उत्तर प्रदेश की कृषि मंडियों को अधिक पारदर्शी और किसान केंद्रित बनाने के उद्देश्य से नवनियुक्त मंडी सचिवों का 45 दिवसीय प्रशिक्षण लखनऊ के आईआईसीएमआरटी में शुरू हुआ। प्रशिक्षण में मंडी अधिनियम, वित्तीय प्रबंधन, ई-नाम और डिजिटल विपणन के साथ देश की प्रमुख मंडियों का अध्ययन भी शामिल है।
उत्तर प्रदेश की कृषि मंडियों में प्रबंधन व्यवस्था को आधुनिक और पारदर्शी बनाने की दिशा में नवनियुक्त मंडी सचिवों का 45 दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम सोमवार को शुरू हुआ। राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद की ओर से लखनऊ स्थित आईआईसीएमआरटी में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया।
इस नए कैडर की खास बात यह है कि इसमें अलग-अलग विभागों में काम करने का अनुभव रखने वाले अधिकारियों के साथ विभिन्न शैक्षणिक पृष्ठभूमि के युवा भी शामिल हैं। अब इन अधिकारियों को मंडियों की कार्यप्रणाली, किसानों की जरूरतों और आधुनिक कृषि विपणन व्यवस्था की बारीकियां सिखाई जाएंगी।
प्रमुख सचिव कृषि डॉ. एम.के.एस. सुंदरम ने कहा कि प्रदेश सरकार कृषि विपणन व्यवस्था को अधिक प्रभावी और किसान हितैषी बनाने के लिए लगातार सुधार कर रही है। उन्होंने मंडी सचिवों से पारदर्शिता, जवाबदेही और किसान हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आह्वान किया।
59 मंडी सचिवों के पास पहले से सेवा का अनुभव
विभागीय आंकड़ों के अनुसार, कार्यभार ग्रहण कर चुके 116 नवनियुक्त मंडी सचिवों में से 59 यानी लगभग 51 प्रतिशत को पहले से सेवा का अनुभव है।

इनमें 23 अधिकारी राजस्व विभाग में काम कर चुके हैं। वित्त, लेखा, कर एवं सहकारिता क्षेत्र से सात, पंचायती राज विभाग और जिला न्यायालय से छह-छह, रक्षा सेवाओं से पांच, रेलवे और पुलिस से तीन-तीन तथा बैंकिंग और वन विभाग से दो-दो अधिकारी शामिल हैं। शेष दो अधिकारी अन्य विभागों से जुड़े रहे हैं।
मंडी परिषद के निदेशक जितेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि नए कैडर में विविध शैक्षणिक योग्यता और पूर्व सेवा का अनुभव रखने वाले अभ्यर्थी शामिल हैं। प्रशिक्षण का उद्देश्य उनकी दक्षता को मंडी प्रबंधन की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करना है।
126 चयनितों में 84 विज्ञान स्नातक
नवनियुक्त मंडी सचिवों की शैक्षणिक पृष्ठभूमि भी विविध है। कुल 126 चयनित अभ्यर्थियों में 84 विज्ञान स्नातक हैं, जबकि 42 ने अन्य विषयों से स्नातक किया है।
इनमें परास्नातक, बीएड, डीएलएड और अन्य अतिरिक्त योग्यताएं रखने वाले अभ्यर्थी भी शामिल हैं। कुछ चयनितों के पास रिमोट सेंसिंग एवं जीआईएस में पीजी डिप्लोमा तथा सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा जैसी तकनीकी योग्यताएं भी हैं। विभाग के मुताबिक, अब तक 116 अभ्यर्थी मंडी सचिव के पद पर कार्यभार ग्रहण कर चुके हैं।
ई-नाम, वित्तीय प्रबंधन और मंडी अधिनियम की मिलेगी जानकारी
भारत सरकार के विपणन एवं निरीक्षण निदेशालय (DMI) के विशेषज्ञों के सहयोग से आयोजित प्रशिक्षण में मंडी अधिनियम, वित्तीय प्रबंधन, ई-नाम और अन्य डिजिटल व्यवस्थाओं की जानकारी दी जाएगी।

प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को कृषि उपज की आवक, नीलामी, मूल्य निर्धारण, ग्रेडिंग, भंडारण और परिवहन की प्रक्रियाओं को समझने का अवसर मिलेगा। किसानों और व्यापारियों को उपलब्ध सुविधाओं तथा डिजिटल विपणन प्रणालियों पर भी ध्यान दिया जाएगा। केस स्टडी और व्यावहारिक कार्ययोजनाएं प्रशिक्षण का हिस्सा होंगी।
इसके अलावा नवनियुक्त सचिव देश के विभिन्न राज्यों की प्रमुख मंडियों और आधुनिक कृषि विपणन केंद्रों का अध्ययन भ्रमण करेंगे। इसका उद्देश्य अलग-अलग राज्यों की कार्यप्रणाली से सीख लेकर उत्तर प्रदेश की मंडियों में उपयोगी व्यवस्थाओं को बेहतर तरीके से अपनाना है।
भर्ती प्रक्रिया में बदलाव का भी उल्लेख
कार्यक्रम में भर्ती व्यवस्था में हुए बदलावों की जानकारी भी दी गई। विभागीय विवरण के अनुसार, पहले मंडी परिषद और मंडी समितियों में भर्ती परिषद स्तर पर सेवा विनियमावली के तहत होती थी। वर्तमान में उच्च श्रेणी के मंडी सचिवों की भर्ती उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के माध्यम से होती है, जबकि इस बैच का चयन उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की प्रतिस्पर्धी परीक्षा से किया गया है।
किसानों को कितना मिलेगा लाभ?
प्रशिक्षण के बाद इन अधिकारियों की भूमिका मंडियों में पारदर्शिता, वित्तीय अनुशासन और डिजिटल प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण होगी। हालांकि, इसका वास्तविक असर इस बात से सामने आएगा कि प्रशिक्षण में मिली जानकारी को जमीन पर कितनी प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है।
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