गाजियाबाद में पीएम किसान उत्सव के साथ ‘खेत बचाओ अभियान’ की शुरुआत की गई। कृषि विज्ञान केंद्र मुरादनगर में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में किसानों को मृदा परीक्षण, संतुलित उर्वरक प्रयोग, रबी फसलों की उन्नत तकनीक और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई। जिले के सभी विकासखंडों, पैक्स समितियों और कृषि निवेश विक्रय केंद्रों पर प्रधानमंत्री के संबोधन का सजीव प्रसारण भी हुआ।
खेती की बढ़ती लागत, मिट्टी की घटती उर्वरता और बेहतर उत्पादन की चुनौती के बीच गाजियाबाद में किसानों को लेकर एक ऐसी पहल की शुरुआत हुई, जिसका सीधा संबंध खेतों के भविष्य से है। जिले के सभी विकासखंडों में आयोजित पीएम किसान उत्सव के साथ ‘खेत बचाओ अभियान’ का भी शुभारंभ किया गया। कार्यक्रमों के जरिए किसानों को सरकारी योजनाओं की जानकारी देने के साथ यह संदेश दिया गया कि अच्छी फसल की शुरुआत स्वस्थ मिट्टी से होती है।
शासन के निर्देशों के क्रम में आयोजित इस कार्यक्रम का जनपद स्तरीय मुख्य आयोजन कृषि विज्ञान केंद्र, मुरादनगर में हुआ। इसमें जनप्रतिनिधियों, कृषि विभाग के अधिकारियों, कृषि वैज्ञानिकों, प्रगतिशील किसानों और बड़ी संख्या में किसानों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रगतिशील कृषक धर्मदत्त त्यागी ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में माननीय ब्लॉक प्रमुख के प्रतिनिधि संदीप त्यागी उपस्थित रहे। प्रगतिशील महिला कृषक डॉ. नीलम त्यागी की मौजूदगी में कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।
सरकारी योजनाओं से लेकर खेत की मिट्टी तक पर चर्चा
कार्यक्रम में सबसे पहले उप कृषि निदेशक आशीष कुमार सिंह ने आयोजन की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने कृषि विभाग की ओर से संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देते हुए किसानों से इनका अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की। उन्होंने आधुनिक और वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

आशीष कुमार सिंह ने ‘खेत बचाओ अभियान’ का महत्व समझाते हुए कहा कि खेतों की मिट्टी को स्वस्थ और उपजाऊ बनाए रखना जरूरी है। इसके लिए किसानों को मृदा परीक्षण कराने और उसकी रिपोर्ट के अनुसार ही उर्वरकों का इस्तेमाल करने के प्रति जागरूक किया गया।
कृषि विज्ञान केंद्र मुरादनगर के प्रभारी डॉ. प्रमोद कुंदू ने रबी फसलों में बेहतर उत्पादन हासिल करने के तरीके बताए। उन्होंने उन्नत बीजों का चयन, समय पर बुवाई, बीज शोधन, मिट्टी की जरूरत के अनुसार संतुलित उर्वरक प्रयोग और फसलों की वैज्ञानिक देखभाल से जुड़ी तकनीकी जानकारी साझा की। उन्होंने किसानों को बताया कि खेती में सही समय पर सही तकनीक अपनाने से उत्पादन की संभावनाएं बेहतर की जा सकती हैं।
मृदा परीक्षण और संतुलित खाद के इस्तेमाल पर विशेष जोर
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रगतिशील किसान धर्मदत्त त्यागी ने किसानों से बुवाई से पहले मिट्टी की जांच कराने की अपील की। उन्होंने कहा कि मृदा परीक्षण के आधार पर ही खेतों में उर्वरकों की संतुलित मात्रा का प्रयोग किया जाना चाहिए। साथ ही बीजों को शोधित करने के बाद ही बुवाई करने की सलाह दी।
उन्होंने कहा कि मिट्टी का स्वास्थ्य बनाए रखना किसानों की प्राथमिकता होनी चाहिए। रासायनिक उर्वरकों का जरूरत के मुताबिक इस्तेमाल और वैज्ञानिक तरीके से खेती करने से लागत कम करने के साथ उत्पादन तथा किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
