उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने दीनदयाल उपाध्याय राज्य ग्राम्य विकास संस्थान को हर महीने एक लाख लोगों को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य तय करने के निर्देश दिए। समीक्षा बैठक में प्रशिक्षण की गुणवत्ता, सुविधाओं और कार्यदक्षता बढ़ाने पर जोर दिया गया।
उत्तर प्रदेश में ग्रामीण विकास योजनाओं को जमीन पर उतारने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों और जनप्रतिनिधियों की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए सरकार ने प्रशिक्षण व्यवस्था को बड़े स्तर पर विस्तार देने की तैयारी की है। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने दीनदयाल उपाध्याय राज्य ग्राम्य विकास संस्थान की समीक्षा करते हुए हर महीने एक लाख लोगों को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य निर्धारित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशिक्षण केवल आंकड़ों और औपचारिकताओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसका असर सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और आम लोगों को मिलने वाली सेवाओं में भी दिखाई देना चाहिए।
अब सवाल यह है कि इतने बड़े लक्ष्य को हासिल करने के लिए संस्थान की मौजूदा व्यवस्था कितनी तैयार है और प्रशिक्षण की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए किन बदलावों पर जोर दिया जा रहा है?
प्रशिक्षण की संख्या के साथ गुणवत्ता पर भी नजर
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिला स्तर से लेकर संस्थान के मुख्यालय तक नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। इसके लिए संस्थान की उपलब्ध क्षमता और संसाधनों को ध्यान में रखते हुए मासिक प्रशिक्षण रोस्टर तैयार करने को कहा गया है। अधिकारियों को अलग-अलग स्तरों पर समन्वय बनाकर काम करना होगा, ताकि निर्धारित लक्ष्य को समय पर पूरा किया जा सके।
समीक्षा बैठक में अप्रैल से सितंबर 2026 तक आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रमों की प्रगति, गुणवत्ता और कार्यदक्षता पर चर्चा हुई। मौर्य ने कहा कि प्रशिक्षण की विषयवस्तु और उपयोगिता में लगातार सुधार किया जाना चाहिए। प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के कामकाज में इसका प्रभाव दिखना जरूरी है।
उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि प्रशिक्षणार्थियों को आवास, भोजन, शिक्षण सामग्री और अन्य जरूरी सुविधाएं समय पर उपलब्ध कराई जाएं। प्रशिक्षकों और शिक्षकों के मानदेय का भुगतान निर्धारित समय के भीतर सुनिश्चित किया जाए। प्रशिक्षण से जुड़ी व्यवस्थाओं में अनावश्यक देरी न हो और कार्यक्रमों की नियमित निगरानी की जाए।
छह महीने में प्रशिक्षण का कितना काम हुआ?
दीनदयाल उपाध्याय राज्य ग्राम्य विकास संस्थान के महानिदेशक सौरव बाबू ने समीक्षा के दौरान संस्थान की गतिविधियों और प्रशिक्षण से जुड़े आंकड़े प्रस्तुत किए। उनके मुताबिक, संस्थान के अंतर्गत 17 मंडल स्तरीय क्षेत्रीय ग्राम्य विकास संस्थान और 33 जनपद स्तरीय जिला ग्राम्य विकास संस्थान संचालित हैं।
इन संस्थानों का उद्देश्य आधारभूत और सेवाकालीन प्रशिक्षण के माध्यम से मानव संसाधन का कौशल विकास करना तथा ग्रामीण विकास और स्थानीय स्वशासन से जुड़े कार्मिकों की क्षमता बढ़ाना है।

वित्तीय वर्ष 2026-27 में 1 अप्रैल से 30 सितंबर 2026 तक राज्य ग्राम्य विकास संस्थान में कुल 138 प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए गए। इनमें 5,032 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। वहीं, जिला ग्राम्य विकास संस्थानों में 1,15,971 प्रतिभागियों की प्रशिक्षण प्रगति दर्ज की गई।
नवनियुक्त खंड विकास अधिकारियों के लिए आयोजित 30 दिवसीय आधारभूत प्रशिक्षण कार्यक्रम के एक सत्र में 57 अधिकारियों ने भाग लिया। इसके अलावा विकसित भारत जी राम जी अधिनियम, 2025 से संबंधित 44 प्रशिक्षण सत्रों के माध्यम से 990 अधिकारियों को प्रशिक्षित किया गया।
शिक्षकों से लेकर स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं तक पहुंचा प्रशिक्षण
प्रशिक्षण कार्यक्रमों का दायरा ग्रामीण विकास विभाग तक ही सीमित नहीं रहा। उत्तर प्रदेश समग्र शिक्षा विभाग के लर्निंग बाई डूइंग और आईसीटी से संबंधित 24 प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से 1,172 अध्यापकों को प्रशिक्षण दिया गया।
जनगणना-2027 के द्वितीय चरण की तैयारियों के तहत आठ सत्रों में 332 मास्टर ट्रेनर्स को प्रशिक्षित किया गया। वहीं, स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के लिए आयोजित 3,334 प्रशिक्षण कार्यक्रमों में 1,03,905 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। ये आंकड़े बताते हैं कि प्रशिक्षण गतिविधियों में महिला समूहों की भागीदारी भी महत्वपूर्ण रही है।
डिजिटल प्रशिक्षण को लेकर भी संस्थान में गतिविधियां दर्ज की गईं। मिशन कर्मयोगी के तहत संस्थान और उसके अधीनस्थ संस्थानों के लगभग 602 पंजीकृत अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने कुल 28,955 ऑनलाइन पाठ्यक्रम सफलतापूर्वक पूरे किए।
अब प्रशिक्षण का असर जमीन पर दिखाने की चुनौती
केशव प्रसाद मौर्य ने अधिकारियों से कहा कि मासिक एक लाख प्रशिक्षण का लक्ष्य हासिल करने के लिए मुख्यालय, क्षेत्रीय संस्थानों और जिला स्तर पर बेहतर तालमेल बनाया जाए। साथ ही प्रशिक्षण में भाग लेने वालों से फीडबैक लेकर व्यवस्थाओं में सुधार किया जाए, ताकि कार्यक्रम उनकी वास्तविक जरूरतों के अनुरूप बन सकें।
ग्रामीण विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में प्रशिक्षित कर्मचारियों और अधिकारियों की भूमिका अहम होती है। ऐसे में प्रशिक्षण की संख्या बढ़ाने के साथ यह देखना भी जरूरी होगा कि इससे कामकाज की गति, योजनाओं की निगरानी और आम नागरिकों को मिलने वाली सेवाओं में कितना सुधार आता है।
फिलहाल उप मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद संस्थान के सामने प्रशिक्षण की पहुंच बढ़ाने के साथ उसकी गुणवत्ता बनाए रखने की जिम्मेदारी भी है। अब इस पहल की सफलता का आकलन केवल इस आधार पर नहीं होगा कि कितने लोगों ने प्रशिक्षण लिया, बल्कि इस बात से भी होगा कि प्रशिक्षण के बाद उनके कामकाज में कितना व्यावहारिक बदलाव आया।
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