उत्तर प्रदेश में श्रमिकों की न्यूनतम मासिक मजदूरी में बढ़ोतरी की गई है। गौतम बुद्ध नगर और गाजियाबाद में अकुशल श्रमिकों को 193 रुपये, अर्द्धकुशल को 212 रुपये और कुशल श्रमिकों को 238 रुपये प्रतिमाह अधिक मिलेंगे। अन्य नगर निगम वाले जिलों और बाकी जिलों के लिए भी नई दरें निर्धारित की गई हैं। जानिए किस श्रेणी के श्रमिक की मजदूरी कितनी बढ़ी।
उत्तर प्रदेश में श्रमिकों की न्यूनतम मासिक मजदूरी में बढ़ोतरी की गई है। गौतम बुद्ध नगर और गाजियाबाद में अकुशल श्रमिकों को 193 रुपये, अर्द्धकुशल को 212 रुपये और कुशल श्रमिकों को 238 रुपये प्रतिमाह अधिक मिलेंगे। अन्य नगर निगम वाले जिलों और बाकी जिलों के लिए भी नई दरें निर्धारित की गई हैं। जानिए किस श्रेणी के श्रमिक की मजदूरी कितनी बढ़ी।
उत्तर प्रदेश में नौकरी करने वाले लाखों श्रमिकों के लिए मजदूरी से जुड़ी नई दरें सामने आई हैं। बढ़ती महंगाई के बीच घर का खर्च चलाना, बच्चों की पढ़ाई, किराया और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना किसी चुनौती से कम नहीं है। ऐसे में न्यूनतम मजदूरी में होने वाला छोटा-सा इजाफा भी श्रमिकों की मासिक आय पर असर डालता है। राज्य सरकार ने इसी दिशा में परिवर्तनीय महंगाई भत्ते यानी वीडीए (VDA) की संशोधित दरें लागू करने का फैसला किया है।
इस बदलाव का लाभ नोएडा, गाजियाबाद समेत उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में निर्धारित श्रेणियों के पात्र श्रमिकों को मिलेगा। नई दरें 1 अक्टूबर से 31 मार्च तक की अवधि के लिए लागू होंगी। श्रम विभाग की ओर से जारी शासनादेश के मुताबिक, श्रमिकों की न्यूनतम मासिक मजदूरी में उनकी श्रेणी और जिले के अनुसार 174 रुपये से लेकर 238 रुपये तक की बढ़ोतरी की गई है।
लेकिन सवाल यह है कि किस जिले में किस श्रेणी के श्रमिक की मजदूरी कितनी बढ़ी है और नई दरों के बाद हर महीने कितनी रकम मिलेगी?
नोएडा और गाजियाबाद के श्रमिकों को कितना फायदा?
गौतम बुद्ध नगर और गाजियाबाद में औद्योगिक इकाइयों, कारखानों और प्रतिष्ठानों में काम करने वाले श्रमिकों के लिए संशोधित दरें निर्धारित की गई हैं। इन दोनों जिलों में मजदूरी की दरें अन्य जिलों की तुलना में अलग हैं।
नई दरों के अनुसार:
अकुशल श्रमिक: पहले 13,690 रुपये प्रतिमाह मिलते थे। अब न्यूनतम मासिक मजदूरी 13,883 रुपये होगी। यानी 193 रुपये की बढ़ोतरी।
अर्द्धकुशल श्रमिक: पहले 15,059 रुपये मिलते थे। अब 15,271 रुपये प्रतिमाह मिलेंगे। यानी 212 रुपये का इजाफा।
कुशल श्रमिक: पहले 16,868 रुपये प्रतिमाह मिलते थे। अब यह रकम बढ़कर 17,106 रुपये हो गई है। यानी हर महीने 238 रुपये अधिक मिलेंगे।
नोएडा और गाजियाबाद जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में बड़ी संख्या में श्रमिक फैक्ट्रियों, कंपनियों और विभिन्न प्रतिष्ठानों में काम करते हैं। ऐसे में इन संशोधित दरों का महत्व और बढ़ जाता है। हालांकि, वास्तविक भुगतान संबंधित प्रतिष्ठान, लागू श्रेणी और अन्य वैधानिक प्रावधानों के अनुरूप होना चाहिए।

दूसरे नगर निगम वाले जिलों में नई मजदूरी कितनी?
