मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। SIR प्रक्रिया पर चुनाव आयोग के भीतर दो चुनाव आयुक्तों की कथित आपत्तियों की रिपोर्ट के बाद कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने सवाल उठाए हैं। राहुल गांधी ने CEC के इस्तीफे की मांग की, TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने पुलिस शिकायत दर्ज कराई, जबकि बीजेपी ने चुनाव आयोग के फैसलों को सर्वसम्मति से लिए जाने का दावा करते हुए कांग्रेस के आरोपों पर पलटवार किया है।
चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर शुरू हुआ राजनीतिक विवाद अब लगातार नए मोड़ ले रहा है। एक ओर द इंडियन एक्सप्रेस की जांच रिपोर्ट में चुनाव आयोग के दो आयुक्तों—सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी—की ओर से पिछले 10 महीनों में कथित तौर पर 14 बार आपत्ति दर्ज किए जाने का दावा किया गया है, तो दूसरी ओर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इस रिपोर्ट के आधार पर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं।
विवाद के बीच ज्ञानेश कुमार के मेरठ में प्रस्तावित एक युवा मतदाता जागरूकता कार्यक्रम को स्थगित कर दिया गया। चुनाव आयोग की ओर से कहा गया कि मेरठ और वाराणसी के कार्यक्रमों को स्थगित करने का फैसला पहले ही 21 सितंबर को लिया जा चुका था, यानी इसे मौजूदा राजनीतिक विवाद से जोड़ना उचित नहीं होगा।
आखिर विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
मामला 23 सितंबर को द इंडियन एक्सप्रेस की एक जांच रिपोर्ट के बाद सुर्खियों में आया। रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में चुनाव आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर कम से कम 14 बार औपचारिक आपत्तियां दर्ज कीं।
रिपोर्ट के अनुसार, इन आपत्तियों में नए मतदाताओं को जोड़ने, मतदाता सूची से नाम हटाने, मतदाता डेटाबेस तक पहुंच, Electoral Registration Officers यानी ERO की भूमिका और चुनाव आयोग की डिजिटल प्रणाली से जुड़े मुद्दे शामिल थे। दोनों आयुक्तों ने कुछ कदमों को लेकर कथित तौर पर 'अनधिकृत' और 'गैरकानूनी' शब्दों का इस्तेमाल किया।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि दोनों आयुक्तों की कुछ आपत्तियां सीधे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को भी भेजी गई थीं। हालांकि, यह एक मीडिया जांच पर आधारित रिपोर्ट है और इससे जुड़े आरोपों को चुनाव आयोग या संबंधित अधिकारियों के आधिकारिक जवाब के संदर्भ में देखा जाना जरूरी है।
राहुल गांधी ने क्या कहा?
रिपोर्ट सामने आने के बाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने अपने पुराने 'वोट चोरी' के आरोपों को दोहराते हुए CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की।
राहुल गांधी ने दावा किया कि वह लंबे समय से चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े सवाल उठाते रहे हैं और अब चुनाव आयोग के भीतर से भी आपत्तियां सामने आने की बात कही जा रही है। उन्होंने कहा कि मतदाता का वोट लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियाद है और इसकी सुरक्षा चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है।
उन्होंने ज्ञानेश कुमार से इस्तीफा देने के साथ-साथ कथित अनियमितताओं को सामने लाने में सहयोग करने की अपील भी की। राहुल गांधी ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में पहले उठाए गए सवालों की टाइमलाइन भी पेश की और कहा कि उन्होंने CEC के चयन के समय अपनी असहमति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने दर्ज कराई थी।
बीजेपी का पलटवार, कहा- फैसले सर्वसम्मति से हुए
कांग्रेस के आरोपों पर बीजेपी ने भी मोर्चा संभाला। पार्टी के प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी के आरोपों पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव आयोग में लिए गए फैसलों के बहुमत के आधार पर लिए जाने का कोई प्रमाण सामने नहीं आया है।
उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट को लेकर भी सवाल उठाया और कहा कि उसमें किसी चुनाव आयुक्त का ऑन-द-रिकॉर्ड बयान नहीं है। बीजेपी का कहना है कि चुनाव आयोग के फैसलों को लेकर लगाए जा रहे आरोपों को प्रमाणित करने के लिए ठोस आधार सामने रखा जाना चाहिए।
त्रिवेदी ने राहुल गांधी के 'एंटी-इनकंबेंसी' से जुड़े तर्कों पर भी पलटवार किया और कांग्रेस के चुनावी प्रदर्शन का हवाला देते हुए उनके राजनीतिक विश्लेषण पर सवाल उठाए। यह बयान बीजेपी की राजनीतिक प्रतिक्रिया का हिस्सा है, जबकि कांग्रेस अपने आरोपों पर कायम है।
महुआ मोइत्रा ने थाने में दी शिकायत
विवाद सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा। TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने 24 सितंबर को दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने में CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। उनकी शिकायत में SIR से जुड़े फैसलों और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ी को लेकर कार्रवाई की मांग की गई है।
इसके अलावा महाराष्ट्र में भी चुनाव आयोग से जुड़े विवाद को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट की कोल्हापुर बेंच में याचिका दायर किए जाने की जानकारी सामने आई है। याचिकाकर्ताओं ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और कथित तौर पर दर्ज आपत्तियों से जुड़े मुद्दे अदालत के सामने रखे हैं।
CEC के खिलाफ महाभियोग की चर्चा भी तेज
विपक्षी दल अब संसद के दोनों सदनों में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ हटाने की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी की बात कह रहे हैं। कुछ रिपोर्टों के अनुसार विपक्षी दल इस संबंध में प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि, यह प्रक्रिया संवैधानिक और कानूनी प्रावधानों के तहत ही आगे बढ़ सकती है।
SIR पर आखिर उठे सवाल क्या हैं?
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में जिन मुद्दों का उल्लेख किया गया है, उनमें नए मतदाता पंजीकरण के लिए Form-6 में बदलाव, मतदाता डेटाबेस के केंद्रीकरण की आशंका, ERO की डिजिटल पहुंच, मतदाता नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया तथा कुछ मामलों में अपील दाखिल करने की प्रक्रिया शामिल है।
रिपोर्ट के मुताबिक दोनों चुनाव आयुक्तों ने इन मामलों पर लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं। वहीं चुनाव आयोग की ओर से इस पूरे विवाद को लेकर यह पक्ष सामने आया है कि आयोग के फैसले सर्वसम्मति से लिए गए और आंतरिक मतभेद की तस्वीर को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है।
यही वजह है कि अब पूरा विवाद सिर्फ राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रह गया है। सवाल चुनाव आयोग की आंतरिक कार्यप्रणाली, SIR की प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े फैसलों की पारदर्शिता पर भी उठ रहे हैं। आने वाले दिनों में संसद, अदालत और चुनाव आयोग के स्तर पर इस मामले में क्या कदम उठते हैं, इस पर सबकी नजर रहेगी।
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