उत्तर प्रदेश एसटीएफ की आगरा फील्ड इकाई ने 30 अक्टूबर की रात अछनेरा क्षेत्र से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, दोनों ट्रांसफार्मर और बिजली के तार चोरी करने वाले गिरोह से जुड़े हैं। उनके कब्जे से 249 किलोग्राम तांबा, 40 हजार रुपये नकद, टाटा योद्धा पिकअप और चोरी में इस्तेमाल होने वाले औजार बरामद किए गए हैं।
खेतों और आबादी वाले इलाकों में लगे बिजली ट्रांसफार्मर तथा तार चोरी होने की घटनाओं के पीछे कौन लोग सक्रिय हैं? आगरा में ऐसी ही वारदातों की जांच कर रही उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) को एक बड़ी सफलता मिली है। एसटीएफ की आगरा फील्ड इकाई ने अछनेरा क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, दोनों एक ऐसे गिरोह से जुड़े हैं, जो जिले के अलग-अलग इलाकों में ट्रांसफार्मर, बिजली के तार और अन्य उपकरण चोरी करता था।
कार्रवाई 30 अक्टूबर 2026 को रात करीब 1:30 बजे अछनेरा-साधन मार्ग स्थित साधन अंडरपास के पास की गई। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान पवन शर्मा पुत्र देवकीनंदन, निवासी सुंदर कॉलोनी, थाना निहालपुर, धौलपुर (राजस्थान) और विशाल अग्रवाल पुत्र नरेश अग्रवाल, निवासी राठौर कॉलोनी, थाना निहालगंज, धौलपुर (राजस्थान) के रूप में हुई है।
सूचना मिली और अंडरपास पर बिछाया गया जाल
एसटीएफ के अनुसार, उत्तर प्रदेश में ट्रांसफार्मर चोरी करने वाले गिरोह और उसके सदस्यों की गतिविधियों को लेकर काफी समय से सूचनाएं मिल रही थीं। इसके बाद एसटीएफ की विभिन्न इकाइयों और टीमों को अभिसूचना जुटाने तथा आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
इसी क्रम में अपर पुलिस अधीक्षक राकेश के पर्यवेक्षण में आगरा फील्ड इकाई की टीम सक्रिय थी। टीम में उपनिरीक्षक रजनीश, मुख्य आरक्षी अंकित गुप्ता, आरक्षी प्रदीप चौधरी, आरक्षी मानवेन्द्र उपाध्याय और चालक कांस्टेबल महेश रावत शामिल थे।
एसटीएफ टीम आगरा में भ्रमणशील थी, तभी सूचना मिली कि ट्रांसफार्मर चोरी करने वाले गिरोह के दो सदस्य अछनेरा थाना क्षेत्र में आने वाले हैं। सूचना को गंभीरता से लेते हुए टीम ने स्थानीय पुलिस से संपर्क किया और अछनेरा-साधन मार्ग पर साधन अंडरपास के पास घेराबंदी कर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
पिकअप में मिला 249 किलो तांबा, नकदी और औजार
गिरफ्तारी के दौरान आरोपियों के कब्जे से एक टाटा योद्धा पिकअप वाहन (नंबर RJ-11 GB-6795) बरामद किया गया। इसके अलावा पुलिस ने 40 हजार रुपये नकद, कुल 249 किलोग्राम तांबा, एक लोहे का सब्बल और एक तार काटने वाला कटर भी बरामद किया है।

पूछताछ में आरोपियों ने कथित तौर पर बताया कि उनका एक गिरोह है, जो आगरा जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में बिजली के तार, ट्रांसफार्मर और अन्य उपकरण चोरी करता है। पुलिस के मुताबिक, बरामद तांबा अछनेरा, बमरौली कटारा, मलपुरा और फतेहपुरसीकरी क्षेत्रों से चोरी किया गया था।
आरोपियों ने यह भी बताया कि चोरी किए गए कुछ माल को उनके साथी नैना उर्फ प्रदीप ने बेच दिया था। उस माल की बिक्री से मिले रुपयों में से 40 हजार रुपये उनके पास बचे हुए थे। शेष चोरी का सामान बेचने के लिए वे राजस्थान जा रहे थे, लेकिन रास्ते में एसटीएफ और स्थानीय पुलिस की कार्रवाई में पकड़े गए। इन खुलासों की आगे की जांच स्थानीय पुलिस कर रही है।
दोनों के खिलाफ कई मुकदमे दर्ज
एसटीएफ की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, दोनों आरोपियों को थाना अछनेरा, कमिश्नरेट आगरा में दर्ज मुकदमा संख्या 275/26, 287/26 और 297/26, धारा 303(2) बीएनएस के तहत दाखिल किया गया है। आगे की विधिक कार्रवाई स्थानीय पुलिस द्वारा की जा रही है।
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, विशाल अग्रवाल के खिलाफ आगरा के अछनेरा, फतेहपुरसीकरी, मलपुरा और बमरौली कटारा थानों में ट्रांसफार्मर या बिजली उपकरण चोरी से संबंधित कई मामले दर्ज हैं। इनमें धारा 303(2) बीएनएस और विद्युत अधिनियम की धारा 136 के मुकदमे शामिल हैं। उसके नाम पर इस कार्रवाई से जुड़े तीन अछनेरा के मुकदमों के अलावा फतेहपुरसीकरी के दो, मलपुरा के दो और बमरौली कटारा का एक मामला दर्ज बताया गया है।
पवन शर्मा के खिलाफ भी इन आठ मामलों के अतिरिक्त आगरा के बाह, बसई अरेला, फतेहाबाद, इरादतनगर, खेरागढ़, निबोहरा, रकाबगंज, शमशाबाद, ताजगंज और एकता थाने में मुकदमों का उल्लेख किया गया है। एसटीएफ द्वारा उपलब्ध कराए गए रिकॉर्ड में उसके खिलाफ चोरी, चोरी का माल रखने या खरीदने, विद्युत अधिनियम, आर्म्स एक्ट, एनडीपीएस और आबकारी अधिनियम से जुड़ी धाराओं के तहत कुल 31 प्रविष्टियां सूचीबद्ध हैं। इनमें वर्ष 2018, 2019, 2020, 2021, 2023, 2025 और 2026 के मामले शामिल हैं।
चोरी के नेटवर्क की जांच में जुटी पुलिस
एसटीएफ की इस कार्रवाई में दो आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ बड़ी मात्रा में तांबा और कथित चोरी के माल की बिक्री से जुड़ी नकदी बरामद हुई है। पूछताछ में सामने आए नैना उर्फ प्रदीप और चोरी के सामान की खरीद-बिक्री से जुड़े अन्य संभावित संपर्कों की भूमिका भी जांच का विषय है।
अब स्थानीय पुलिस के सामने यह पता लगाने की चुनौती है कि गिरोह में और कौन-कौन शामिल हैं, चोरी का सामान कहां बेचा जाता था और आगरा के अलग-अलग क्षेत्रों में हुई वारदातों का पूरा नेटवर्क कितना बड़ा है। फिलहाल दोनों आरोपी पुलिस की कार्रवाई के दायरे में हैं और मामले में आगे की जांच जारी है।
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