचनाओं का तेजी से विस्तार किया जा रहा है।

उन्होंने संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि इस परियोजना का निर्माण कार्य निर्धारित समय-सीमा के भीतर और उच्च गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पूरा किया जाए। निर्माण कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही या गुणवत्ता से समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि परियोजना समय पर पूरी होने से क्षेत्र के लोगों को जल्द से जल्द इसका लाभ मिल सकेगा।
कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार एवं विधि-विधान के साथ भूमि पूजन से हुई। इस अवसर पर विद्युत विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, जनप्रतिनिधि, स्थानीय जनप्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक भी मौजूद रहे। सभी ने इस परियोजना को मऊ जिले के विद्युत विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
विशेषज्ञों का मानना है कि तेजी से बढ़ती आबादी और बढ़ती बिजली मांग को देखते हुए इस प्रकार के नए उपकेंद्रों की स्थापना भविष्य की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इससे न केवल उपभोक्ताओं को बेहतर सेवा मिलेगी, बल्कि विद्युत वितरण प्रणाली भी अधिक मजबूत और टिकाऊ बनेगी।
सरकार का दावा है कि प्रदेश में विद्युत अवसंरचना को लगातार मजबूत किए जाने से आने वाले वर्षों में बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता और विश्वसनीयता में और अधिक सुधार होगा। मऊ में बनने वाला यह नया उपकेंद्र भी उसी व्यापक योजना का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य प्रत्येक उपभोक्ता तक बिना बाधा और बेहतर गुणवत्ता वाली बिजली पहुंचाना है।
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