Wednesday, April 15, 2026

नोएडा बवाल के बाद बड़ा फैसला! मजदूरों की मांग पर सरकार ने बढ़ाया वेतन, साजिश करने वालों पर कड़ी कार्रवाई के संकेत

उच्च स्तरीय समिति की प्रेस वार्ता में बड़ा खुलासा—भ्रामक खबरों से भड़की स्थिति, अब नियंत्रण में हालात और श्रमिकों को राहत

Bahrampur , Latest Updated On - Apr 14 2026 | 14:01:00 PM
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नोएडा में श्रमिक प्रदर्शन के बाद सरकार ने न्यूनतम वेतन में 21% तक बढ़ोतरी की, साथ ही अफवाह फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई के संकेत दिए।

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गौतमबुद्धनगर में हाल ही में हुए श्रमिक प्रदर्शन और उससे उपजे तनाव के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए न्यूनतम वेतन में अंतरिम बढ़ोतरी का ऐलान किया है। 14 अप्रैल 2026 को ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण में आयोजित प्रेस वार्ता में उच्च स्तरीय समिति ने इस फैसले की जानकारी देते हुए स्पष्ट किया कि यह बढ़ोतरी 01 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगी।

यह समिति प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गठित की गई थी, जिसका उद्देश्य जनपद में औद्योगिक सामंजस्य और शांति बनाए रखना है। प्रेस वार्ता के दौरान औद्योगिक विकास आयुक्त दीपक कुमार ने बताया कि सरकार ने संतुलित दृष्टिकोण अपनाते हुए श्रमिकों को तत्काल राहत देने का निर्णय लिया है।

नई अंतरिम वेतन दरों के अनुसार गौतमबुद्धनगर और गाजियाबाद जैसे औद्योगिक जिलों में सबसे अधिक लगभग 21 प्रतिशत तक की वृद्धि की गई है। इसके तहत अकुशल श्रमिकों का वेतन ₹11,313 से बढ़ाकर ₹13,690 कर दिया गया है, अर्धकुशल श्रमिकों का वेतन ₹12,445 से बढ़ाकर ₹15,059 और कुशल श्रमिकों का वेतन ₹13,940 से बढ़ाकर ₹16,868 कर दिया गया है।


अन्य नगर निगम क्षेत्रों में भी वेतन बढ़ाया गया है, जहां अकुशल श्रमिकों का वेतन ₹11,313 से बढ़ाकर ₹13,006, अर्धकुशल का ₹14,306 और कुशल श्रमिकों का ₹16,025 कर दिया गया है। वहीं अन्य जनपदों में भी सभी श्रेणियों में वेतन वृद्धि की गई है, जिससे लाखों श्रमिकों को सीधा लाभ मिलेगा।

दीपक कुमार ने बताया कि यह वृद्धि अंतरिम है और आगामी माह गठित होने वाले वेज बोर्ड की सिफारिशों के आधार पर स्थायी न्यूनतम वेतन तय किया जाएगा। इसके साथ ही सरकार श्रमिकों के लिए स्वास्थ्य, पेंशन और उनके बच्चों की शिक्षा से जुड़ी नई योजनाओं पर भी काम कर रही है।

प्रेस वार्ता में समिति के अन्य सदस्य प्रमुख सचिव (श्रम) डॉ. एम.के.एस. सुंदरम, अपर मुख्य सचिव एमएसएमई आलोक कुमार, श्रम आयुक्त मार्कण्डेय शाही, यमुना विकास प्राधिकरण के सीईओ राकेश कुमार सिंह और जिलाधिकारी मेधा रूपम भी मौजूद रहे।

समिति ने सोमवार को हुए प्रदर्शन और हिंसा पर भी विस्तार से जानकारी दी। जांच में यह सामने आया कि सोशल मीडिया पर ₹20,000 मासिक न्यूनतम वेतन लागू होने की खबरें पूरी तरह भ्रामक और निराधार थीं। इन्हीं अफवाहों के कारण बड़ी संख्या में श्रमिक सड़कों पर उतर आए, जिससे कई स्थानों पर तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई।

समिति ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत सरकार द्वारा नई श्रम संहिताओं के तहत राष्ट्रीय स्तर पर ‘फ्लोर वेज’ तय करने की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन अभी तक ₹20,000 वेतन लागू करने जैसा कोई निर्णय नहीं लिया गया है।


श्रमिक संगठनों के साथ हुई बैठकों में श्रमिकों ने अपनी मांगें रखीं, जिनमें वेतन वृद्धि, साप्ताहिक अवकाश, ओवरटाइम का दोगुना भुगतान, श्रमिक सुरक्षा और सम्मानजनक कार्य वातावरण शामिल थे। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि हिंसा में बाहरी तत्वों की भूमिका हो सकती है।

दूसरी ओर, उद्योग संगठनों ने बताया कि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों, कच्चे माल की बढ़ती कीमतों और निर्यात में कमी के कारण उद्योग पहले से दबाव में हैं। बावजूद इसके, उन्होंने श्रमिकों की मांगों को प्रासंगिक और विचारणीय बताया।

प्रशासन ने जनपद स्तर पर श्रमिकों की समस्याओं के समाधान के लिए एक कंट्रोल रूम भी स्थापित किया है, जहां श्रमिक अपनी शिकायतें दर्ज करा सकते हैं। इसके लिए 120-2978231, 120-2978232, 120-2978862 और 120-2978702 नंबर जारी किए गए हैं।

हिंसा और उपद्रव को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि औद्योगिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश करने वाले असामाजिक और बाहरी तत्वों की पहचान के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसमें तकनीकी निगरानी, खुफिया तंत्र और स्थानीय सूचना तंत्र को मजबूत किया गया है।

पहचान किए गए दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें गिरफ्तारी, मुकदमे दर्ज करना और अन्य विधिक प्रावधानों के तहत दंडात्मक कार्रवाई शामिल है। सरकार ने साफ संदेश दिया है कि शांति और विकास के माहौल को बाधित करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

सरकार ने यह भी दोहराया कि वह औद्योगिक शांति, श्रमिकों के अधिकारों की सुरक्षा और निवेश के अनुकूल वातावरण बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। प्रशासन यह सुनिश्चित करेगा कि गौतमबुद्धनगर में पहले की तरह विकास की गति बनी रहे और उद्योग व श्रमिकों के बीच विश्वास कायम रहे।

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