गौतमबुद्धनगर में उद्योगों के सामने आ रही बिजली, जलापूर्ति, ड्रेनेज, सड़कों और विभागीय समन्वय जैसी समस्याओं के समाधान के लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में इंडस्ट्रियल बिजनेस एसोसिएशन के साथ महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। बैठक में निवेश बढ़ाने, औद्योगिक क्षेत्रों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने और उद्यमियों की समस्याओं के त्वरित समाधान पर विस्तार से चर्चा की गई।
औद्योगिक विकास किसी भी जिले की आर्थिक मजबूती की रीढ़ माना जाता है। यदि उद्योगों को बेहतर आधारभूत सुविधाएं, सुचारु प्रशासनिक सहयोग और समय पर समस्याओं का समाधान मिले, तो निवेश बढ़ता है, नए रोजगार के अवसर पैदा होते हैं और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिलती है। इसी सोच के साथ गुरुवार को गौतमबुद्धनगर के जिलाधिकारी की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में इंडस्ट्रियल बिजनेस एसोसिएशन के पदाधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।
बैठक का मुख्य उद्देश्य जनपद के औद्योगिक क्षेत्रों में मौजूद व्यावहारिक समस्याओं को समझना, उनके समाधान के लिए संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना तथा निवेश के अनुकूल वातावरण तैयार करना था। बैठक के दौरान उद्योग जगत से जुड़े प्रतिनिधियों ने खुलकर अपनी समस्याएं और सुझाव प्रशासन के समक्ष रखे।
बिजली, पानी और ड्रेनेज बने प्रमुख मुद्दे
इंडस्ट्रियल बिजनेस एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने औद्योगिक क्षेत्रों में आ रही कई बुनियादी समस्याओं की ओर जिलाधिकारी का ध्यान आकर्षित किया। बैठक में सबसे प्रमुख मुद्दा अनियोजित विद्युत कटौती का रहा। उद्यमियों ने कहा कि बिना पूर्व सूचना के होने वाली बिजली कटौती से उत्पादन प्रभावित होता है और उद्योगों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।

इसके अलावा जल कनेक्शन, नियमित जलापूर्ति तथा जलापूर्ति से संबंधित बिलों के न्यायोचित निस्तारण का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। उद्योग प्रतिनिधियों ने कहा कि कई स्थानों पर जलापूर्ति व्यवस्था संतोषजनक नहीं है, जिससे उत्पादन गतिविधियों पर असर पड़ता है।
औद्योगिक क्षेत्रों में जलभराव और ड्रेनेज व्यवस्था की समस्याओं पर भी विस्तार से चर्चा हुई। उद्यमियों ने बताया कि बरसात के दौरान कई क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति बन जाती है, जिससे आवागमन के साथ-साथ औद्योगिक कार्य भी प्रभावित होते हैं।
क्षतिग्रस्त सड़कें और जीएसटी नोटिसों पर भी उठे सवाल
बैठक के दौरान औद्योगिक क्षेत्रों की खराब और क्षतिग्रस्त सड़कों के पुनर्निर्माण की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। उद्योग प्रतिनिधियों का कहना था कि खराब सड़कें माल परिवहन, लॉजिस्टिक्स और कर्मचारियों के आवागमन में बाधा उत्पन्न करती हैं।
इसके साथ ही जीएसटी एवं सीजीएसटी से संबंधित नोटिसों के कारण उद्योगों को होने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों का मुद्दा भी प्रशासन के समक्ष रखा गया। एसोसिएशन ने सुझाव दिया कि संबंधित विभागों के साथ समय-समय पर समन्वय बैठक आयोजित की जाए, ताकि उद्यमियों की समस्याओं का समाधान संवाद के माध्यम से किया जा सके।
जिलाधिकारी ने दिया समयबद्ध समाधान का भरोसा
बैठक में उठाए गए सभी मुद्दों को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा कि गौतमबुद्धनगर में उद्योगों के लिए बेहतर और अनुकूल वातावरण तैयार करना शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने आश्वासन दिया कि बैठक में उठाए गए प्रत्येक बिंदु पर संबंधित विभागों के माध्यम से समयबद्ध और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित कराई जाएगी।
उन्होंने कहा कि उद्योगों से जुड़े मामलों में केवल अस्थायी समाधान नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण और स्थायी समाधान सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि भविष्य में ऐसी समस्याएं दोबारा सामने न आएं।

अधिकारियों को संयुक्त निरीक्षण के निर्देश
जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे औद्योगिक क्षेत्रों का संयुक्त निरीक्षण करें और सभी समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर चिन्हांकन करें। निरीक्षण के बाद समस्याओं के समाधान के लिए प्रभावी कार्ययोजना तैयार कर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना आवश्यक है, जिससे उद्यमियों को अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें और उनकी समस्याओं का एकीकृत समाधान हो सके।
निवेश और रोजगार बढ़ाने पर प्रशासन का फोकस
बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने कहा कि यदि उद्योगों की समस्याओं का समय पर समाधान किया जाता है तो जिले में निवेश का माहौल और मजबूत होगा। इससे नए उद्योग स्थापित होंगे, उत्पादन क्षमता बढ़ेगी और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अधिक अवसर उपलब्ध होंगे।
उन्होंने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य केवल शिकायतों का निस्तारण करना नहीं, बल्कि ऐसा औद्योगिक वातावरण तैयार करना है, जहां निवेशकों को विश्वास और सुविधाएं दोनों मिलें।

उद्योगों से जुड़े कई विषयों पर हुआ विस्तृत मंथन
बैठक के दौरान उद्योगों के विकास, निवेश संवर्धन, आधारभूत सुविधाओं के विस्तार और प्रशासनिक सहयोग जैसे विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। उद्योग प्रतिनिधियों ने प्रशासन से नियमित संवाद बनाए रखने और समस्याओं के समाधान के लिए एक स्थायी समन्वय व्यवस्था विकसित करने का भी सुझाव दिया।
जिलाधिकारी ने इस सुझाव का स्वागत करते हुए कहा कि उद्योगों और प्रशासन के बीच सकारात्मक संवाद जिले के समग्र आर्थिक विकास के लिए आवश्यक है।
बैठक में रहे ये अधिकारी और उद्योग प्रतिनिधि मौजूद
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी भाल चंद्र त्रिपाठी, अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) अजीत कुमार सिंह, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी अरुण कुमार, प्रभारी जिला विकास अधिकारी एवं परियोजना निदेशक डीआरडीए नेहा सिंह, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के संबंधित अधिकारी, इंडस्ट्रियल बिजनेस एसोसिएशन के प्रेसिडेंट अमित उपाध्याय सहित एसोसिएशन के अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।
अब सबसे बड़ा सवाल...
बैठक में उद्योगों से जुड़ी लगभग सभी प्रमुख समस्याओं पर चर्चा हुई और प्रशासन ने समयबद्ध कार्रवाई का भरोसा भी दिया। लेकिन अब उद्योग जगत की नजर इस बात पर रहेगी कि बिजली, पानी, ड्रेनेज, सड़क और विभागीय समन्वय जैसे मुद्दों पर जमीनी स्तर पर कितनी तेजी से कार्रवाई होती है। यदि प्रशासन अपने निर्देशों को प्रभावी ढंग से लागू कराने में सफल रहता है, तो गौतमबुद्धनगर का औद्योगिक परिदृश्य आने वाले समय में और अधिक मजबूत तथा निवेशकों के लिए आकर्षक बन सकता है।
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