उत्तर प्रदेश सहित पांच राज्यों में 2027 की शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले चुनाव आयोग ने प्रशासनिक और चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं। आयोग ने गृह जिले में तैनात चुनाव संबंधी अधिकारियों को हटाने और पिछले चार वर्षों में किसी एक जिले में तीन साल का कार्यकाल पूरा करने वाले अधिकारियों के तबादले के निर्देश दिए हैं। यूपी के मुख्य सचिव और डीजीपी को 30 नवंबर तक कार्रवाई की रिपोर्ट सौंपनी है।
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले चुनावी तैयारियों ने रफ्तार पकड़नी शुरू कर दी है। चुनाव आयोग ने प्रशासनिक व्यवस्था को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए अधिकारियों की तैनाती और तबादलों को लेकर सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। आयोग का फोकस उन अधिकारियों पर है, जो अपने गृह जिले में तैनात हैं या लंबे समय से एक ही जिले में काम कर रहे हैं।
उत्तर प्रदेश के साथ पंजाब, मणिपुर, गोवा और उत्तराखंड में भी वर्ष 2027 की शुरुआत में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। ऐसे में चुनाव आयोग ने इन पांचों राज्यों में चुनावी तैयारियों की प्रक्रिया तेज कर दी है। आयोग के निर्देशों के तहत चुनाव से सीधे जुड़े अधिकारियों की पोस्टिंग की समीक्षा की जा रही है, ताकि चुनाव के दौरान प्रशासनिक मशीनरी की निष्पक्षता बनी रहे।
यूपी के चार मंडलों के 18 जिलों में चुनावी तैयारियों की समीक्षा
2 नवंबर को चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश के पश्चिमी क्षेत्र के चार मंडलों के 18 जिलों में चुनावी तैयारियों की समीक्षा की। इस बैठक में अधिकारियों को मतदाता सूचियों को जल्द से जल्द दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए। आयोग ने नए मतदाताओं के नाम जोड़ने और मतदाता सूची में जरूरी सुधार करने पर विशेष जोर दिया।
इसके साथ ही मतदान केंद्रों पर उपलब्ध सुविधाओं, ईवीएम और वीवीपैट मशीनों के प्रबंधन तथा चुनाव प्रक्रिया में शामिल होने वाले अधिकारियों के प्रशिक्षण की तैयारियां भी तेज करने को कहा गया। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी अधिकारियों को सतर्क रहने और जरूरी इंतजाम समय रहते पूरे करने के निर्देश दिए गए।
चुनाव आयोग की नजर केवल मतदान के दिन की व्यवस्था पर नहीं, बल्कि उससे पहले की पूरी चुनावी प्रक्रिया पर है। मतदाता सूची की शुद्धता, मतदान केंद्रों की स्थिति, मशीनों की उपलब्धता और कर्मचारियों की तैयारी जैसे विषयों की समीक्षा इसी प्रक्रिया का हिस्सा हैं।
गृह जिले में तैनात अधिकारी नहीं संभाल सकेंगे चुनावी जिम्मेदारी
चुनाव आयोग के निर्देशों के मुताबिक, चुनाव संबंधी कामों में सीधे तौर पर जुड़े ऐसे अधिकारियों को उनके गृह जिले में तैनात नहीं रखा जाएगा। आयोग ने यह भी निर्देश दिया है कि जिन अधिकारियों ने पिछले चार वर्षों के दौरान किसी एक जिले में तीन साल का कार्यकाल पूरा कर लिया है या निर्धारित कटऑफ तक पूरा कर लेंगे, उन्हें उस जिले से स्थानांतरित किया जाए।
उत्तर प्रदेश के मामले में तीन साल की अवधि की गणना के लिए 31 मई 2027 की तारीख निर्धारित की गई है। यानी पिछले चार वर्षों की अवधि में इस तारीख तक किसी जिले में तीन साल पूरे करने वाले संबंधित अधिकारियों को तबादले के दायरे में रखा गया है।
इस नीति के दायरे में चुनावी प्रक्रिया से जुड़े कई महत्वपूर्ण पद शामिल हैं। इनमें इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO), सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट (SDM), जॉइंट मजिस्ट्रेट और तहसीलदार जैसे अधिकारी शामिल हैं। आयोग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि चुनावी जिम्मेदारी निभाने वाले अधिकारी लंबे समय तक एक ही जिले में तैनात न रहें और किसी तरह के पक्षपात की आशंका को कम किया जा सके।
30 नवंबर तक मुख्य सचिव और डीजीपी को देनी होगी रिपोर्ट
चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP) से 30 नवंबर तक संयुक्त रिपोर्ट मांगी है। इस रिपोर्ट में आयोग के निर्देशों के अनुसार की गई कार्रवाई का पूरा विवरण देना होगा। यानी किन अधिकारियों के तबादले किए गए और निर्देशों का कितना पालन हुआ, इसकी जानकारी आयोग को उपलब्ध करानी होगी।
यह निर्देश प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि चुनाव से जुड़ी जिम्मेदारियों में तैनात अधिकारियों की पोस्टिंग पर आयोग की सीधी निगरानी रहेगी।
क्या जल्द घोषित हो सकते हैं चुनाव?
पांच राज्यों में 2027 की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं। मतदाता सूची की समीक्षा, अधिकारियों के तबादले, मतदान केंद्रों की सुविधाओं, EVM-VVPAT प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था पर जोर दिए जाने से चुनावी तैयारियों में तेजी साफ दिखाई दे रही है।
हालांकि, इन प्रशासनिक निर्देशों और समीक्षा बैठकों को चुनाव की तारीखों की घोषणा का संकेत मानना जल्दबाजी होगी। चुनाव कार्यक्रम कब जारी होगा, इसका आधिकारिक निर्णय चुनाव आयोग ही करेगा। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि आयोग चुनाव से पहले प्रशासनिक व्यवस्था को दुरुस्त करने और मतदान प्रक्रिया की तैयारियों को समय रहते पूरा कराने में जुटा है।
अब देखना होगा कि 30 नवंबर तक उत्तर प्रदेश सरकार आयोग के निर्देशों पर कितनी कार्रवाई करती है और आने वाले महीनों में चुनावी तैयारियों का अगला चरण क्या रहता है।
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