SGPGI लखनऊ में 140 किलोग्राम से अधिक वजन और कई गंभीर बीमारियों से जूझ रही महिला के कूल्हे के फ्रैक्चर का सफल ऑपरेशन, विशेषज्ञता और टीमवर्क का अनूठा उदाहरण।
लखनऊ स्थित संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (SGPGI) ने एक बार फिर अपनी चिकित्सकीय उत्कृष्टता का प्रमाण दिया है। संस्थान के अस्थि रोग और एनेस्थिसियोलॉजी विभाग के डॉक्टरों ने 140 किलोग्राम से अधिक वजन वाली एक 50 वर्षीय महिला के कूल्हे (फीमर नेक) के फ्रैक्चर का अत्यंत जटिल और उच्च जोखिम वाला ऑपरेशन सफलतापूर्वक कर दिखाया।
मरीज गंभीर मोटापे के साथ थायराइड, उच्च रक्तचाप और ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया जैसी बीमारियों से ग्रसित थी और सांस लेने के लिए CPAP मशीन पर निर्भर थी। अधिक वजन और जोखिम के कारण कई अस्पतालों ने सर्जरी से इनकार कर दिया था, लेकिन SGPGI के विशेषज्ञों ने चुनौती स्वीकार की।

अस्थि रोग विभाग के एडिशनल प्रोफेसर डॉ. कुमार केशव और एनेस्थिसियोलॉजी विभाग की एडिशनल प्रोफेसर डॉ. वंश प्रिय के नेतृत्व में सर्जरी की गई। डॉ. केशव की टीम में डॉ. उत्कर्ष, डॉ. अर्पण, डॉ. राजेश, डॉ. योगेश और स्क्रब नर्स अंकित शामिल थे। अत्यधिक वसा के कारण फ्रैक्चर तक पहुंचना और रक्तस्राव नियंत्रित करना बड़ी चुनौती थी, लेकिन सटीक योजना से ऑपरेशन सफल रहा।
एनेस्थीसिया टीम ने जनरल एनेस्थीसिया के जोखिम से बचते हुए अल्ट्रासाउंड गाइडेड तकनीक से 150 मिमी लंबी विशेष सुई द्वारा स्पाइनल एनेस्थीसिया दिया। ऑपरेशन के बाद मरीज में रैबडोमायोलिसिस जैसी गंभीर जटिलता उत्पन्न हुई, जिसे डॉ. सुरुचि ने समय रहते पहचानकर एनेस्थीसिया ICU में सफलतापूर्वक नियंत्रित किया।

अब मरीज के टांके कट चुके हैं और वह वॉकर के सहारे चलने में सक्षम है। डॉक्टरों ने संतुलित आहार और नियमित व्यायाम अपनाने की सलाह देते हुए कहा कि विशेषज्ञता और टीमवर्क से असंभव दिखने वाले मामले भी सफल बनाए जा सकते हैं।
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