हरियाणा में बिजली वितरण के कथित निजीकरण के विरोध में करीब 40,000 बिजली कर्मचारी और इंजीनियर हड़ताल पर हैं। गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत, रेवाड़ी समेत कई जिलों में बिजली-पानी की सप्लाई प्रभावित हुई है। अस्पतालों, स्कूलों और औद्योगिक इकाइयों पर भी असर पड़ा है। बिजली मंत्री अनिल विज ने कर्मचारियों से काम पर लौटने की अपील करते हुए बातचीत का प्रस्ताव दिया है।
हरियाणा में बिजली संकट गहराया, आम जनता से लेकर उद्योगों तक परेशानी
हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल ने आम जनजीवन की रफ्तार थाम दी है। कहीं घरों में इनवर्टर जवाब दे गए हैं, तो कहीं पानी की सप्लाई बाधित होने से लोगों को परेशान होना पड़ रहा है। औद्योगिक क्षेत्रों में मशीनें बंद होने और अस्पतालों में बिजली गुल होने की खबरों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।
बिजली विभाग के करीब 40,000 कर्मचारी और इंजीनियर निजीकरण के विरोध में तीन दिवसीय हड़ताल पर हैं। यह हड़ताल 22 से 25 अक्टूबर 2026 तक चलने की घोषणा के साथ चर्चा में है। कर्मचारियों का विरोध गुरुग्राम और नूंह में निजी कंपनी इलेवन पावर को बिजली वितरण का समानांतर लाइसेंस देने के फैसले से जुड़ा है। कर्मचारियों को आशंका है कि इससे सरकारी बिजली वितरण निगम कमजोर हो सकते हैं।
15 जिलों में आपूर्ति प्रभावित, हजारों शिकायतें दर्ज
हड़ताल का असर गुरुग्राम, फरीदाबाद, नूंह, सोनीपत, रेवाड़ी, झज्जर, करनाल, अंबाला, हिसार, रोहतक, भिवानी, चरखी दादरी, कुरुक्षेत्र और सिरसा समेत प्रदेश के कई हिस्सों में देखने को मिला। अलग-अलग क्षेत्रों में बिजली कटौती की अवधि कई घंटे तक पहुंचने की खबरें सामने आईं।

गुरुग्राम में बुधवार रात से बिजली आपूर्ति बाधित होने लगी। शुरुआती 12 घंटों में 3,000 से ज्यादा शिकायतें मिलने की जानकारी सामने आई। फरीदाबाद में 5,563 शिकायतें दर्ज होने की सूचना मिली, जबकि जींद, कैथल, रोहतक, नारनौल, पानीपत और यमुनानगर में भी हजारों शिकायतें पहुंचीं। कई जगह शिकायत केंद्रों पर फोन लगातार बजते रहे, लेकिन तकनीकी कर्मचारियों की कमी के कारण फॉल्ट ठीक करने में परेशानी हुई।
फरीदाबाद में अटाली और आईएसई सहित 50 से अधिक फीडरों के ब्रेकडाउन होने से कई इलाकों में बिजली गुल रही। एनआईटी, जवाहर कॉलोनी, डबुआ कॉलोनी, सेक्टर-56, सेक्टर-21डी और बल्लभगढ़ के कई हिस्सों में बिजली-पानी का संकट सामने आया।
उद्योगों को करोड़ों का नुकसान, उत्पादन पर बड़ा असर
बिजली संकट का असर हरियाणा के औद्योगिक क्षेत्रों में भी दिखाई दिया। सोनीपत के राई, बड़ी और कुंडली औद्योगिक क्षेत्रों में कई इकाइयों को जनरेटर का सहारा लेना पड़ा। इसके बावजूद करीब 2,500 औद्योगिक इकाइयों में उत्पादन क्षमता आधी रह जाने की जानकारी सामने आई। करनाल में लगभग 1,000 औद्योगिक इकाइयों के कामकाज पर असर पड़ा।
गुरुग्राम के उद्योग विहार, मानेसर, बसई, कादीपुर, दौलताबाद और सेक्टर-37 जैसे क्षेत्रों में मशीनें बंद रहने की खबरें आईं। दौलताबाद औद्योगिक क्षेत्र के अध्यक्ष पवन कुमार के अनुसार, करीब 340 उद्योग बंद रहने से एक दिन में लगभग 150 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। वहीं, गुरुग्राम के उद्यमियों ने कुल कारोबार पर 1,500 करोड़ रुपये से अधिक के असर का दावा किया है। ये आंकड़े उद्योग प्रतिनिधियों के दावे हैं।
