मानसून के आखिरी दौर में देश के कई हिस्सों में बारिश ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। IMD के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक 1 सितंबर को छत्तीसगढ़ और ओडिशा समेत कई राज्यों में भारी बारिश का दौर जारी रह सकता है। उत्तराखंड में बहुत भारी बारिश की संभावना जताई गई है, जबकि पूर्वी उत्तर प्रदेश समेत कई इलाकों में भी बारिश की गतिविधियां बनी रहेंगी।
मानसून की विदाई से पहले मौसम ने एक बार फिर करवट ले ली है। आसमान में घने बादल हैं और कई राज्यों में बारिश का दौर तेज होने वाला है। भारत मौसम विज्ञान विभाग यानी IMD के 31 अगस्त 2026 के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक 1 सितंबर को देश के कई हिस्सों में भारी बारिश की स्थिति बनी रह सकती है। इसके पीछे बंगाल की खाड़ी और आसपास बने निम्न दबाव क्षेत्र का असर प्रमुख वजहों में से एक है। यह सिस्टम उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ रहा है, जिसके कारण पूर्वी और मध्य भारत के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां बढ़ी हैं।
सबसे ज्यादा नजर छत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड और उत्तराखंड पर है। IMD ने छत्तीसगढ़ और ओडिशा में 1 सितंबर तक भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है। वहीं छत्तीसगढ़ में 31 अगस्त को कुछ स्थानों पर अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी भी जारी की गई थी। उत्तराखंड में 31 अगस्त और 1 सितंबर को बहुत भारी बारिश की संभावना बनी हुई है।
छत्तीसगढ़ में बारिश का सबसे ज्यादा असर
छत्तीसगढ़ में मौसम फिलहाल सबसे ज्यादा चिंता वाला बना हुआ है। IMD के अनुसार राज्य में 31 अगस्त से 5 सितंबर तक कई इलाकों में बारिश जारी रहने की संभावना है। 1 सितंबर को भी भारी बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव, नदी-नालों के जलस्तर में वृद्धि और स्थानीय स्तर पर बाढ़ जैसी स्थिति बनने का खतरा हो सकता है।
रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और कोरबा जैसे शहरों में रहने वाले लोगों को स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग के अपडेट पर नजर रखनी चाहिए। भारी बारिश के दौरान निचले इलाकों, जलभराव वाले रास्तों और नदी-नालों के आसपास जाने से बचना ज्यादा सुरक्षित रहेगा।
ओडिशा में भी भारी बारिश का दौर
ओडिशा में भी निम्न दबाव क्षेत्र का असर दिखाई दे रहा है। IMD ने राज्य में 30 अगस्त से 1 सितंबर के बीच भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है। 30 और 31 अगस्त को कुछ स्थानों पर अत्यधिक भारी बारिश की संभावना भी बताई गई थी।
भुवनेश्वर, कटक, संबलपुर और बालासोर समेत कई इलाकों में बारिश का असर यातायात और सामान्य जनजीवन पर पड़ सकता है। भारी बारिश के दौरान बिजली गिरने और तेज हवाओं की स्थिति में लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है।
झारखंड और बिहार में भी मौसम बदलेगा
झारखंड में 31 अगस्त तक भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई गई थी, जबकि आने वाले दिनों में भी राज्य के कुछ हिस्सों में बारिश जारी रह सकती है। IMD के पूर्वानुमान में बिहार में भी 31 अगस्त से 2 सितंबर के बीच बारिश की गतिविधियां बनी रहने की बात कही गई है।
पटना, गया, मुजफ्फरपुर और भागलपुर जैसे शहरों में स्थानीय स्तर पर बारिश का असर देखने को मिल सकता है। गंगा और दूसरी नदियों के किनारे बसे इलाकों में रहने वाले लोगों को जलस्तर से जुड़े स्थानीय प्रशासन के अलर्ट को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
उत्तराखंड में लैंडस्लाइड का खतरा
पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में बारिश के साथ सबसे बड़ा खतरा भूस्खलन और सड़क अवरुद्ध होने का है। IMD ने 31 अगस्त और 1 सितंबर को राज्य में बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है।
देहरादून, ऋषिकेश, हरिद्वार और पहाड़ी जिलों में रहने वाले लोगों को नदी-नालों और संवेदनशील पहाड़ी ढलानों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी जाती है। बारिश के दौरान पहाड़ी रास्तों पर अनावश्यक यात्रा से बचना भी बेहतर होगा।
पूर्वी उत्तर प्रदेश और दिल्ली-NCR का क्या हाल?
उत्तर प्रदेश में भी बारिश का दौर पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। IMD के अनुसार पूर्वी उत्तर प्रदेश में 31 अगस्त से 4 सितंबर तक बारिश की गतिविधियां बनी रहने की संभावना है। वहीं पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 2 से 4 सितंबर के बीच बारिश बढ़ सकती है।
दिल्ली-NCR में भी 31 अगस्त से 5 सितंबर तक कुछ इलाकों में बारिश की संभावना बनी हुई है। इसका मतलब यह है कि दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद और आसपास के क्षेत्रों में बादल और हल्की से मध्यम बारिश का दौर देखने को मिल सकता है।
क्यों बिगड़ा मौसम?
IMD के मुताबिक बंगाल की खाड़ी के उत्तर-पश्चिमी हिस्से और पश्चिम बंगाल-उत्तर ओडिशा के आसपास बना अच्छी तरह चिह्नित निम्न दबाव क्षेत्र पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसके साथ उत्तर प्रदेश के मध्य हिस्सों से जुड़ी एक ट्रफ भी मौसम की गतिविधियों को प्रभावित कर रही है। इसी सिस्टम के कारण पूर्वी और मध्य भारत के कई राज्यों में बारिश तेज हुई है।
लोगों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
भारी बारिश की स्थिति में नदी, नाले और जलभराव वाले इलाकों के पास जाने से बचें। बिजली चमकने के दौरान खुले मैदान, पेड़ या ऊंचे स्थानों पर खड़े न रहें। पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा करने से पहले स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग की ताजा जानकारी जरूर लें।
सबसे जरूरी बात यह है कि मौसम को लेकर सोशल मीडिया पर चल रहे हर दावे पर भरोसा न करें। IMD की आधिकारिक चेतावनी और स्थानीय प्रशासन के निर्देश को ही प्राथमिकता दें।
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