समाजवादी पार्टी ने 2027 विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपनी रणनीति तेज कर दी है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव 29 मार्च को गौतमबुद्धनगर के दादरी में ‘समाजवादी समानता भाईचारा रैली’ को संबोधित करेंगे, जिसे पार्टी के चुनावी अभियान की शुरुआत माना जा रहा है।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर चुनावी हलचल तेज होती नजर आ रही है। आगामी 2027 विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए समाजवादी पार्टी ने अपनी राजनीतिक रणनीति पर अभी से काम शुरू कर दिया है। पार्टी खास तौर पर उन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित कर रही है जहां पिछले चुनावों में उसे अपेक्षित सफलता नहीं मिल पाई थी। इसी रणनीति के तहत सपा प्रमुख Akhilesh Yadav 29 मार्च को गौतमबुद्धनगर के दादरी में ‘समाजवादी समानता भाईचारा रैली’ को संबोधित करेंगे।
इस रैली को समाजवादी पार्टी के आगामी चुनावी अभियान की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत किए बिना 2027 के चुनाव में बेहतर प्रदर्शन करना मुश्किल होगा। इसलिए सपा ने इस क्षेत्र में नए सामाजिक समीकरण साधने की रणनीति तैयार की है।
दरअसल, समाजवादी पार्टी इस बार पश्चिमी यूपी में अपने पारंपरिक वोट बैंक के साथ-साथ अन्य प्रभावशाली समुदायों को भी जोड़ने की कोशिश कर रही है। पार्टी की रणनीति ‘पीडीए’ यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग के साथ जाट और गुर्जर मतदाताओं को भी एक मंच पर लाने की है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर सपा इस सामाजिक समीकरण को मजबूत करने में सफल होती है तो पश्चिमी यूपी की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
दादरी में आयोजित होने वाली ‘समानता भाईचारा रैली’ को इसी रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है। पार्टी नेता इस रैली में बड़ी संख्या में लोगों को जुटाकर शक्ति प्रदर्शन करने की तैयारी में जुटे हैं। इसके लिए पार्टी के स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं को विशेष जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।
समाजवादी पार्टी का मानना है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जातीय और सामाजिक समीकरण चुनावी नतीजों को काफी हद तक प्रभावित करते हैं। इसलिए पार्टी इस बार सामाजिक संतुलन और भाईचारे के संदेश के साथ मतदाताओं के बीच जाने की योजना बना रही है।
गौरतलब है कि समाजवादी पार्टी ने वर्ष 2012 में पूर्ण बहुमत के साथ उत्तर प्रदेश में सरकार बनाई थी। उस समय पार्टी को राज्य की राजनीति में बड़ी सफलता मिली थी। हालांकि इसके बाद हुए 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में सपा को सत्ता में वापसी का मौका नहीं मिल सका।

साल 2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी को 403 सीटों में से 111 सीटों पर ही जीत हासिल हुई थी। उस समय पार्टी ने Jayant Chaudhary के नेतृत्व वाली Rashtriya Lok Dal के साथ गठबंधन किया था, लेकिन इसके बावजूद पश्चिमी यूपी में पार्टी को अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी।
वहीं दूसरी ओर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में Bharatiya Janata Party का दबदबा लगातार बना हुआ है। गौतमबुद्धनगर जिले की तीनों विधानसभा सीटों—नोएडा, दादरी और जेवर—पर भाजपा ने जीत दर्ज की थी। इसके अलावा गाजियाबाद, मेरठ, बुलंदशहर और बागपत जैसे जिलों में भी भाजपा को बड़ी सफलता मिली थी।
अब स्थिति यह है कि राष्ट्रीय लोकदल भाजपा के साथ गठबंधन में है, जिससे पश्चिमी यूपी में समाजवादी पार्टी की चुनौती और भी कठिन हो गई है। ऐसे में सपा नेतृत्व पश्चिमी यूपी में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने के लिए नई रणनीति पर काम कर रहा है।
दादरी में होने वाली रैली को सफल बनाने के लिए समाजवादी पार्टी ने गौतमबुद्धनगर, गाजियाबाद, मेरठ, बुलंदशहर, बागपत और हापुड़ जिलों के नेताओं को विशेष जिम्मेदारी सौंपी है। सभी पदाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करें और रैली को ऐतिहासिक बनाने का प्रयास करें।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि दादरी और आसपास के क्षेत्रों में जाट और गुर्जर मतदाताओं का खास प्रभाव है। इसके अलावा दलित और अल्पसंख्यक मतदाताओं की भी अच्छी संख्या है। ऐसे में समाजवादी पार्टी इस रैली के जरिए इन सभी समुदायों को एक मंच पर लाकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि समाजवादी पार्टी की यह रणनीति कितनी सफल होती है और क्या दादरी की ‘समानता भाईचारा रैली’ पश्चिमी यूपी की राजनीति में कोई नया समीकरण बना पाती है।
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