लखनऊ में आयोजित ‘दुग्ध स्वर्ण महोत्सव 2026’ में 5,000 करोड़ के निवेश प्रस्ताव, 60,000 रोजगार और डेयरी सेक्टर को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की रणनीति पर जोर दिया गया। लखनऊ, 17 अप्रैल 2026:
उत्तर प्रदेश के दुग्धशाला विकास विभाग की स्थापना के 50 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान, गोमती नगर स्थित मार्स सभागार में दो दिवसीय “दुग्ध स्वर्ण महोत्सव 2026” का भव्य शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर प्रदेश के पशुधन, दुग्ध विकास एवं राजनैतिक पेंशन मंत्री धर्मपाल सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि प्रदेश के डेयरी क्षेत्र के भविष्य की दिशा तय करने वाला मंच साबित हुआ, जहां निवेश, रोजगार, तकनीक और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सशक्तिकरण पर व्यापक चर्चा हुई।
5,000 करोड़ के निवेश प्रस्ताव, डेयरी सेक्टर में बड़ा उछाल
महोत्सव के दौरान सिंगल विंडो सिस्टम के माध्यम से लगभग 5,000 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों पर सहमति (एमओयू) बनी। इसके अतिरिक्त 3,000 करोड़ रुपये से अधिक के 59 नए एमओयू भी विभिन्न निजी डेयरी कंपनियों—जैसे आनन्दा, ज्ञान, परम डेयरी आदि—के साथ किए गए।
इन समझौतों के जरिए 13,000 से अधिक नए रोजगार सृजित होने की संभावना जताई गई है। अब तक दुग्ध विकास विभाग द्वारा कुल 25,000 करोड़ रुपये से अधिक के 796 एमओयू किए जा चुके हैं, जिनसे 60,000 से अधिक रोजगार के अवसर उत्पन्न होंगे।

डेयरी सेक्टर: ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़
धर्मपाल सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि डेयरी क्षेत्र उत्तर प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। यह न केवल किसानों और पशुपालकों की आय बढ़ाने में मदद करता है, बल्कि राज्य के सकल मूल्यवर्धन (GVA) में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है।
उन्होंने बताया कि राज्य के GVA में डेयरी क्षेत्र का योगदान 1.72 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है, जो इसकी आर्थिक ताकत को दर्शाता है।
उत्पादन में ऐतिहासिक वृद्धि
प्रदेश ने दूध उत्पादन के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है।
- वर्ष 2016-17 में दूध उत्पादन: 277.70 लाख मीट्रिक टन
- वर्ष 2025-26 में दूध उत्पादन: 1836.85 लाख मीट्रिक टन
वहीं प्रति व्यक्ति दूध उपलब्धता 352 ग्राम प्रतिदिन से बढ़कर 450 ग्राम प्रतिदिन हो गई है।
यह वृद्धि राज्य सरकार की योजनाओं और किसानों के प्रयासों का संयुक्त परिणाम है।

नंद बाबा दुग्ध मिशन: किसानों के लिए बड़ा सहारा
नंद बाबा दुग्ध मिशन के तहत अब तक 10,000 से अधिक लाभार्थियों को 84 करोड़ रुपये की सब्सिडी डीबीटी के माध्यम से प्रदान की गई है।
इसके साथ ही:
- 4,000 से अधिक दुग्ध सहकारी समितियां गठित
- 1.5 लाख से अधिक दुग्ध उत्पादकों को जोड़ा गया
यह मिशन किसानों को स्थायी आय और बाजार उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
वन ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी में डेयरी की भूमिका
कार्यक्रम में यह भी स्पष्ट किया गया कि उत्तर प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य में डेयरी क्षेत्र की अहम भूमिका होगी।
सरकार किसानों की आय दोगुनी करने, पशुपालकों को आत्मनिर्भर बनाने और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

बड़े ब्रांड्स और नई तकनीकों का प्रदर्शन
महोत्सव में देश की प्रमुख डेयरी कंपनियों—पारस, ज्ञान, शुद्ध, नमस्ते इंडिया, मधुसूदन, अमूल आदि—ने अपने स्टॉल लगाए और नवीनतम उत्पादों का प्रदर्शन किया।
कुछ कंपनियों ने नए उत्पाद भी लॉन्च किए, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि डेयरी सेक्टर तेजी से आधुनिक और प्रतिस्पर्धी बन रहा है।
इसके अलावा, कैटल फीड और डेयरी टेक्नोलॉजी से जुड़े स्टार्टअप्स और संस्थानों ने भी अपने नवाचार प्रस्तुत किए।
10,000 से अधिक प्रतिभागी, वैश्विक जुड़ाव
महोत्सव में लगभग 10,000 पशुपालकों, निवेशकों और उद्यमियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम को वेबकास्ट और यूट्यूब के माध्यम से देश-विदेश के लाखों लोगों तक पहुंचाया गया।
विशेषज्ञों ने स्वदेशी नस्ल के संरक्षण, आधुनिक तकनीक, और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर महत्वपूर्ण विचार साझा किए।

विशेषज्ञों और अधिकारियों के विचार
अपर मुख्य सचिव मुकेश कुमार मेश्राम ने योजनाओं के बहुआयामी लाभों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इनसे पशुपालकों के जीवन स्तर में बड़ा बदलाव आया है।
मुख्यमंत्री के आर्थिक सलाहकार के.वी. राजू ने बताया कि राज्य दूध और दुग्ध उत्पादों के निर्यात को भी बढ़ावा दे रहा है।
दुग्ध आयुक्त धनलक्ष्मी के. ने कहा कि राज्य सरकार किसानों को पारदर्शी मूल्य और सुनिश्चित बाजार उपलब्ध करा रही है, जिससे डेयरी सेक्टर को मजबूत आधार मिला है।
उत्कृष्ट पशुपालकों और उद्यमियों का सम्मान
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न योजनाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले पशुपालकों और उद्यमियों को सम्मानित किया गया।
साथ ही 139 लाभार्थियों को वर्ष 2024-25 के नंद बाबा पुरस्कार की राशि डीबीटी के माध्यम से प्रदान की गई।

“गौ से ग्राहक” तक की मजबूत व्यवस्था
दुग्ध नीति-2022 के तहत “गौ से ग्राहक” तक की पूरी आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत किया जा रहा है।
इसका उद्देश्य है:
- गुणवत्ता युक्त दूध उत्पादन
- उपभोक्ताओं को सुरक्षित उत्पाद
- किसानों को बेहतर मूल्य
“दुग्ध स्वर्ण महोत्सव 2026” केवल अतीत की उपलब्धियों का जश्न नहीं, बल्कि भविष्य की रणनीति का संकेत भी है।
निवेश, तकनीक, रोजगार और किसानों की आय बढ़ाने के प्रयासों के साथ उत्तर प्रदेश का डेयरी सेक्टर एक नई ऊंचाई की ओर बढ़ रहा है—जहां दूध केवल पोषण नहीं, बल्कि आर्थिक समृद्धि का आधार बन रहा है।
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