उत्तर रेलवे का दिल्ली मंडल अपने पार्सल नेटवर्क को पहले से अधिक सुरक्षित और आधुनिक बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। नई दिल्ली, दिल्ली जंक्शन, हजरत निजामुद्दीन और आनंद विहार टर्मिनल जैसे प्रमुख स्टेशनों पर अत्याधुनिक एक्स-रे पार्सल स्कैनर लगाए गए हैं। इन स्कैनरों की मदद से ज्वलनशील पदार्थों, प्रतिबंधित वस्तुओं, नशीले पदार्थों और अन्य अवैध सामानों की पहचान की जा सकेगी। रेलवे प्रशासन का मानना है कि इससे यात्रियों की सुरक्षा बढ़ेगी और पार्सल सेवाएं अधिक पारदर्शी तथा प्रभावी बनेंगी।
विज्ञापन
भारतीय रेलवे लगातार अपनी सेवाओं को आधुनिक बनाने की दिशा में काम कर रहा है। इसी क्रम में उत्तर रेलवे के दिल्ली मंडल ने पार्सल सेवाओं की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। अब रेलवे स्टेशन से भेजे जाने वाले हर पार्सल पर अत्याधुनिक एक्स-रे स्कैनर की नजर रहेगी।
उत्तर रेलवे का दिल्ली मंडल पूरे उत्तर रेलवे नेटवर्क के पार्सल कारोबार का लगभग 79 प्रतिशत हिस्सा संभालता है। ऐसे में सुरक्षा, पारदर्शिता और कार्यकुशलता सुनिश्चित करना रेलवे प्रशासन के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल है।
इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए दिल्ली मंडल ने चार प्रमुख रेलवे स्टेशनों—नई दिल्ली रेलवे स्टेशन, दिल्ली जंक्शन, हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन और आनंद विहार टर्मिनल—पर आधुनिक एक्स-रे पार्सल स्कैनिंग सिस्टम स्थापित किए हैं।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इन स्कैनरों की मदद से किसी भी संदिग्ध, प्रतिबंधित या खतरनाक वस्तु का आसानी से पता लगाया जा सकेगा। इसके अलावा तस्करी, अवैध सामान की ढुलाई और आग लगने जैसी घटनाओं को रोकने में भी यह तकनीक बेहद प्रभावी साबित होगी।
पिछले कुछ वर्षों में रेलवे परिसरों और पार्सल वैन में आग लगने की कई घटनाएं सामने आई थीं। जांच के दौरान कई बार यह पाया गया कि कुछ लोगों ने नियमों का उल्लंघन करते हुए ज्वलनशील पदार्थों को पार्सल के रूप में भेज दिया था।
अब एक्स-रे स्कैनर ऐसी घटनाओं को रोकने में अहम भूमिका निभाएंगे। इन मशीनों की सहायता से एरोसोल, रासायनिक सॉल्वेंट, बैटरियां और अन्य ज्वलनशील वस्तुओं की पहचान आसानी से की जा सकेगी।
रेलवे प्रशासन का मानना है कि इससे यात्रियों, कर्मचारियों और रेलवे संपत्तियों की सुरक्षा पहले से कहीं अधिक मजबूत होगी।
प्रतिबंधित वस्तुओं की तस्करी पर भी लगेगी लगाम
अत्याधुनिक स्कैनिंग तकनीक केवल ज्वलनशील वस्तुओं की पहचान तक सीमित नहीं है। इसके माध्यम से शराब, नशीले पदार्थ, विस्फोटक सामग्री और अन्य प्रतिबंधित वस्तुओं की भी पहचान की जा सकेगी।
रेलवे सुरक्षा बल और अन्य जांच एजेंसियां भी इस तकनीक का लाभ उठाकर अवैध गतिविधियों पर प्रभावी ढंग से नियंत्रण कर सकेंगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे रेलवे नेटवर्क का इस्तेमाल करके किए जाने वाले अपराधों में भी कमी आएगी।
नियमों का पालन सुनिश्चित करने में मिलेगी मदद
भारतीय रेलवे ने लंबे समय से कुछ विशेष वस्तुओं के परिवहन पर प्रतिबंध लगाया हुआ है। इसके बावजूद कई बार नियमों की अनदेखी करते हुए लोग प्रतिबंधित सामान पार्सल के माध्यम से भेजने का प्रयास करते हैं।
एक्स-रे स्कैनिंग सिस्टम ऐसे मामलों की पहचान करने में बेहद कारगर साबित होगा। इससे रेलवे प्रशासन को नियमों का सख्ती से पालन कराने में मदद मिलेगी।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, पहले पार्सलों की जांच मैन्युअल तरीके से की जाती थी, जिसके कारण काफी समय लगता था। नई तकनीक के इस्तेमाल से यह प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक तेज, सटीक और पारदर्शी हो जाएगी।
इससे पार्सलों की समय पर डिलीवरी सुनिश्चित हो सकेगी और स्टेशनों पर भीड़ कम करने में मदद मिलेगी।
इसके अलावा पार्सल वैन के साथ यात्रा करने वाले यात्रियों की सुरक्षा भी बढ़ेगी।
आधुनिक तकनीक की ओर बढ़ रहा भारतीय रेलवे
भारतीय रेलवे लगातार अपनी कार्यप्रणाली को आधुनिक बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। डिजिटल टिकटिंग, स्वचालित सिग्नल प्रणाली, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित निगरानी प्रणाली और अब अत्याधुनिक एक्स-रे स्कैनिंग सिस्टम इसी दिशा में उठाए गए महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं।
रेलवे प्रशासन का कहना है कि भविष्य में इस व्यवस्था को अन्य प्रमुख स्टेशनों पर भी लागू किया जा सकता है।
स्पष्ट है कि उत्तर रेलवे का यह कदम केवल तकनीकी बदलाव नहीं है, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा, सेवा की गुणवत्ता और रेलवे नेटवर्क की विश्वसनीयता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल भी है।
विज्ञापन
उत्तर रेलवे, दिल्ली मंडल, पार्सल स्कैनर, एक्स-रे स्कैनिंग सिस्टम, नई दिल्ली रेलवे स्टेशन, दिल्ली जंक्शन, हजरत निजामुद्दीन, आनंद विहार टर्मिनल, रेलवे सुरक्षा, पार्सल सेवा, भारतीय रेलवे, रेलवे समाचार
COMMENTS