दिल्ली के बुराड़ी फ्लाईओवर पर ₹37.50 लाख की लूट का मामला महज 24 घंटे में सुलझ गया। जांच में खुलासा हुआ कि कंपनी के दो कर्मचारियों ने अपने साथी के साथ मिलकर खुद ही लूट की साजिश रची थी। पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर ₹36.92 लाख नकद, चार मोबाइल फोन और वारदात में इस्तेमाल की गई मोटरसाइकिल बरामद कर ली है। मामले में अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।
राजधानी दिल्ली में ₹37.50 लाख की कथित लूट का मामला महज 24 घंटे के भीतर ऐसा मोड़ ले गया जिसने पुलिस के साथ-साथ कंपनी मालिक को भी हैरान कर दिया। शुरुआत में यह मामला सड़क पर हुई एक बड़ी लूट जैसा दिखाई दे रहा था, लेकिन दिल्ली पुलिस की सतर्क जांच ने खुलासा किया कि यह कोई बाहरी लूट नहीं बल्कि कंपनी के ही दो कर्मचारियों द्वारा रची गई सुनियोजित साजिश थी।
वजीराबाद थाना पुलिस और उत्तर जिला स्पेशल स्टाफ की संयुक्त टीम ने इस हाई-प्रोफाइल मामले का खुलासा करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से ₹36,92,000 नकद, चार मोबाइल फोन और वारदात में इस्तेमाल की गई एक मोटरसाइकिल बरामद की है। पुलिस का कहना है कि लगभग पूरी लूटी गई रकम बरामद कर ली गई है।
क्या था पूरा मामला?
पुलिस के अनुसार 9 जुलाई 2026 को वजीराबाद थाने में पीसीआर कॉल प्राप्त हुई कि बुराड़ी फ्लाईओवर, आउटर रिंग रोड के पास बाइक सवार तीन बदमाशों ने एक बैग में रखे लाखों रुपये लूट लिए हैं।
सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची, जहां निजी विज्ञापन एवं समाचार पत्र प्रकाशन कंपनी के कर्मचारी मोहन दास ने बताया कि वह अपने दो साथियों अभिषेक और योगेश के साथ चांदनी चौक से नकदी लेकर अपने मालिक के सरस्वती विहार स्थित घर जा रहा था।
कुल ₹45.50 लाख की नकदी दो हिस्सों में थी।
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मोहन दास और अभिषेक एक मोटरसाइकिल पर ₹37.50 लाख लेकर चल रहे थे।
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दूसरी बाइक पर योगेश ₹8 लाख लेकर पीछे आ रहा था।
शाम करीब 6 बजे बुराड़ी फ्लाईओवर के पास काले रंग की हीरो स्प्लेंडर मोटरसाइकिल पर आए तीन युवकों ने उनकी बाइक को टक्कर मारकर नकदी से भरा बैग छीन लिया और निरंकारी भवन की ओर फरार हो गए।

भीड़ ने पकड़ा एक आरोपी, फिर भी कैसे भाग गया?
घटना के बाद मोहन दास और अभिषेक ने बदमाशों का पीछा किया। स्थानीय लोगों की मदद से एक आरोपी को पकड़ भी लिया गया, जबकि उसके दो साथी नकदी लेकर फरार हो गए।
इसके बाद एक हैरान करने वाली कहानी सामने आई।
पुलिस को बताया गया कि अभिषेक और योगेश पकड़े गए आरोपी को लेकर अपनी बाइक से कार्यालय की ओर जा रहे थे। इसी दौरान जीटीबी नगर मेट्रो स्टेशन के पास आरोपी ने कथित तौर पर योगेश के कंधे पर काट लिया और वहां से फरार हो गया।
इसके बाद तीनों कर्मचारी और कंपनी मालिक वापस घटनास्थल पहुंचे और पुलिस को सूचना दी।
मामला दर्ज, जांच शुरू
घटना के आधार पर एफआईआर संख्या 324/2026 दिनांक 10 जुलाई 2026 को थाना वजीराबाद में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 309(4) एवं 3(5) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच तुरंत शुरू कर दी गई।
दो विशेष टीमों का हुआ गठन
मामले की जांच के लिए दो संयुक्त टीमें गठित की गईं।
पहली टीम
एसीपी बुराड़ी शशिकांत गौर के मार्गदर्शन और एसएचओ वजीराबाद इंस्पेक्टर प्रशांत आनंद की निगरानी में—
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एसआई मुकेश तोमर
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एसआई मोहित चौधरी
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एसआई अजीत सिंह
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एचसी विनय कुमार
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एचसी अंकित बंसल
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एचसी सतपाल
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कांस्टेबल आशीष
को शामिल किया गया।