प्रदेश के उन अन्य जिलों में, जहां नगर निगम क्षेत्र लागू है, श्रमिकों के लिए अलग न्यूनतम मजदूरी निर्धारित की गई है। यहां भी अकुशल, अर्द्धकुशल और कुशल श्रमिकों की मजदूरी में बढ़ोतरी हुई है।
नई दरों का पूरा विवरण इस प्रकार है:
अकुशल श्रमिक: 13,006 रुपये से बढ़ाकर 13,190 रुपये प्रतिमाह। कुल बढ़ोतरी 184 रुपये।
अर्द्धकुशल श्रमिक: 14,306 रुपये से बढ़ाकर 14,507 रुपये प्रतिमाह। कुल बढ़ोतरी 201 रुपये।
कुशल श्रमिक: 16,025 रुपये से बढ़ाकर 16,251 रुपये प्रतिमाह। कुल बढ़ोतरी 226 रुपये।
इस श्रेणी में आने वाले जिलों के पात्र श्रमिकों को भी संशोधित न्यूनतम मजदूरी का लाभ मिलेगा। हालांकि, किस प्रतिष्ठान पर कौन-सी दर लागू होगी, इसकी पुष्टि संबंधित अधिसूचना और प्रतिष्ठान की श्रेणी के आधार पर की जानी चाहिए।
बाकी जिलों में कितनी बढ़ी मजदूरी?
उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों में भी अकुशल, अर्द्धकुशल और कुशल श्रमिकों की न्यूनतम मासिक मजदूरी बढ़ाई गई है। इन जिलों में निर्धारित नई दरें इस प्रकार हैं:
अकुशल श्रमिक: पहले 12,356 रुपये मिलते थे। अब 12,530 रुपये प्रतिमाह मिलेंगे। यानी 174 रुपये अधिक।
अर्द्धकुशल श्रमिक: पहले 13,590 रुपये मिलते थे। अब 13,782 रुपये प्रतिमाह मिलेंगे। यानी 192 रुपये अधिक।
कुशल श्रमिक: पहले 15,224 रुपये मिलते थे। अब 15,438 रुपये प्रतिमाह मिलेंगे। यानी 214 रुपये की बढ़ोतरी।
इस तरह प्रदेश में श्रमिकों की न्यूनतम मासिक मजदूरी में इजाफा उनकी श्रेणी और संबंधित क्षेत्र के आधार पर अलग-अलग है।
महंगाई के आधार पर क्यों बदली गईं दरें?
श्रमिकों की मजदूरी में यह संशोधन जनवरी से जून के बीच के भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक और महंगाई से संबंधित आंकड़ों के आधार पर किया गया है। परिवर्तनीय महंगाई भत्ते का उद्देश्य कीमतों में होने वाले बदलाव के बीच न्यूनतम मजदूरी की दरों को संशोधित करना है, ताकि श्रमिकों की आय पर महंगाई के असर को कुछ हद तक कम किया जा सके।
राज्य के 74 अधिसूचित विभागों में वीडीए की संशोधित दरें लागू किए जाने की जानकारी दी गई है। नई दरें 1 अक्टूबर से 31 मार्च तक प्रभावी रहेंगी। इसका अर्थ है कि पात्र श्रमिकों को निर्धारित अवधि के दौरान लागू नई न्यूनतम मजदूरी के अनुसार भुगतान किया जाना चाहिए।
मजदूरों के लिए जरूरी है नई दरों की जानकारी
मजदूरी बढ़ने की घोषणा के बाद श्रमिकों के लिए यह जानना भी जरूरी है कि उनके काम की श्रेणी क्या है और उनके जिले में कौन-सी न्यूनतम दर लागू होती है। यदि किसी श्रमिक को निर्धारित न्यूनतम मजदूरी से कम भुगतान मिल रहा है, तो वह अपनी वेतन पर्ची, उपस्थिति और अन्य संबंधित दस्तावेज सुरक्षित रखकर श्रम विभाग से जानकारी ले सकता है।
नोएडा और गाजियाबाद जैसे औद्योगिक जिलों में बड़ी संख्या में कामगार अपनी आय से परिवार का खर्च चलाते हैं। ऐसे में नई दरों का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा, जब संबंधित नियोक्ता लागू नियमों के अनुसार भुगतान सुनिश्चित करें।
अब देखने वाली बात यह होगी कि संशोधित दरों का लाभ पात्र श्रमिकों तक किस तरह पहुंचता है और क्या उनकी मासिक आय में हुई यह बढ़ोतरी बढ़ती महंगाई के बीच कुछ राहत दे पाती है।
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