उत्तर प्रदेश में लगातार बारिश और तेज हवाओं ने कई जिलों में हालात बिगाड़ दिए हैं। चित्रकूट में मंदाकिनी नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, श्रावस्ती में राप्ती नदी उफान पर है। अयोध्या में तैयार फसलों को नुकसान पहुंचा है, बस्ती में मकान पर पेड़ गिरने से दो बच्चे घायल हुए हैं, जबकि कानपुर के इटर्रा गांव में बंबा की पटरी कटने से गांव में पानी घुस गया। प्रशासन ने कई इलाकों में अलर्ट जारी कर राहत-बचाव दलों को सक्रिय किया है।
उत्तर प्रदेश में सितंबर की बारिश अब कई इलाकों के लिए आफत बनती नजर आ रही है। लगातार बारिश के साथ तेज हवाओं ने कहीं नदियों का जलस्तर बढ़ा दिया तो कहीं खेतों में तैयार फसलें बर्बाद होने का खतरा पैदा कर दिया। कई जगह पेड़ गिरने से रास्ते प्रभावित हुए हैं, तो कुछ इलाकों में पानी घरों और गांवों तक पहुंच गया है।
मौसम विभाग ने पूर्वी उत्तर प्रदेश में 26 सितंबर को अत्यधिक भारी बारिश और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी जारी की थी। इसके बाद प्रशासनिक स्तर पर भी सतर्कता बढ़ाई गई है।
सबसे गंभीर तस्वीर चित्रकूट से सामने आ रही है, जहां मंदाकिनी नदी खतरे के निशान को पार कर चुकी है।
चित्रकूट में मंदाकिनी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर
लगातार बारिश के बाद चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। नदी का डेंजर लेवल 126.500 मीटर बताया गया है और पानी इसके ऊपर पहुंचने से रामघाट और नदी किनारे के इलाकों में चिंता बढ़ गई है।
जिलाधिकारी पुलकित गर्ग और पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार सिंह ने देर रात रामघाट पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। लोगों को लाउडस्पीकर के जरिए नदी और घाटों से दूर रहने की सलाह दी जा रही है।
चित्रकूट में मंदाकिनी पहले भी इस मानसून में गंभीर बाढ़ की स्थिति पैदा कर चुकी है। अगस्त के अंत में नदी का जलस्तर 135.20 मीटर तक पहुंच गया था, जबकि खतरे का निशान 126.500 मीटर था।
रामघाट के मठ-मंदिरों तक पहुंचा पानी
मंदाकिनी का पानी अब रामघाट के आसपास स्थित मठों और मंदिरों तक पहुंच रहा है। जलस्तर बढ़ने के साथ नदी किनारे मौजूद दुकानदारों ने भी अपनी दुकानों से सामान हटाना शुरू कर दिया है।
नदी किनारे रहने वाले लोगों पर विशेष नजर रखी जा रही है। ग्रामीण इलाकों में पुलिस और प्रशासनिक टीमों को भी सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
संभावित बाढ़ की स्थिति को देखते हुए चित्रकूट में स्कूल और कॉलेज बंद किए जाने की जानकारी सामने आई है। प्रशासन का जोर लोगों को नदी और जलभराव वाले इलाकों से दूर रखने पर है।
श्रावस्ती में राप्ती नदी उफान पर
चित्रकूट के बाद श्रावस्ती में भी हालात चिंताजनक बने हुए हैं। पिछले करीब 48 घंटों से हो रही तेज बारिश के चलते शहर और ग्रामीण इलाकों में जलभराव की स्थिति है। कई सड़कें पानी में डूब गई हैं।
नेपाल की पहाड़ियों में हुई भारी बारिश का असर राप्ती नदी के जलस्तर पर भी दिखाई दे रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक नदी खतरे के निशान से करीब 65 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है।
राप्ती के बढ़ते जलस्तर से नदी किनारे के इलाकों में कटान और बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। तेज हवाओं के कारण कई जगह पेड़ गिरने से आवागमन भी प्रभावित हुआ है।