दूसरी टीम
एसीपी ऑपरेशन उत्तर जिला विशेष दत्तरवाल के मार्गदर्शन में इंस्पेक्टर रोहित सरस्वत के नेतृत्व में—
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एसआई अशोक
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एएसआई हरफूल
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एचसी आकाश
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एचसी मोनबीर
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एचसी संदीप
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कांस्टेबल मोहित
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कांस्टेबल मोहित श्योराण
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कांस्टेबल नितिन
को जांच में लगाया गया।
300 नहीं, बल्कि पूरे रूट की तकनीकी जांच
जांच के दौरान पुलिस ने—
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चांदनी चौक से बुराड़ी तक
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बुराड़ी से मुखर्जी नगर तक
लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली।
साथ ही कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) का विश्लेषण किया गया और कंपनी के कर्मचारियों से लगातार पूछताछ की गई।
एक मोबाइल फोन ने खोल दी पूरी पोल
पूछताछ के दौरान अभिषेक ने दावा किया कि जब भीड़ ने आरोपी को पकड़ा था, तब उसने आरोपी का मोबाइल अपने पास रख लिया था।
बाद में जब आरोपी कथित रूप से योगेश को काटकर भागा तो वह अपना मोबाइल भी साथ ले गया।
पुलिस को यह कहानी संदिग्ध लगी।
जब कर्मचारियों की मोटरसाइकिल की तलाशी ली गई तो कथित आरोपी का मोबाइल फोन उसी बाइक की डिक्की से बरामद हो गया।
यहीं से पुलिस को यकीन हो गया कि पूरी कहानी मनगढ़ंत है।

कंधे पर काटने का निशान भी निकला संदिग्ध
पुलिस ने योगेश के कंधे पर बने कथित काटने के निशान का भी परीक्षण कराया।
जांच में पुलिस को यह चोट स्वाभाविक नहीं लगी, जिससे कर्मचारियों की कहानी पर और संदेह गहरा गया।
पूछताछ में टूटे दोनों कर्मचारी
लगातार पूछताछ के बाद अभिषेक और योगेश ने आखिरकार अपना जुर्म कबूल कर लिया।
उन्होंने स्वीकार किया कि उन्होंने अपने साथी विपिन के साथ मिलकर पूरी लूट की साजिश रची थी।
कैफे में बनी थी करोड़ों की नहीं, लाखों की साजिश
पुलिस पूछताछ में सामने आया कि तीनों आरोपी पहले रोहिणी स्थित एक कैफे में मिला करते थे, जिसे विपिन चलाता था।
कैफे बंद होने के बाद भी उनकी मुलाकातें जारी रहीं।
इन्हीं बैठकों के दौरान अभिषेक और योगेश ने बताया कि वे अक्सर अपने मालिक के लाखों रुपये एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाते हैं।
यहीं से नकदी लूटने की योजना तैयार की गई।
विपिन ने इस साजिश में अपने तीन अन्य साथियों को भी शामिल किया।
वारदात कैसे हुई?
घटना वाले दिन—
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विपिन और उसके साथी चांदनी चौक पहुंच गए।
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उन्होंने अभिषेक और योगेश की गतिविधियों पर नजर रखी।
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दोनों कर्मचारियों की बाइक का पीछा किया।
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बुराड़ी फ्लाईओवर के पास पहले से तय योजना के मुताबिक वारदात को अंजाम दिया।

भीड़ से पकड़े आरोपी को जानबूझकर भगाया गया
पूछताछ में आरोपियों ने यह भी स्वीकार किया कि जब लोगों ने एक आरोपी को पकड़ लिया था, तब वे घबरा गए थे।
उन्होंने जानबूझकर आरोपी को पुलिस के हवाले नहीं किया।
बल्कि उसे अपने साथ कार्यालय ले जाने का बहाना बनाया और रास्ते में उसके फरार होने की झूठी कहानी गढ़ दी।
विपिन तक कैसे पहुंची पुलिस?
पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों से पुष्टि की कि घटना के समय विपिन चांदनी चौक इलाके में मौजूद था।
इसके बाद पुलिस ने एक रणनीति बनाई।
विपिन को यह विश्वास दिलाया गया कि उसके साथी पुलिस की नजर से बच चुके हैं और अब अपने हिस्से के पैसे मांग रहे हैं।
विपिन पुलिस के झांसे में आ गया और उसने अपनी लोकेशन जहांगीरपुरी बताई।
10 जुलाई 2026 को पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
घर से बरामद हुई लाखों की नकदी
विपिन के घर की तलाशी लेने पर पुलिस ने ₹36,92,000 नकद बरामद किए।
इसके अलावा—
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चार मोबाइल फोन
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वारदात में प्रयुक्त एक मोटरसाइकिल
भी जब्त की गई।
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₹36,92,000 नकद
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04 मोबाइल फोन
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01 मोटरसाइकिल (वारदात में प्रयुक्त)
फरार आरोपियों की तलाश जारी
दिल्ली पुलिस का कहना है कि इस साजिश में शामिल अन्य आरोपियों की पहचान कर ली गई है। उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। मामले की जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में कई और महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं।
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