ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क-1 स्थित नालंदा लिविंग जीएन हॉस्टल की मेस में खाने के अंदर कीड़ा मिलने के छात्रों के दावे के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग ने जांच की। निरीक्षण में रसोई की साफ-सफाई से जुड़ी कई कमियां मिलीं। विभाग ने हॉस्टल का खाद्य पंजीकरण निलंबित कर किचन बंद करा दिया है। वहीं, सोया चाप की सब्जी का नमूना प्रयोगशाला जांच के लिए भेजा गया है।
ग्रेटर नोएडा के हॉस्टलों में रहने वाले छात्रों की जिंदगी में मेस का खाना रोजमर्रा की जरूरत है। छात्र हर महीने हजारों रुपये खर्च करते हैं, ताकि उन्हें रहने के साथ-साथ साफ-सुथरा और पौष्टिक भोजन मिल सके। लेकिन जब खाने की थाली में ही कीड़ा मिलने का दावा सामने आए, तो सवाल सिर्फ भोजन की गुणवत्ता का नहीं, बल्कि छात्रों की सेहत और हॉस्टल प्रबंधन की जिम्मेदारी का भी बन जाता है।
ऐसा ही मामला ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क-1 स्थित नालंदा लिविंग जीएन हॉस्टल से सामने आया है। यहां की मेस में परोसे जा रहे खाने में कीड़ा मिलने का छात्रों ने दावा किया। घटना के बाद छात्रों ने इसका वीडियो भी बनाया, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो सामने आने के बाद हॉस्टल की मेस में परोसे जा रहे भोजन की गुणवत्ता और रसोई की साफ-सफाई को लेकर सवाल उठने लगे। मामला खाद्य सुरक्षा विभाग तक पहुंचा, जिसके बाद विभाग की टीम ने हॉस्टल की रसोई का निरीक्षण किया। जांच में सफाई से जुड़ी कई खामियां मिलने के बाद विभाग ने कार्रवाई करते हुए हॉस्टल का खाद्य पंजीकरण निलंबित कर दिया और रसोई का संचालन बंद करा दिया।
खाने में कीड़ा मिलने का दावा, छात्रों ने सोशल मीडिया पर साझा किया वीडियो
छात्रों का आरोप है कि हॉस्टल की मेस में उन्हें जो भोजन परोसा जा रहा है, उसकी गुणवत्ता संतोषजनक नहीं है। उनका कहना है कि हॉस्टल में रहने और खाने के लिए वे हर महीने हजारों रुपये देते हैं। इसके बावजूद उन्हें ऐसा भोजन नहीं मिल पा रहा, जिसे साफ-सुथरा और अच्छी गुणवत्ता वाला कहा जा सके।
छात्रों के मुताबिक, खाने में कीड़ा मिलने की घटना ने उनकी नाराजगी और बढ़ा दी। उन्होंने भोजन में दिखाई दिए संदिग्ध तत्व का वीडियो बनाया और उसे सोशल मीडिया पर साझा कर दिया। देखते ही देखते यह वीडियो चर्चा में आ गया। इसके बाद मेस में तैयार होने वाले खाने की गुणवत्ता, रसोई की स्वच्छता और हॉस्टल प्रबंधन की व्यवस्था पर सवाल उठने लगे।
छात्रों ने अपनी शिकायतें हॉस्टल प्रबंधन के सामने भी रखीं। उनकी मांग है कि भोजन की व्यवस्था में सुधार किया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि मेस में परोसा जाने वाला खाना स्वच्छता के मानकों के अनुरूप हो।
खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच में रसोई की कई खामियां आईं सामने
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने और मामला सामने आने के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने नालंदा लिविंग जीएन हॉस्टल की रसोई का निरीक्षण किया। जांच के दौरान रसोई की साफ-सफाई से जुड़ी कई कमियां सामने आईं।
निरीक्षण में रसोई में लगी चिमनी काफी गंदी पाई गई। इसके अलावा कुछ टाइलें टूटी हुई मिलीं और कई स्थानों पर पानी जमा होने की समस्या भी सामने आई। रसोई की समग्र साफ-सफाई की व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं पाई गई।
ये कमियां इसलिए भी गंभीर हैं, क्योंकि इसी रसोई में छात्रों के लिए रोजाना भोजन तैयार किया जाता है। गंदगी, टूटी टाइलों और पानी जमा होने जैसी स्थितियां भोजन तैयार करने की स्वच्छता को प्रभावित कर सकती हैं। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, ऐसी परिस्थितियों में भोजन तैयार करना लोगों के स्वास्थ्य के लिहाज से उचित नहीं है। निरीक्षण में मिली कमियों के आधार पर हॉस्टल के खिलाफ कार्रवाई की गई।
खाद्य पंजीकरण निलंबित, रसोई का संचालन तत्काल बंद
खाद्य सुरक्षा विभाग ने कार्रवाई करते हुए नालंदा लिविंग जीएन हॉस्टल का खाद्य पंजीकरण कमियां दूर होने तक निलंबित कर दिया है। साथ ही निर्देश दिया गया है कि निलंबन की अवधि में हॉस्टल की रसोई का संचालन बंद रखा जाए।
विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समय में रसोई की कमियों को दूर नहीं किया गया, तो हॉस्टल का खाद्य पंजीकरण रद्द करने की कार्रवाई भी की जा सकती है। यानी फिलहाल हॉस्टल प्रबंधन को रसोई की व्यवस्था सुधारने और स्वच्छता से जुड़ी खामियों को दूर करने की जरूरत है।
सोया चाप की सब्जी का नमूना प्रयोगशाला भेजा गया
इस मामले में विभाग ने केवल रसोई के निरीक्षण तक कार्रवाई सीमित नहीं रखी। तैयार भोजन की गुणवत्ता की जांच के लिए सोया चाप की सब्जी का नमूना भी लिया गया है। इस नमूने को प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा गया है। इसकी रिपोर्ट आने के बाद भोजन की गुणवत्ता से जुड़ी स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
फिलहाल छात्रों की ओर से खाने में कीड़ा मिलने का दावा सामने आया है, जबकि प्रयोगशाला की रिपोर्ट का इंतजार है। इसलिए भोजन की गुणवत्ता को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट के आधार पर ही निकाला जा सकेगा।
छात्रों की मांग- मेस में मिले साफ और गुणवत्तापूर्ण भोजन
छात्रों का कहना है कि हॉस्टल में रहने वाले लोगों के लिए भोजन कोई अतिरिक्त सुविधा नहीं, बल्कि रोजमर्रा की बुनियादी जरूरत है। वे हर महीने इसके लिए पैसे देते हैं, ऐसे में उन्हें स्वच्छ और अच्छी गुणवत्ता वाला खाना मिलना चाहिए। छात्रों ने मेस में नियमित साफ-सफाई, भोजन की गुणवत्ता की समय-समय पर जांच और रसोई की व्यवस्था में सुधार की मांग की है।
अब इस पूरे मामले में दो अहम सवाल हैं। पहला, हॉस्टल प्रबंधन रसोई में मिली कमियों को कितनी जल्दी दूर करता है? दूसरा, प्रयोगशाला जांच में सोया चाप की सब्जी के नमूने की रिपोर्ट क्या सामने आती है?
खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई के बाद अब छात्रों को उम्मीद है कि मेस की व्यवस्था में सुधार होगा और उन्हें सुरक्षित भोजन मिल सकेगा। फिलहाल विभाग की जांच और प्रयोगशाला रिपोर्ट पर आगे की कार्रवाई निर्भर करेगी।
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