धान की खड़ी फसल पर भी मौसम की मार पड़ी है। प्रशासन ने बाढ़ चौकियों को सक्रिय कर दिया है और NDRF तथा SDRF की टीमों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
अयोध्या में तैयार फसलों पर बारिश और तेज हवाओं की मार
रामनगरी अयोध्या में भी मौसम ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। पिछले दो दिनों से चल रही तेज हवाओं के कारण खेतों में खड़ी तैयार फसलें प्रभावित हुई हैं।
कई इलाकों में धान की फसल खेत में गिर गई है। गन्ने की तैयार फसल को भी नुकसान पहुंचने की बात सामने आई है। कटाई से ठीक पहले फसल गिरने से किसानों को उत्पादन और आर्थिक नुकसान की चिंता सता रही है।
किसानों का कहना है कि अगर मौसम इसी तरह बना रहा तो खेतों में तैयार फसल को और नुकसान हो सकता है।
मौसम विभाग की चेतावनी के बाद प्रशासन ने जिले में अलर्ट जारी किया है और कक्षा 12 तक के विद्यालय बंद करने का निर्णय लिया गया है।
बस्ती में मकान पर गिरा विशाल पेड़, दो बच्चे घायल
बस्ती जिले के हर्रैया थाना क्षेत्र के फरेदा जागीर गांव में तेज आंधी और बारिश के बीच एक विशाल पीपल का पेड़ पक्के मकान पर गिर गया।
पेड़ की चपेट में पास में बना टीनशेड वाला मकान भी आ गया। हादसे के वक्त घर में मौजूद दो बच्चों को मामूली चोटें आईं।
लगातार तेज हवा और बारिश के कारण इलाके में लोगों के बीच दहशत का माहौल है। कई अन्य स्थानों से भी सड़कों पर पेड़ गिरने की सूचना सामने आई है, जिससे स्थानीय स्तर पर आवागमन प्रभावित हुआ।
कानपुर के इटर्रा गांव में बंबा की पटरी कटी, पूरा गांव जलमग्न
कानपुर के घाटमपुर क्षेत्र स्थित इटर्रा गांव में शुक्रवार रात अचानक बड़ा संकट खड़ा हो गया। बंबा की पटरी कटने के बाद पानी का तेज बहाव गांव की तरफ मुड़ गया।
देखते ही देखते गांव के रास्तों और घरों में पानी भर गया। अचानक आई इस स्थिति से ग्रामीणों में अफरा-तफरी मच गई।
हालांकि ग्रामीणों ने रातभर मोर्चा संभाले रखा। सीमेंट की चादरों, मिट्टी से भरी बोरियों और फावड़ों की मदद से पानी का बहाव रोकने की कोशिश की गई।
कई घंटे की मेहनत के बाद ग्रामीणों ने पानी को अस्थायी तौर पर रोकने में सफलता हासिल की, लेकिन खतरा पूरी तरह टला नहीं है।
ग्रामीणों का कहना है कि अगर बंबा की पटरी की स्थायी मरम्मत नहीं की गई तो दोबारा पानी गांव में घुस सकता है और स्थिति फिर बिगड़ सकती है।
प्रशासन अलर्ट, राहत-बचाव की तैयारियां तेज
उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में बारिश और बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है। बाढ़ चौकियों को सक्रिय किया गया है और राहत एवं बचाव दलों को तैयार रखा गया है।
लोगों से अपील की जा रही है कि वे नदी, नालों, पुलों और जलभराव वाले क्षेत्रों के आसपास जाने से बचें। प्रशासनिक टीमें लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं।
फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती उन इलाकों में है जहां बारिश के साथ नदियों का जलस्तर भी बढ़ रहा है। चित्रकूट में मंदाकिनी और श्रावस्ती में राप्ती का बढ़ता पानी आने वाले घंटों में हालात की दिशा तय कर सकता है।
ऐसे में प्रशासन की नजर नदी के जलस्तर, निचले इलाकों और फसलों पर बनी हुई है। मौसम विभाग की चेतावनी के बीच लोगों को भी अतिरिक्त सतर्कता बरतने की जरूरत है।
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