नोएडा प्राधिकरण की 224वीं बोर्ड बैठक सेक्टर-96 स्थित प्रशासनिक कार्यालय में शुरू हो गई है। अपर मुख्य सचिव एवं औद्योगिक विकास आयुक्त दीपक कुमार की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में शहर के विकास और नियोजन से जुड़े करीब दो दर्जन प्रस्तावों पर चर्चा हो रही है। सिटी लॉजिस्टिक प्लान, मॉडल भवन विनियम, लेफ्ट ओवर लैंड पॉलिसी, 15 मेगावाट सोलर प्लांट और संशोधित यूनिफाइड पॉलिसी प्रमुख एजेंडों में शामिल हैं। बैठक के अंतिम फैसलों का इंतजार है।
नोएडा में शहर के विकास, जमीन के इस्तेमाल और भविष्य की बुनियादी सुविधाओं को लेकर बुधवार को एक अहम बैठक शुरू हुई। नोएडा प्राधिकरण की 224वीं बोर्ड बैठक में ऐसे कई प्रस्ताव रखे गए हैं, जिनका असर आने वाले समय में शहर की नियोजन व्यवस्था, औद्योगिक गतिविधियों और विकास संबंधी प्रक्रियाओं पर पड़ सकता है।
सेक्टर-96 स्थित नोएडा प्राधिकरण के प्रशासनिक कार्यालय में चल रही इस बैठक पर आवंटियों, उद्यमियों और शहर के विकास से जुड़े लोगों की नजर है। वजह भी साफ है—बैठक के एजेंडे में केवल नियमित प्रशासनिक मामले ही नहीं, बल्कि सिटी लॉजिस्टिक प्लान, मॉडल भवन विनियम, लेफ्ट ओवर लैंड पॉलिसी और सौर ऊर्जा परियोजना जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं।
हालांकि, इन प्रस्तावों पर चर्चा होना और उन्हें अंतिम मंजूरी मिलना अलग-अलग बातें हैं। खबर लिखे जाने तक बैठक जारी थी और प्रस्तावों पर अंतिम निर्णयों की आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी था।
सिटी लॉजिस्टिक प्लान से क्या बदल सकता है?
नोएडा में औद्योगिक इकाइयों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और लगातार बढ़ती शहरी गतिविधियों के बीच सामान की आवाजाही महत्वपूर्ण विषय है। ऐसे में सिटी लॉजिस्टिक प्लान से संबंधित प्रस्ताव को बैठक के प्रमुख एजेंडों में शामिल किया गया है।
लॉजिस्टिक व्यवस्था का उद्देश्य आम तौर पर माल परिवहन, भंडारण और वितरण से जुड़ी गतिविधियों को बेहतर ढंग से व्यवस्थित करना होता है। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो इसके प्रावधानों के आधार पर शहर में माल ढुलाई और संबंधित सुविधाओं की योजना को दिशा मिल सकती है।
हालांकि, नोएडा के लिए प्रस्तावित योजना में कौन-कौन से क्षेत्र शामिल होंगे, मालवाहक वाहनों की आवाजाही को लेकर क्या प्रावधान होंगे और इसे किस समयसीमा में लागू किया जाएगा, यह आधिकारिक निर्णय और विस्तृत योजना सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा।
मॉडल भवन विनियम पर भी निगाहें
बोर्ड बैठक के एजेंडे में मॉडल भवन विनियम से जुड़ा प्रस्ताव भी शामिल है। भवन विनियम किसी शहर में निर्माण और भवन नियोजन से संबंधित महत्वपूर्ण नियमों का आधार होते हैं।
ऐसे नियमों में निर्माण संबंधी मानकों, भवनों के नियोजन और लागू विकास प्रावधानों से जुड़े विषय शामिल हो सकते हैं। इसलिए इस प्रस्ताव पर होने वाला फैसला बिल्डरों, औद्योगिक इकाइयों, संपत्ति आवंटियों और अन्य संबंधित पक्षों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।
लेकिन अभी यह स्पष्ट नहीं है कि प्रस्तावित मॉडल भवन विनियम में कौन-से विशिष्ट बदलाव किए जाने हैं। इसलिए इसे नई निर्माण अनुमति या नियमों में तत्काल बदलाव के रूप में देखना उचित नहीं होगा। अंतिम स्थिति बोर्ड के निर्णय और प्राधिकरण की ओर से जारी आधिकारिक विवरण से स्पष्ट होगी।
लेफ्ट ओवर लैंड पॉलिसी पर क्या होगा फैसला?