मुख्य अतिथि संदीप त्यागी ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में किसानों के कल्याण और आर्थिक सशक्तीकरण के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना को किसानों के लिए आर्थिक सहारा बताते हुए कहा कि पात्र किसानों के बैंक खातों में सीधे धनराशि पहुंचाने की व्यवस्था उन्हें सहायता और सम्मान प्रदान करने का माध्यम बनी है। उन्होंने किसानों से सरकारी योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ लेने की अपील की।
9.34 करोड़ किसान परिवारों को मिली 24वीं किस्त
पीएम किसान उत्सव का आयोजन प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 24वीं किस्त के अवसर पर किया गया। कार्यक्रम में दी गई जानकारी के अनुसार, देशभर के लगभग 9.34 करोड़ किसान परिवारों के खातों में करीब 18,690 करोड़ रुपये की धनराशि हस्तांतरित की गई। कृषि विज्ञान केंद्र मुरादनगर में प्रधानमंत्री के कार्यक्रम और उनके अभिभाषण का सजीव प्रसारण किया गया।

यह प्रसारण केवल मुख्य आयोजन तक सीमित नहीं रहा। जनपद की सभी प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) और खाद, बीज तथा कीटनाशी विक्रय प्रतिष्ठानों पर भी प्रधानमंत्री के संबोधन को लाइव सुना गया। इन केंद्रों पर किसान, कृषि निवेश विक्रेता और अन्य लोग एकत्र हुए। इस तरह जिले के प्रत्येक विकासखंड और अधिक से अधिक किसानों तक पीएम किसान उत्सव का संदेश पहुंचाने का प्रयास किया गया।
महिला कृषकों की भागीदारी बढ़ाने की अपील
कार्यक्रम में प्रगतिशील महिला कृषक डॉ. नीलम त्यागी ने कृषि और कृषि उद्यमिता में महिलाओं की भूमिका पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि महिलाएं खेती के साथ-साथ कृषि आधारित उद्यमों में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं।
उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि एक सामान्य महिला कृषक के रूप में काम शुरू करने के बाद मेहनत, लगन और नवाचार के माध्यम से उन्होंने जनपद गाजियाबाद की अग्रणी महिला कृषि उद्यमियों में अपनी पहचान बनाई है। उन्होंने अन्य महिलाओं से भी कृषि क्षेत्र में आगे आने, नए अवसर तलाशने और आत्मनिर्भर बनने का आह्वान किया।
‘खेत बचाओ अभियान’ का उद्देश्य मिट्टी की सेहत बचाना
पीएम किसान उत्सव के साथ शुरू किए गए खेत बचाओ अभियान का मुख्य उद्देश्य कृषि भूमि की उर्वरता और उत्पादकता को बनाए रखना है। इसके तहत किसानों को नियमित मृदा परीक्षण कराने, मृदा स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर खाद और उर्वरकों का इस्तेमाल करने, जैविक एवं प्राकृतिक संसाधनों का उचित उपयोग करने और संतुलित पोषण प्रबंधन अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
अभियान के माध्यम से यह समझाने की कोशिश की गई कि स्वस्थ मिट्टी ही बेहतर फसल उत्पादन और टिकाऊ कृषि की बुनियाद है। खेतों की उर्वरता का संरक्षण केवल मौजूदा फसल के लिए ही नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी जरूरी है।
जिले के सभी विकासखंडों में कृषि विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने किसानों को सरकारी योजनाओं, रबी फसलों की उन्नत तकनीकों, बीज शोधन, संतुलित उर्वरक प्रयोग, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण और कृषि निवेशों के सही इस्तेमाल की जानकारी दी।
कुल मिलाकर, पीएम किसान उत्सव और खेत बचाओ अभियान के जरिए गाजियाबाद में किसान कल्याण, कृषि तकनीक, महिला सहभागिता और मिट्टी के संरक्षण को एक साथ जोड़ने का प्रयास किया गया। कार्यक्रम का संदेश साफ रहा—किसान की समृद्धि के लिए केवल आर्थिक सहायता ही नहीं, बल्कि स्वस्थ खेत और टिकाऊ खेती भी उतनी ही जरूरी है।
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