इसके अलावा रेवाड़ी की करीब 150 फैक्टरियों, बहादुरगढ़ की 300 औद्योगिक इकाइयों और नारनौल के लगभग 20 लघु उद्योगों का काम प्रभावित हुआ। रोहतक और जींद में भी कई इकाइयों में उत्पादन रुकने की सूचना मिली।

अस्पतालों और स्कूलों पर भी असर
बिजली संकट का असर स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी जरूरी सेवाओं पर भी पड़ा। भिवानी के जिला नागरिक अस्पताल और पंडित नेकीराम शर्मा राजकीय मेडिकल कॉलेज में करीब पांच घंटे तक बिजली गुल रहने की सूचना मिली। इससे मरीजों, चिकित्सकों और जांच रिपोर्ट तैयार करने के काम में परेशानी हुई। स्थिति संभालने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों ने 132 केवी पावर सब स्टेशन पहुंचकर इमरजेंसी फीडर चालू कराया।
करनाल में कैथल रोड फीडर बंद रहने के कारण शिव कॉलोनी स्थित बाल विकास स्कूल समेत पांच स्कूलों को बंद करना पड़ा। सिरसा के लघु सचिवालय में बिजली नहीं होने से सरकारी कामकाज भी प्रभावित हुआ।
गांवों में पानी का संकट, मंडियों में टॉर्च की रोशनी में काम
ग्रामीण इलाकों में भी लोगों को लंबी कटौती का सामना करना पड़ा। जींद, नारनौल, सोनीपत, रेवाड़ी और यमुनानगर के अनेक गांवों में बिजली आपूर्ति प्रभावित रही। यमुनानगर के कुछ ग्रामीण इलाकों में लोगों को पानी के लिए आसपास के घरों और हैंडपंपों का सहारा लेना पड़ा।
अनाज मंडियों में धान की सफाई, तुलाई और उठान पर भी असर पड़ा। यमुनानगर की सरस्वती नगर मंडी में मजदूरों ने टॉर्च की रोशनी में धान की तौल की। करनाल और कैथल की मंडियों में बिजली कटौती के कारण इलेक्ट्रॉनिक कांटों और इनवर्टर की बैटरी जवाब देने लगी। कुछ जगह आढ़तियों ने निजी जनरेटर मंगवाकर काम चलाने की कोशिश की।
रेवाड़ी में बिजली कटौती से नाराज ग्रामीणों ने पल्हावास और आसपास के गांवों में विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने नेशनल हाईवे-352 जाम कर दिया, जिससे सड़क पर भी परेशानी बढ़ गई।
अनिल विज की अपील, सरकार बातचीत को तैयार
बढ़ते संकट के बीच हरियाणा के बिजली मंत्री अनिल विज ने हड़ताल पर गए कर्मचारियों से काम पर लौटने की अपील की। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि कर्मचारी हड़ताल खत्म कर ड्यूटी पर आएं। सरकार सभी विकल्पों पर बातचीत करने के लिए तैयार है, जिसमें बिजली अधिनियम, 2003 की धारा 108 के तहत कार्रवाई भी शामिल है।
विज ने यह भी कहा कि सरकार इलेवन पावर को समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस देने के हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (HERC) के फैसले को विद्युत अपीलीय न्यायाधिकरण (APTEL) में चुनौती देगी और उस पर रोक लगाने की मांग करेगी।
क्या हड़ताल खत्म होगी या बढ़ेगा संकट?
कर्मचारी यूनियनों का आरोप है कि सरकार ने उनकी मांगों पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं की, जिसके चलते उन्हें हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा। यूनियनों ने चेतावनी दी है कि यदि निजीकरण का फैसला वापस नहीं लिया गया और लंबित मांगों पर सहमति नहीं बनी, तो आंदोलन को अनिश्चितकालीन किया जा सकता है। रोडवेज कर्मचारियों ने भी समर्थन में सांकेतिक प्रदर्शन का ऐलान किया है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच बातचीत से कोई समाधान निकलेगा या हरियाणा के लोगों को बिजली-पानी और कारोबार से जुड़ी परेशानियों का सामना आगे भी करना पड़ेगा। फिलहाल, सभी की निगाहें वार्ता और बिजली आपूर्ति बहाल करने के प्रयासों पर टिकी हैं।
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