मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर में 9,18,091 किसानों के लिए 493 करोड़ रुपये की सहायता जारी की। साथ ही 15 अक्टूबर से अतिवृष्टि प्रभावित जिलों में धान, ज्वार, बाजरा और मक्का की खरीद शुरू करने की घोषणा की।
उत्तर प्रदेश में बाढ़, अतिवृष्टि, ओलावृष्टि और चक्रवात से प्रभावित किसानों के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 493 करोड़ रुपये की सहायता राशि जारी की है। मुख्यमंत्री के मुताबिक, प्रदेश के 9,18,091 किसानों के खातों में यह रकम प्रत्यक्ष लाभ अंतरण यानी डीबीटी के माध्यम से भेजी गई है। इसके साथ ही सरकार ने 15 अक्टूबर से अतिवृष्टि प्रभावित जिलों में धान और मोटे अनाज की खरीद शुरू करने का ऐलान किया है।
गोरखपुर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले एक सप्ताह में प्रदेश के कई इलाकों में फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। कुछ स्थानों पर जनहानि और पशुहानि भी हुई है। सरकार के अनुसार, इस वर्ष बरसात के दौरान अब तक आपदा प्रभावित किसानों और नागरिकों को लगभग एक हजार करोड़ रुपये उपलब्ध कराए जा चुके हैं।
सपा सरकार पर निशाना, बिजली और मुआवजे का जिक्र
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वर्ष 2017 से पहले की समाजवादी पार्टी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा, “सपा सरकार में बिजली नहीं, बिल आता था, अब अन्नदाता किसान का बिल नहीं आता, बिजली आती है।”
उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकारों के दौरान किसानों को दो रुपये, चार रुपये या 15 रुपये जैसी छोटी रकम मुआवजे के रूप में मिलती थी। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि पहले सहायता राशि जरूरतमंदों तक पूरी तरह नहीं पहुंचती थी। उन्होंने विपक्ष पर जाति के नाम पर समाज को बांटने का आरोप लगाया। ये आरोप मुख्यमंत्री ने अपने राजनीतिक संबोधन के दौरान लगाए।

मुख्यमंत्री ने वर्ष 2014 के हुदहुद चक्रवात का जिक्र करते हुए दावा किया कि उस समय केंद्र से 3,200 करोड़ रुपये की सहायता भेजे जाने के बावजूद किसानों तक केवल 800 करोड़ रुपये पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री बनने के बाद इस मामले की जांच कराई गई और प्रभावित किसानों के लिए अलग से धनराशि की व्यवस्था की गई।
डिजिटल सर्वे से सहायता, मकान क्षति पर भी राहत
मुख्यमंत्री ने कहा कि डिजिटल क्रॉप सर्वे के आधार पर फसल नुकसान का आकलन किया जा रहा है। जिन जिलों की सर्वे रिपोर्ट सरकार को मिल चुकी है, वहां पात्र किसानों को सहायता उपलब्ध कराई गई है। उन्होंने कहा कि यदि किसी किसान के लिए 25 हजार रुपये की सहायता स्वीकृत होती है, तो पूरी राशि सीधे उसके बैंक खाते में पहुंचनी चाहिए।
मुख्यमंत्री के मुताबिक, आपदा प्रभावित किसानों को 8 से 10 दिनों में राहत देने की व्यवस्था की गई है। मकान पूरी तरह नष्ट होने पर मुख्यमंत्री आवास योजना के अंतर्गत आवास उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। मकान के लिए 1.20 लाख रुपये की अतिरिक्त सहायता फसल क्षति के 493 करोड़ रुपये से अलग है। आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त मकानों के लिए भी नियमानुसार मदद दी जाएगी।
जनहानि होने पर संबंधित परिवार को 24 घंटे के भीतर चार लाख रुपये की सहायता देने के निर्देश दिए गए हैं। पशुधन की क्षति पर भी सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था बताई गई।
15 अक्टूबर से धान, ज्वार, बाजरा और मक्का की खरीद
किसानों के लिए एक और अहम घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अतिवृष्टि से प्रभावित जिलों में 15 अक्टूबर से धान और मोटे अनाज के क्रय केंद्र शुरू किए जाएंगे। इनमें ज्वार, बाजरा और मक्का की खरीद भी शामिल होगी।

मुख्यमंत्री ने दावा किया कि किसान अपनी उपज मंडियों और क्रय केंद्रों पर बेच सकेंगे। उन्होंने कहा कि खरीद के लिए कोई सीमा तय नहीं की गई है और भुगतान सीधे बैंक खाते में भेजा जाएगा। अब किसानों के लिए महत्वपूर्ण होगा कि क्रय केंद्र समय पर शुरू हों, खरीद सुचारु रहे और भुगतान में देरी न हो।
कर्जमाफी, मुफ्त बिजली और आपदा से बचाव
मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा सरकार ने 86 लाख किसानों का 36 हजार करोड़ रुपये का कर्ज माफ किया है। उनके मुताबिक, प्रदेश के 16 लाख निजी ट्यूबवेलों की बिजली मुफ्त की गई है और 22 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि को सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।
उन्होंने अधिकारियों को बाढ़ से कटान रोकने, क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत और आवागमन बहाल करने के निर्देश दिए। आकाशीय बिजली से बचाव के लिए अर्ली वार्निंग सिस्टम, मोबाइल अलर्ट और रेन गेज का भी उल्लेख किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पात्र किसान, बटाईदार या उनके परिवार के सदस्यों को प्राकृतिक आपदा में मृत्यु होने पर मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना बीमा योजना के तहत पांच लाख रुपये की सहायता देने की व्यवस्था है।
कार्यक्रम में कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, सांसद रवि किशन शुक्ला, महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव और कई विधायक सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।
अब किसानों की निगाहें इस बात पर रहेंगी कि सहायता राशि समय पर पहुंचे और 15 अक्टूबर से खरीद केंद्र प्रभावी ढंग से काम करें। राहत की असली कसौटी किसानों को मिलने वाला उचित दाम, समय पर भुगतान और जमीन पर दिखाई देने वाला परिणाम होगा।
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