पूर्वी उत्तर प्रदेश के गाजीपुर, वाराणसी और सोनभद्र में नदियों के बढ़ते जलस्तर ने बाढ़ का खतरा बढ़ा दिया है। गाजीपुर में गंगा 63.260 मीटर पर पहुंचकर खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। वाराणसी में गंगा चेतावनी बिंदु पार कर खतरे की ओर बढ़ रही है और वरुणा में पलट प्रवाह से निचले इलाके प्रभावित हैं। सोनभद्र में सोन नदी का पानी बढ़ने से बाड़ी-चोपन मार्ग डूब गया है और ग्रामीण नाव चलाने को मजबूर हैं।
पूर्वी उत्तर प्रदेश में बारिश और नदियों का बढ़ता जलस्तर अब धीरे-धीरे चिंता का बड़ा कारण बनता जा रहा है। एक तरफ गाजीपुर में गंगा खतरे के निशान को पार कर चुकी है, तो दूसरी तरफ वाराणसी में नदी लगातार खतरे के बिंदु की ओर बढ़ रही है। सोनभद्र में सोन नदी का जलस्तर बढ़ने से गांवों का संपर्क मार्ग पानी में डूब गया है।
यानी एक ही क्षेत्र में तीन जिलों की तस्वीर अलग-अलग जगहों पर एक जैसी चिंता पैदा कर रही है—नदी बढ़ रही है, रास्ते डूब रहे हैं और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं।
गाजीपुर में खतरे के निशान से ऊपर गंगा
गाजीपुर में गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। मंगलवार सुबह आठ बजे नदी का जलस्तर 63.260 मीटर दर्ज किया गया। जिले में गंगा का खतरा बिंदु 63.105 मीटर है। यानी नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है।
सबसे चिंता की बात यह है कि जलस्तर में करीब एक सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ोतरी जारी है। इससे प्रशासन की निगरानी और सतर्कता बढ़ गई है।
रेवतीपुर क्षेत्र के कई इलाकों में बाढ़ का पानी सड़कों पर भर गया है। इससे ग्रामीणों का आवागमन प्रभावित हुआ है और कुछ इलाकों का मुख्यालय से संपर्क भी प्रभावित होने की स्थिति में है।
वहीं खानपुर क्षेत्र में गंगा और गोमती के पानी का असर रिहायशी इलाकों तक पहुंचने लगा है। घरों में पानी घुसने की आशंका के बीच लोग जरूरी और कीमती सामान सुरक्षित स्थानों पर ले जाने लगे हैं।

निचले इलाकों के खेतों में पानी भरने से फसलों को नुकसान की आशंका बढ़ गई है। इसके साथ ही पशुओं के लिए हरे चारे की कमी भी शुरू होने की बात सामने आ रही है।
गाजीपुर में सामान्य जलस्तर 59.906 मीटर, चेतावनी बिंदु 62.100 मीटर और खतरा बिंदु 63.105 मीटर है। जिले का उच्च बाढ़ स्तर 65.220 मीटर दर्ज किया जा चुका है। वहीं वर्ष 2025 में गंगा का उच्चतम जलस्तर 64.690 मीटर रहा था।
वाराणसी में गंगा खतरे की ओर, वरुणा में पलट प्रवाह
गाजीपुर के बाद वाराणसी में भी गंगा का बढ़ता जलस्तर चिंता बढ़ा रहा है। काशी में गंगा चेतावनी बिंदु को पार कर चुकी है और अब खतरे के निशान की ओर बढ़ रही है।
राजघाट स्थित केंद्रीय जल आयोग के अनुसार गंगा का चेतावनी बिंदु 70.262 मीटर, जबकि खतरा बिंदु 71.262 मीटर है। मंगलवार सुबह 10 बजे नदी का जलस्तर 70.28 मीटर दर्ज किया गया। नदी में करीब 0.5 सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ोतरी जारी है।
गंगा का जलस्तर बढ़ने के साथ ही इसका असर वरुणा नदी पर भी दिखाई देने लगा है। गंगा के पानी का वरुणा में पलट प्रवाह शुरू हो गया है, जिससे निचले इलाकों के कई मोहल्लों में जलभराव की स्थिति बन गई है।
कुछ इलाकों में गलियों तक पानी पहुंचने के बाद नाव चलाने की नौबत आ गई है। बाढ़ राहत शिविरों में प्रभावित लोगों के पहुंचने का सिलसिला भी शुरू हो गया है।
श्मशान घाटों पर भी बढ़ी मुश्किल
वाराणसी में बढ़ते जलस्तर का असर सिर्फ रिहायशी इलाकों तक सीमित नहीं है। मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट पर भी अंतिम संस्कार प्रभावित होने की स्थिति सामने आई है। पानी बढ़ने के कारण कुछ स्थानों पर चिता जलाने के लिए गलियों और छतों तक वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ रही है।
मौसम विभाग की ओर से 1 सितंबर को यलो अलर्ट भी जारी किया गया है। बारिश जारी रहने की स्थिति में गंगा में पानी का प्रवाह और बढ़ सकता है। ऐसे में अगले 24 घंटे बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

पूर्वांचल की यह तस्वीर सोनभद्र तक पहुंच गई है। लगातार हो रही बारिश और ओबरा डैम से पानी छोड़े जाने के कारण सोन नदी का जलस्तर काफी बढ़ गया है।
सोन नदी का पानी बढ़ने से बाड़ी-चोपन गांव का संपर्क मार्ग पूरी तरह जलमग्न हो गया है। मार्ग पर 10 फीट से अधिक पानी भरने के कारण आवागमन बाधित है।
मंगलवार सुबह स्थिति और बिगड़ गई। चोपन गांव से जुड़े बाड़ी, मलहिया टोला और गडईडीह आदि गांवों का संपर्क प्रभावित हो गया। कम दूरी तय कर चोपन गांव, चोपन रेलवे स्टेशन और बाजार पहुंचने वाले लोगों को अब वाराणसी-शक्तिनगर मार्ग से लगभग दोगुनी दूरी तय करनी पड़ रही है।
बाइक सवारों, पैदल राहगीरों और किसानों की मुश्किलें भी बढ़ गई हैं। इन गांवों के कई किसान रोजाना इसी रास्ते से सब्जियां लेकर डाला बाजार और आसपास के क्षेत्रों में जाते हैं। रास्ता डूबने से उनकी रोजमर्रा की आजीविका भी प्रभावित होने लगी है।
ग्रामीणों ने शुरू किया नाव का संचालन
रास्ता बंद होने के बाद ग्रामीणों ने खुद ही विकल्प तलाशते हुए नाव का संचालन शुरू कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि हर साल बारिश के दौरान इसी तरह की समस्या सामने आती है।
उन्होंने जिलाधिकारी और संबंधित अधिकारियों का ध्यान इस समस्या की ओर आकर्षित करते हुए मांग की है कि रास्ते को ऊंचा बनाया जाए और यहां पुलिया का स्थायी निर्माण कराया जाए, ताकि हर बरसात में गांवों का संपर्क न टूटे।
अब पूर्वी उत्तर प्रदेश में तीनों जिलों की स्थिति पर नजर बनी हुई है। गाजीपुर में गंगा खतरे के निशान से ऊपर है, वाराणसी में नदी खतरे की ओर बढ़ रही है और सोनभद्र में सोन नदी ने रास्तों को डुबो दिया है।
अगर जलस्तर बढ़ने का यह सिलसिला जारी रहा और बारिश ने फिर जोर पकड़ा, तो आने वाले घंटों में इन इलाकों की चुनौती और गंभीर हो सकती है।
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