लखनऊ में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने उत्तर प्रदेश के लिए आवास लक्ष्य बढ़ाकर कम से कम 10 लाख करने और प्रति आवास सहायता राशि में वृद्धि पर विचार करने का अनुरोध किया। कार्यक्रम में बाराबंकी की लाभार्थी सुन्दरकली ने कच्चे घर में बारिश के दौरान होने वाली परेशानियों को याद करते हुए पक्का घर मिलने की उम्मीद पर खुशी जताई।
बारिश के दिनों में खाना बनाने की जगह न मिलना और परिवार के साथ चैन से सो पाने की चिंता—कच्चे मकान में रहने वाले परिवारों के लिए ये परेशानियां रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन जाती हैं। बाराबंकी की सुन्दरकली ने भी ऐसे ही हालात का सामना किया। अब प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत उन्हें आवास स्वीकृति पत्र मिला है। उनकी कहानी उस जरूरत को सामने लाती है, जिसके लिए ग्रामीण क्षेत्रों में पक्के मकानों की मांग लंबे समय से की जाती रही है।
सोमवार को गोमती नगर स्थित होटल हयात में आयोजित प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण की दो दिवसीय क्षेत्रीय कार्यशाला एवं आवास स्वीकृति पत्र वितरण कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने लाभार्थी महिलाओं को स्वीकृति पत्र वितरित किए। कार्यक्रम में उन्होंने ग्रामीण गरीबों को पक्का घर उपलब्ध कराने को सरकार की प्राथमिकता बताया और केंद्र सरकार के सामने योजना के लक्ष्य तथा आर्थिक सहायता बढ़ाने से जुड़े प्रस्ताव भी रखे।
यूपी के लिए 10 लाख आवासों का लक्ष्य बढ़ाने की मांग
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2026-27 में केंद्र सरकार ने आवास प्लस सर्वेक्षण-2024 के आधार पर उत्तर प्रदेश को प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत 6.18 लाख आवासों का लक्ष्य दिया है। उनके मुताबिक, नए सर्वेक्षण में प्रदेश में 39.21 लाख लाभार्थियों की पहचान हुई है।

पात्र परिवारों की संख्या को देखते हुए मौर्य ने इस वित्तीय वर्ष में आवासों का लक्ष्य बढ़ाकर कम से कम 10 लाख करने का अनुरोध किया। उन्होंने मौजूदा निर्माण लागत को ध्यान में रखते हुए प्रति आवास मिलने वाली सहायता राशि में वृद्धि पर विचार करने की मांग भी रखी।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी के तहत पात्र लाभार्थियों को आवास निर्माण के लिए ढाई लाख रुपये तक की सहायता दी जाती है। इसी आधार पर उन्होंने केंद्र सरकार से ग्रामीण योजना में भी मैदानी और पर्वतीय क्षेत्रों की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए ढाई लाख रुपये तक की सहायता उपलब्ध कराने का आग्रह किया।
मौर्य ने कहा कि पर्वतीय इलाकों में निर्माण सामग्री की ढुलाई और भौगोलिक कठिनाइयों के कारण मकान बनाने की लागत अधिक हो सकती है। ऐसे में सहायता राशि बढ़ने से जरूरतमंद परिवारों को राहत मिल सकती है। उन्होंने पात्र आंशिक पक्के मकानों वाले परिवारों को योजना के दायरे में शामिल करने और लंबित प्रशासनिक मद की धनराशि उपलब्ध कराने का अनुरोध भी किया।
43 लाख आवासों का आवंटन, 99.55 प्रतिशत निर्माण पूरा होने का दावा
कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण की शुरुआत वर्ष 2016 में हुई थी। उनके अनुसार, उत्तर प्रदेश को अब तक लगभग 43 लाख आवासों का आवंटन प्राप्त हुआ है।
उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष तक स्वीकृत 36.56 लाख आवासों में से 36.40 लाख का निर्माण पूरा हो चुका था। इस आधार पर प्रदेश में आवास निर्माण की पूर्णता दर 99.55 प्रतिशत बताई गई।
मौर्य ने भूमिहीन पात्र लाभार्थियों को पट्टा उपलब्ध कराने, राजमिस्त्रियों को प्रशिक्षण देने, एरिया ऑफिसर ऐप के जरिए निरीक्षण और सोशल ऑडिट जैसे कार्यों में भी प्रदेश की प्रगति का उल्लेख किया।
मुख्यमंत्री आवास योजना में 5.88 लाख आवासों का उल्लेख
उपमुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री आवास योजना का जिक्र करते हुए बताया कि इसके तहत अब तक 5.88 लाख आवास उपलब्ध कराए गए हैं। इनमें 1.30 लाख आवास दिव्यांगजनों और 70 हजार से अधिक आवास निराश्रित विधवा महिलाओं को दिए जाने की जानकारी दी गई।

उन्होंने कहा कि मुसहर, वनटांगिया, कुष्ठ रोग से प्रभावित परिवारों, जनजातीय समुदायों और प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित परिवारों को भी प्राथमिकता दी गई है।
मौर्य के मुताबिक, सरकार की योजना केवल मकान बनाकर देने तक सीमित नहीं है। आवास के साथ बिजली, गैस कनेक्शन, नल से जल, शौचालय और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के साथ परिवारों को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ने पर भी जोर दिया जा रहा है, ताकि उनकी आजीविका को सहारा मिल सके।
सुन्दरकली समेत कई महिलाओं को मिले स्वीकृति पत्र
कार्यक्रम में बाराबंकी जिले के विभिन्न ब्लॉकों की महिलाओं को आवास स्वीकृति पत्र दिए गए। इनमें सिधियांवा ब्लॉक की सुनीता, रामकुमारी, जगरीना, शिवकुमारी और श्रीदेवी सहित इस्लामपुर ब्लॉक की जयनाथा, सुन्दरकली, सुमन और राजकुमारी के नाम शामिल हैं।
सुन्दरकली ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि बारिश के दौरान उनके लिए खाना बनाने और सोने तक की जगह की समस्या रहती थी। उन्होंने कहा कि अब उनके परिवार को सुकून से रहने की उम्मीद है और इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार जताया।
कार्यक्रम में केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्यमंत्री कमलेश पासवान, प्रदेश की ग्राम्य विकास राज्यमंत्री विजय लक्ष्मी गौतम, प्रमुख सचिव सौरभ बाबू, आयुक्त ग्राम्य विकास प्रमोद कुमार उपाध्याय और भारत सरकार के वरिष्ठ आर्थिक सलाहकार पीयूष श्रीवास्तव समेत विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
कार्यशाला में हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, ओडिशा, पंजाब, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल के प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया। इसका उद्देश्य अलग-अलग राज्यों के अनुभवों और सुझावों के आधार पर योजना के क्रियान्वयन में सुधार करना था।
फिलहाल, उत्तर प्रदेश के लिए आवास लक्ष्य बढ़ाने और सहायता राशि में बदलाव से जुड़े प्रस्ताव केंद्र सरकार के समक्ष रखे गए हैं। इन मांगों पर अंतिम निर्णय संबंधित स्तर पर लिया जाना है। वहीं, सुन्दरकली जैसी लाभार्थियों के लिए स्वीकृति पत्र के बाद मकान का निर्माण पूरा होना और बुनियादी सुविधाओं का लाभ मिलना अगला महत्वपूर्ण पड़ाव होगा।
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