उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने एक बड़े अंतरराज्यीय मादक पदार्थ तस्करी गिरोह के सदस्य को 2.20 किलो अवैध अफीम के साथ गिरफ्तार किया है। आरोपी बिहार का रहने वाला है और पंजाब में रहकर नेटवर्क चला रहा था।
गाजीपुर में उत्तर प्रदेश एसटीएफ को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। अंतरराज्यीय स्तर पर सक्रिय मादक पदार्थ तस्करी गिरोह के एक सदस्य को 2.20 किलोग्राम अवैध अफीम के साथ गिरफ्तार किया गया है। बरामद अफीम की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत लगभग 11 लाख रुपये बताई जा रही है।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान मोहम्मद शाहबाज उर्फ राजू (24 वर्ष) के रूप में हुई है, जो मूल रूप से पश्चिमी चम्पारण जिले का निवासी है और वर्तमान में जालंधर में रह रहा था।
कैसे हुई गिरफ्तारी?
यह कार्रवाई 3 मई 2026 की रात करीब 11:30 बजे की है, जब एसटीएफ टीम को सूचना मिली कि एक तस्कर भारी मात्रा में अफीम लेकर बरेली से गाजीपुर की ओर आ रहा है।
उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स ने तुरंत सक्रियता दिखाते हुए पॉलिटेक्निक चौराहे से संतनगर जाने वाली सड़क पर घेराबंदी की। मुखबिर की सटीक सूचना के आधार पर पुलिया के पास आरोपी को दबोच लिया गया।
क्या-क्या हुआ बरामद?
पुलिस ने आरोपी के पास से—
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2.20 किलो अवैध अफीम
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2 मोबाइल फोन
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1 डेबिट कार्ड
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1 आधार कार्ड
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1 पैन कार्ड
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4000 रुपये नकद
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1 रोडवेज बस टिकट
बरामद किया है।
इन सामानों से यह साफ होता है कि आरोपी लगातार राज्यों के बीच यात्रा कर तस्करी को अंजाम दे रहा था।

पढ़ाई से तस्करी तक का सफर
पूछताछ में आरोपी ने जो खुलासा किया, वह चौंकाने वाला है। उसने बताया कि वह बीए (इतिहास) का छात्र है और 2024 में एएमयू कॉलेज, दिल्ली से पढ़ाई पूरी की थी।
इसके बाद वह पोखरा चला गया, जहां उसने सिविल कंस्ट्रक्शन का काम किया, लेकिन कम आय के कारण वह असंतुष्ट था।
इसी दौरान उसकी मुलाकात बिहार के राहुल नाम के युवक से हुई, जो जालंधर में रहकर ड्रग्स तस्करी करता था। अगस्त 2025 में राहुल की मौत के बाद शाहबाज ने खुद इस नेटवर्क को संभाल लिया।
कैसे चलता था नेटवर्क?
शाहबाज ने बताया कि वह वाराणसी से अफीम खरीदकर पंजाब तक सप्लाई करता था। इस धंधे में उसे अच्छा मुनाफा होता था, जिससे वह तेजी से इस अवैध कारोबार में गहराई तक जुड़ता चला गया।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह में और कौन-कौन लोग शामिल हैं और इसका नेटवर्क किन-किन राज्यों तक फैला हुआ है।
एसटीएफ की रणनीति
इस पूरी कार्रवाई को विशाल विक्रम सिंह (अपर पुलिस अधीक्षक, एसटीएफ लखनऊ) के निर्देशन में अंजाम दिया गया। टीम का नेतृत्व उपनिरीक्षक रामनरेश ने किया, जिसमें कई अन्य पुलिसकर्मी भी शामिल थे।
आगे की कार्रवाई
एसटीएफ अब आरोपी के नेटवर्क को खंगाल रही है। संभावना है कि इस गिरोह से जुड़े अन्य सदस्य भी जल्द गिरफ्त में आएंगे।
यह कार्रवाई न केवल एक बड़े ड्रग नेटवर्क को तोड़ने की दिशा में अहम कदम है, बल्कि यह भी दिखाती है कि कैसे बेरोजगारी और लालच युवाओं को अपराध की दुनिया में धकेल सकता है।
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