उत्तर प्रदेश STF ने शेयर बाजार में निवेश के नाम पर डिजिटल अरेस्ट कर करोड़ों की ठगी करने वाले गिरोह के दो सदस्यों को कानपुर से गिरफ्तार किया है। गिरोह के खिलाफ देशभर में 650 से अधिक शिकायतें दर्ज हैं।
उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) को बड़ी सफलता मिली है। भारतीय नागरिकों को शेयर बाजार में निवेश का झांसा देकर और “डिजिटल अरेस्ट” के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले गिरोह के दो शातिर सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है।
गिरफ्तारी 18 अप्रैल 2026 को देर रात थाना नौबस्ता क्षेत्र, कानपुर नगर से की गई।
गिरफ्तार आरोपी कौन हैं?
STF द्वारा गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान इस प्रकार हुई है—
- करण कसेरा, निवासी नई आबादी, अबोहर, जिला फाजिल्का (पंजाब)
- गुरपाल उर्फ ज्योति उर्फ जितेन्द्र सिंह, निवासी बड़ी पोखरी, अबोहर, जिला फाजिल्का (पंजाब)
दोनों आरोपी एक संगठित साइबर ठगी गिरोह के सक्रिय सदस्य बताए जा रहे हैं।
कैसे करते थे ठगी?
जांच में सामने आया है कि यह गिरोह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे व्हाट्सएप और टेलीग्राम के जरिए लोगों से संपर्क करता था।
पहले लोगों को शेयर बाजार में निवेश के नाम पर बड़े मुनाफे का लालच दिया जाता था।
इसके बाद “डिजिटल अरेस्ट” का डर दिखाकर उनसे पैसे वसूले जाते थे।
पीड़ितों से रकम अलग-अलग फर्जी बैंक खातों में जमा करवाई जाती थी।
इसके बाद यह रकम कई खातों में ट्रांसफर कर दी जाती थी, जिससे ट्रैक करना मुश्किल हो जाता था।
विदेशी नंबरों का इस्तेमाल
गिरोह अपनी पहचान छिपाने के लिए श्रीलंका और ब्रिटेन जैसे देशों के नंबरों का इस्तेमाल करता था।
इससे पीड़ितों को लगता था कि वे किसी अंतरराष्ट्रीय निवेश नेटवर्क से जुड़े हैं, जबकि असल में यह एक सुनियोजित साइबर ठगी का जाल था।
बरामदगी में क्या मिला?
STF ने आरोपियों के पास से कई अहम सबूत बरामद किए हैं—
- 5 डेबिट/क्रेडिट कार्ड
- 11 ब्लैंक चेक
- 5 बैंक जमा पर्चियां
- 1 ज्वैलर्स जमा पर्ची
- 3 कच्चे हिसाब के पर्चे
- 8500 रुपये नकद
- 2 आईफोन
- 55 बैंक ट्रांजैक्शन के स्क्रीनशॉट
इन सभी का इस्तेमाल ठगी के पैसे को जमा करने, ट्रांसफर करने और छिपाने में किया जा रहा था।

650 से ज्यादा शिकायतें, कई राज्यों में केस
इस गिरोह के खिलाफ देशभर में करीब 656 से अधिक ऑनलाइन शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं।
इसके अलावा अलग-अलग राज्यों में एक दर्जन से अधिक आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं, जिनमें साइबर क्राइम थाना गौतमबुद्धनगर, गाजियाबाद, आगरा, सहारनपुर और बाराबंकी शामिल हैं।
पुलिस की कार्रवाई कैसे हुई?
STF को पिछले कुछ दिनों से इस गिरोह के बारे में लगातार सूचना मिल रही थी।
इसके बाद पुलिस उपाधीक्षक STF लखनऊ के निर्देशन में एक टीम गठित की गई।
उपनिरीक्षक नरेंद्र सिंह और नितिन यादव की टीम ने तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिर की सूचना के आधार पर आरोपियों को गिरफ्तार किया।
कानूनी कार्रवाई जारी
गिरफ्तार आरोपियों को थाना नौबस्ता, कानपुर में दर्ज मुकदमा संख्या 03/2026 के तहत
धारा 318(4), 111(3) बीएनएस और 66D आईटी एक्ट में जेल भेजा गया है।
स्थानीय पुलिस द्वारा आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।
गिरोह के अन्य सदस्य भी रडार पर
पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि उनका एक बड़ा नेटवर्क है, जिसमें कई अन्य सदस्य भी शामिल हैं।
STF अब इस गिरोह के बाकी सदस्यों की तलाश में जुटी है और जल्द ही और गिरफ्तारियां होने की संभावना है
यह मामला एक बार फिर यह साबित करता है कि साइबर अपराधी नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं।
शेयर बाजार में निवेश के नाम पर लालच और “डिजिटल अरेस्ट” जैसे डर का इस्तेमाल कर यह गिरोह बड़े स्तर पर ठगी कर रहा था।
अब जरूरत है सतर्क रहने की—
क्योंकि एक छोटी सी गलती आपको करोड़ों के नुकसान में डाल सकती है।
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