उत्तर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने बिजली कनेक्शन के नाम पर कथित रिश्वत मांगने की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच के निर्देश दिए हैं। लखनऊ निवासी अभिनव त्रिपाठी का आरोप है कि 3 किलोवाट के घरेलू कनेक्शन के लिए ₹11,622 जमा करने के बावजूद उन्हें कनेक्शन नहीं मिला और बाद में ₹50 हजार रिश्वत मांगने के साथ ₹2.24 लाख का नया एस्टीमेट जारी किया गया। मंत्री ने कहा कि आरोप सही पाए जाने पर संबंधित अधिकारी को तत्काल निलंबित किया जाए।
बिजली का घरेलू कनेक्शन पाने के लिए आवेदन किया, विभाग की ओर से जारी एस्टीमेट के अनुसार रकम भी जमा कर दी, लेकिन इसके बावजूद कनेक्शन नहीं मिला। इसके बाद उपभोक्ता को कथित तौर पर रिश्वत मांगने और पहले से कहीं अधिक रकम का नया एस्टीमेट जारी होने की शिकायत करनी पड़ी।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सामने आए इस मामले को नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री श्री ए.के. शर्मा ने गंभीरता से लिया है। उन्होंने अधिकारियों को तत्काल जांच कराने और आरोप सही पाए जाने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
मंत्री ने 29 अक्टूबर को अपने आवास पर आयोजित जनसुनवाई के दौरान प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों से आए लोगों की समस्याएं सुनीं। इस दौरान पेयजल, अतिक्रमण, बिजली कनेक्शन, विद्युत बिल में सुधार और नए बिजली सबस्टेशन की स्थापना सहित नगर विकास एवं ऊर्जा विभाग से जुड़ी कई समस्याएं सामने आईं। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि आम जनता की शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।
₹11,622 जमा करने के बाद भी नहीं मिला कनेक्शन
जनसुनवाई में लखनऊ निवासी विद्युत उपभोक्ता अभिनव त्रिपाठी ने अपने घरेलू बिजली कनेक्शन से जुड़ी शिकायत रखी। उनके अनुसार, उन्होंने फरवरी 2026 में 3 किलोवाट के घरेलू विद्युत कनेक्शन के लिए आवेदन किया था।
शिकायत के मुताबिक, विभाग ने 1 मार्च 2026 को कनेक्शन के लिए ₹11,622 का एस्टीमेट जारी किया था। अभिनव त्रिपाठी का कहना है कि उन्होंने निर्धारित रकम जमा भी कर दी, लेकिन इसके बाद भी उन्हें बिजली कनेक्शन उपलब्ध नहीं कराया गया।

उपभोक्ता का आरोप है कि भुगतान करने के बावजूद कनेक्शन नहीं मिलने से उनकी परेशानी बढ़ती गई। इसके बाद मामले में एक और गंभीर आरोप सामने आया, जिसने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
₹50 हजार रिश्वत मांगने का आरोप
अभिनव त्रिपाठी ने जनसुनवाई में आरोप लगाया कि संबंधित सहायक अभियंता शुभम सिंह ने बिजली कनेक्शन देने के एवज में उनसे ₹50,000 की रिश्वत मांगी। शिकायतकर्ता के अनुसार, जब उन्होंने कथित तौर पर रिश्वत देने से इनकार किया, तो 12 अक्टूबर 2026 को लगभग ₹2.24 लाख का नया एस्टीमेट जारी कर दिया गया।
इस तरह शिकायत में पहले जारी ₹11,622 के एस्टीमेट के भुगतान, कनेक्शन नहीं मिलने, कथित रिश्वत मांगने और बाद में अधिक रकम का नया एस्टीमेट जारी होने के घटनाक्रम का उल्लेख किया गया है।
हालांकि, रिश्वत मांगने और नए एस्टीमेट से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। मामले में संबंधित विभाग की जांच और उसके निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे।
ऊर्जा मंत्री ने दिए तत्काल जांच के निर्देश
उपभोक्ता की शिकायत सुनने के बाद ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने मामले को गंभीरता से लिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को तत्काल जांच कराने के निर्देश दिए और स्पष्ट किया कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की निष्पक्षता से जांच होनी चाहिए।
मंत्री ने कहा कि यदि संबंधित अधिकारी जांच में दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ तत्काल निलंबन की कार्रवाई की जाए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आम उपभोक्ताओं को परेशान करना, उन पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डालना और सरकारी सेवाओं के बदले रिश्वत मांगने जैसी शिकायतों को किसी भी स्थिति में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
यह निर्देश ऐसे समय में सामने आया है, जब शिकायतकर्ता ने कनेक्शन के लिए निर्धारित रकम जमा करने के बाद भी सेवा नहीं मिलने और अतिरिक्त भुगतान की मांग से जुड़ी परेशानी उठाई है।

जनता का उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं, शिकायतों का समय पर हो निस्तारण
जनसुनवाई के दौरान ऊर्जा मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बिजली कनेक्शन से संबंधित सभी मामलों में निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं का पालन किया जाए। किसी उपभोक्ता को बिना उचित कारण परेशान करना या उसके काम को जानबूझकर लंबित रखना गंभीर लापरवाही है।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक शिकायत की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि जनता को सरकारी सेवाएं पारदर्शी, जवाबदेह और संवेदनशील प्रशासन के माध्यम से मिलें।
जनसुनवाई में बिजली कनेक्शन और बिल सुधार के अलावा पेयजल, अतिक्रमण तथा नए विद्युत सबस्टेशन की स्थापना से जुड़ी समस्याएं भी सामने आईं। मंत्री ने इन सभी मामलों में शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
अब जांच के नतीजों पर रहेगी नजर
लखनऊ के इस मामले में फिलहाल सबसे अहम सवाल यह है कि उपभोक्ता के आरोपों की जांच में क्या सामने आता है। क्या पहले जारी एस्टीमेट के भुगतान के बावजूद कनेक्शन नहीं देने और बाद में अधिक रकम का एस्टीमेट जारी करने के पीछे कोई उचित विभागीय कारण था, और क्या कथित रिश्वत मांगने के आरोप की पुष्टि होती है—इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही मिल सकेगा।
ऊर्जा मंत्री ने स्पष्ट किया है कि आरोप सही पाए जाने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की जाए। अब शिकायतकर्ता को राहत दिलाने के साथ-साथ मामले में जिम्मेदारी तय करना विभाग के लिए अहम होगा।
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