पांच राज्यों में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले निर्वाचन आयोग ने अधिकारियों की तैनाती को लेकर निर्देश जारी किए हैं। चुनाव प्रक्रिया से सीधे जुड़े अधिकारियों को उनके गृह क्षेत्र और उन निर्वाचन क्षेत्रों में तैनात करने से बचने को कहा गया है, जहां वे पिछले विधानसभा चुनाव या उपचुनाव के दौरान तैनात थे।
उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले निर्वाचन आयोग ने प्रशासनिक तैयारियों को लेकर कदम तेज कर दिए हैं। चुनावी प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी बनी रहे, इसके लिए अधिकारियों की तैनाती को लेकर निर्देश दिए जाने की खबर सामने आई है। आयोग ने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर के मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर अधिकारियों की पोस्टिंग में निर्धारित नियमों का पालन सुनिश्चित करने को कहा है।
निर्देशों के मुताबिक, चुनाव प्रक्रिया से सीधे जुड़े अधिकारियों को उनके गृह क्षेत्र में तैनात नहीं किया जाना चाहिए। इसके अलावा, ऐसे अधिकारियों की तैनाती उन निर्वाचन क्षेत्रों में भी नहीं होनी चाहिए, जहां वे पिछले विधानसभा चुनाव या उसके बाद हुए उपचुनाव के दौरान तैनात रहे थे।
इस कदम का उद्देश्य चुनाव के दौरान प्रशासनिक निष्पक्षता बनाए रखना और किसी अधिकारी की स्थानीय परिस्थितियों या पुराने कार्यक्षेत्र से जुड़ाव के कारण निष्पक्षता पर सवाल उठने की आशंका को कम करना है।
गृह क्षेत्र ही नहीं, पिछली चुनावी तैनाती भी होगी अहम
चुनाव के दौरान जिला प्रशासन और पुलिस के अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। मतदाता सूची, चुनावी व्यवस्था, कानून-व्यवस्था और मतदान प्रक्रिया से जुड़े कई काम इन्हीं अधिकारियों की निगरानी में होते हैं। ऐसे में उनकी तैनाती को लेकर स्पष्ट नियम चुनावी व्यवस्था का अहम हिस्सा माने जाते हैं।
निर्वाचन आयोग की स्थापित नीति के अनुसार, चुनाव से सीधे जुड़े अधिकारियों को उनके गृह जिले में तैनात नहीं रखा जाना चाहिए। लंबे समय तक एक ही जिले में तैनाती से जुड़े नियम भी लागू होते हैं। आयोग के पूर्व निर्देशों में पिछले चार वर्षों के दौरान किसी जिले में तीन साल की तैनाती पूरी करने वाले अधिकारियों के स्थानांतरण का प्रावधान भी रहा है। <Cite refs={["turn880919search14","turn880919search16"]}/>
इसके अतिरिक्त, पिछले विधानसभा चुनाव या उसके बाद हुए उपचुनाव में किसी निर्वाचन क्षेत्र में तैनात रहे संबंधित अधिकारियों को उसी क्षेत्र में दोबारा तैनात करने से बचने का निर्देश भी चुनावी निष्पक्षता के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
हालांकि, इन निर्देशों का वास्तविक क्रियान्वयन संबंधित पद, अधिकारी की चुनावी जिम्मेदारी और आयोग के लागू आदेशों के अनुसार किया जाएगा।

2027 के चुनावों से पहले पांच राज्यों में तैयारी तेज
उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। निर्वाचन आयोग इन राज्यों में चुनावी तैयारियों की समीक्षा कर रहा है। अक्टूबर की शुरुआत में सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, आयोग के वरिष्ठ अधिकारी चुनावी तैयारियों का जायजा लेने के लिए राज्यों का दौरा भी कर रहे हैं। <Cite refs={["turn880919search0","turn880919search1"]}/>
इसके साथ ही मतदाता सूची को दुरुस्त करने की प्रक्रिया भी चल रही है। निर्वाचन आयोग ने 17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (Special Summary Revision) कराने की जानकारी दी है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य पात्र मतदाताओं का नाम सूची में शामिल करना, गलत प्रविष्टियों को ठीक करना और युवा तथा पहली बार मतदान करने वाले नागरिकों के पंजीकरण को बढ़ावा देना है। <Cite refs={["turn880919search4","turn880919search6"]}/>
ऐसे में अधिकारियों की तैनाती और मतदाता सूची से जुड़ी तैयारियां आगामी चुनावों के लिए महत्वपूर्ण होंगी। चुनाव कार्यक्रम की औपचारिक घोषणा होने से पहले प्रशासनिक व्यवस्था को व्यवस्थित करना आयोग की तैयारी का हिस्सा है।
2022 के चुनावों में क्या रहा था नतीजा?
पिछले विधानसभा चुनावों के परिणामों पर नजर डालें तो पांचों राज्यों की राजनीतिक तस्वीर अलग-अलग रही थी।
उत्तर प्रदेश में 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 255 सीटें जीती थीं, जबकि समाजवादी पार्टी को 111 सीटें मिली थीं। उत्तराखंड में भाजपा ने 47 और कांग्रेस ने 19 सीटों पर जीत दर्ज की थी।
पंजाब में आम आदमी पार्टी ने 117 में से 92 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी। गोवा में भाजपा 20 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। वहीं मणिपुर में भाजपा ने 32 सीटें जीतकर अपनी स्थिति मजबूत की थी।
अब 2027 के चुनावों को लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। हालांकि, पिछले चुनावों के नतीजे आगामी चुनावों के परिणाम तय नहीं करते; नई परिस्थितियां, मुद्दे और मतदाताओं की पसंद चुनावी तस्वीर को प्रभावित करेंगे।
निष्पक्ष चुनाव की कसौटी पर रहेगी प्रशासनिक व्यवस्था
निर्वाचन आयोग के निर्देशों के बाद संबंधित राज्यों के प्रशासन के सामने अधिकारियों की तैनाती और चुनावी जिम्मेदारियों के निर्धारण का काम महत्वपूर्ण हो गया है। नियमों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि चुनावी प्रक्रिया में किसी तरह के पक्षपात की आशंका न रहे और सभी राजनीतिक दलों तथा मतदाताओं का भरोसा बना रहे।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि पांचों राज्यों में निर्देशों को किस तरह लागू किया जाता है और चुनावी तैयारियों के अगले चरण में आयोग किन कदमों पर जोर देता है।
आने वाले महीनों में मतदाता सूची, अधिकारियों की तैनाती और चुनावी तैयारियों से जुड़े फैसले इन राज्यों के राजनीतिक माहौल में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
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