उत्तर प्रदेश के बागपत में 162 टायर वाला विशालकाय ट्रक चर्चा का विषय बन गया। न्यूक्लियर पावर प्लांट की टरबाइन लेकर हरिद्वार से रोहतक जा रहे इस ट्रक को मवीकलां स्थित ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस-वे के टोल बूथ पर रोक दिया गया। टोल प्रबंधन के मुताबिक, NHAI की गाइडलाइन के अनुसार जरूरी परमिट नहीं होने के कारण यह कार्रवाई की गई। ट्रक के साथ 15 लोगों का स्टाफ चल रहा था और देर रात तक कागजात पूरे करने के लिए अधिकारियों से बातचीत होती रही।
सड़क पर कभी-कभी ऐसे वाहन दिखाई देते हैं, जिन्हें देखकर लोग कुछ पल के लिए ठिठक जाते हैं। आकार इतना विशाल कि सामान्य ट्रकों के मुकाबले उनकी तुलना करना भी मुश्किल हो जाए। बागपत में ऐसा ही एक महाट्रक चर्चा में है, जिसके ऊपर न्यूक्लियर पावर प्लांट की टरबाइन लदी हुई है। इस ट्रक में कुल 162 टायर लगे हैं और इसके साथ 15 लोगों का स्टाफ भी चल रहा है।
लेकिन हरिद्वार से रोहतक की ओर निकले इस विशालकाय ट्रक का सफर बागपत में उस समय थम गया, जब उसे ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस-वे के मवीकलां टोल बूथ पर रोक दिया गया। वजह बताई गई—भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की गाइडलाइन के अनुसार आवश्यक परमिट का नहीं होना।
ट्रक रुकने के बाद उसके साथ चल रहे कर्मचारियों की अधिकारियों से बातचीत शुरू हुई। देर रात तक कागजात पूरे करने और आगे जाने की अनुमति को लेकर चर्चा जारी रही। इस बीच सड़क पर अन्य वाहन चालकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।
हरिद्वार से रोहतक जा रही थी न्यूक्लियर टरबाइन
मिली जानकारी के अनुसार, भारी-भरकम लोहे की टरबाइन को लेकर यह ट्रक हरिद्वार से रोहतक जा रहा था। ट्रक चालक राजपाल सिंह ने बताया कि वह दो दिन पहले टरबाइन लेकर रवाना हुए थे। बेहद कम गति से चलने के कारण दो दिनों में वाहन बागपत तक पहुंच पाया।
शुक्रवार दोपहर यह विशालकाय ट्रक दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर से होकर मवीकलां में दिल्ली हाईवे पर उतरा। इसके बाद चालक ट्रक को लेकर ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस-वे के टोल बूथ पर पहुंचा। यहां टोल स्टाफ ने वाहन को रोक दिया।
चालक के मुताबिक, वाहन को आगे ले जाने में परमिट से जुड़ी समस्या सामने आई। इसके बाद ट्रक के साथ चल रहे स्टाफ ने सड़क किनारे रुककर अधिकारियों से बातचीत शुरू की।
162 टायर और 15 लोगों का स्टाफ, धीमी रफ्तार से तय हो रहा था सफर
इस ट्रक की सबसे खास बात इसके 162 टायर हैं। इतनी बड़ी संख्या में टायरों का इस्तेमाल भारी-भरकम औद्योगिक उपकरण को ले जाने वाले विशेष परिवहन वाहन की विशाल संरचना को दर्शाता है।
ट्रक चालक राजपाल सिंह के अनुसार, टरबाइन लदे इस वाहन के साथ 15 लोगों का स्टाफ चल रहा है। इस तरह के भारी परिवहन में वाहन की गति, रास्ते की स्थिति और संचालन की सावधानियां महत्वपूर्ण होती हैं।

चालक ने बताया कि वाहन बहुत कम गति से चलता है, इसी वजह से हरिद्वार से बागपत तक पहुंचने में दो दिन लगे। हालांकि, ट्रक की निर्धारित गति, कुल वजन और परिवहन की तकनीकी व्यवस्था से संबंधित विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है।
विशाल आकार और धीमी गति के कारण ऐसे वाहनों को रास्ते में विशेष प्रबंधन की जरूरत पड़ सकती है। यही वजह है कि इनके लिए निर्धारित मार्ग, अनुमति और संबंधित प्राधिकरणों की शर्तों का पालन महत्वपूर्ण माना जाता है।
परमिट नहीं होने पर टोल बूथ पर रोका गया ट्रक
ट्रक को रोकने के पीछे मुख्य वजह परमिट से जुड़ी बताई गई है। टोल प्रबंधक शोएब खान ने बताया कि NHAI की गाइडलाइन के मुताबिक परमिट नहीं होने के कारण टरबाइन लदे वाहन को रोका गया है। वाहन के साथ चल रहे लोगों को कागजात पूरे करने के लिए कहा गया है।
यहां ध्यान देने वाली बात है कि किसी भारी वाहन का आकार बड़ा होना और उसका विशेष उपकरण लेकर चलना अपने आप में नियमों से छूट नहीं देता। निर्धारित मार्ग पर चलने के लिए लागू अनुमति और दस्तावेजों की शर्तें पूरी करना जरूरी होता है।
हालांकि, इस मामले में किस विशेष परमिट या दस्तावेज की कमी थी, इसकी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। इसलिए यह स्पष्ट होना बाकी है कि संबंधित अनुमति किस श्रेणी की थी और उसे पूरा करने के बाद वाहन को आगे बढ़ने की मंजूरी कब मिलती।
ट्रक रुकने से दूसरे वाहन चालकों को हुई परेशानी
विशालकाय ट्रक के रुकने का असर केवल उसके चालक और स्टाफ तक सीमित नहीं रहा। रिपोर्ट के अनुसार, ट्रक एक्सप्रेस-वे के किनारे देर रात तक खड़ा रहा, जिसके कारण दूसरे वाहन चालकों को भी परेशानी उठानी पड़ी।
ऐसे भारी वाहनों के लिए निर्धारित स्थान पर सुरक्षित पार्किंग और यातायात प्रबंधन बेहद महत्वपूर्ण होता है। यदि कोई बड़ा वाहन लंबे समय तक टोल बूथ या सड़क के आसपास रुका रहता है, तो वहां से गुजरने वाले वाहनों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है।
हालांकि, इस मामले में यातायात कितनी देर और किस हद तक प्रभावित हुआ, इससे संबंधित कोई विस्तृत आंकड़ा सामने नहीं आया है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, ट्रक के खड़े रहने से वाहन चालकों को असुविधा हुई।
अब आगे क्या होगा? कागजात पूरे होने के बाद ही रास्ता साफ होने की उम्मीद
मवीकलां टोल बूथ पर ट्रक रुकने के बाद उसके साथ चल रहे स्टाफ के लोग देर रात तक अधिकारियों से बातचीत में जुटे रहे। टोल प्रबंधन ने दस्तावेज पूरे करने के लिए कहा था।
अब आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि संबंधित परमिट और कागजात की समस्या किस तरह हल होती है तथा वाहन को निर्धारित नियमों के तहत आगे जाने की अनुमति कब मिलती है। इस संबंध में अंतिम मंजूरी या ट्रक के दोबारा रवाना होने की पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है।
बागपत में 162 टायर वाला यह महाट्रक अपने विशाल आकार के कारण लोगों का ध्यान खींच रहा है, लेकिन इस घटनाक्रम का महत्वपूर्ण पहलू परिवहन नियमों और सड़क पर यातायात व्यवस्था से जुड़ा है।
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