बैठक में लेफ्ट ओवर लैंड पॉलिसी से संबंधित प्रस्ताव भी रखा गया है। जमीन के उपयोग और आवंटन से जुड़े मामलों में यह विषय महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस प्रस्ताव में किन परिस्थितियों में बची हुई या संबंधित श्रेणी की भूमि के निस्तारण की व्यवस्था होगी, कौन पात्र होगा और किन शर्तों पर प्रक्रिया आगे बढ़ेगी—इन सवालों के जवाब विस्तृत नीति के प्रावधानों पर निर्भर करेंगे।
फिलहाल, बैठक के एजेंडे में इसका शामिल होना महत्वपूर्ण है, लेकिन किसी नई व्यवस्था या आवंटियों को मिलने वाले संभावित लाभ के बारे में अंतिम दस्तावेज सामने आने से पहले निश्चित दावा नहीं किया जा सकता।
15 मेगावाट सोलर प्लांट पर भी चर्चा
ऊर्जा जरूरतों और स्वच्छ ऊर्जा के इस्तेमाल को ध्यान में रखते हुए 15 मेगावाट क्षमता के सोलर प्लांट का प्रस्ताव भी बैठक में शामिल है।
यदि इस परियोजना को मंजूरी मिलती है, तो इसके क्रियान्वयन से जुड़े स्थान, लागत, वित्तीय व्यवस्था और समयसीमा जैसे पहलुओं पर आगे की जानकारी महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल, उपलब्ध विवरण में प्रस्ताव की चर्चा की जानकारी है, लेकिन परियोजना को अंतिम स्वीकृति मिलने की पुष्टि नहीं हुई है।
इसके अलावा संशोधित यूनिफाइड पॉलिसी पर भी विचार किया जाना है। इस प्रस्ताव के विस्तृत प्रावधान सामने आने के बाद ही इसके संभावित प्रभावों का आकलन किया जा सकेगा।
कई वरिष्ठ अधिकारी बैठक में मौजूद
224वीं बोर्ड बैठक की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव एवं औद्योगिक विकास आयुक्त दीपक कुमार कर रहे हैं। बैठक में नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी कृष्ण करुणेश, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ एनजी रवि कुमार और यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के सीईओ राकेश कुमार सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद हैं।
इसके अलावा अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी वंदना त्रिपाठी और पुष्पराज सिंह, ओएसडी क्रांति शेखर, महाप्रबंधक सिविल एसपी सिंह, महाप्रबंधक ए.के. अरोड़ा और महाप्रबंधक जल एवं विद्युत यांत्रिकी आर.पी. सिंह समेत अन्य अधिकारी भी बैठक में शामिल हैं।
अब किन फैसलों का इंतजार?
करीब दो दर्जन एजेंडों वाली इस बैठक में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि किन प्रस्तावों को मंजूरी मिलती है और किन मामलों में अतिरिक्त अध्ययन या आगे की कार्रवाई की जरूरत बताई जाती है।
सिटी लॉजिस्टिक प्लान, मॉडल भवन विनियम, लेफ्ट ओवर लैंड पॉलिसी, सोलर प्लांट और संशोधित यूनिफाइड पॉलिसी से जुड़े अंतिम निर्णय नोएडा के विकास की आगामी दिशा को समझने में अहम होंगे।
फिलहाल, बैठक जारी रहने के कारण किसी भी प्रस्ताव को मंजूर मानना जल्दबाजी होगी। शहर के आवंटियों, उद्यमियों और आम लोगों को अब प्राधिकरण की आधिकारिक घोषणा का इंतजार है, जिससे साफ हो सकेगा कि प्रस्तावित योजनाओं में से कौन-सी आगे बढ़ेंगी और उनका क्रियान्वयन किस तरह किया जाएगा।
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