Wednesday, July 08, 2026

दिल्ली में हाईटेक कार चोर गिरोह का पर्दाफाश! बिना शीशा तोड़े और लॉक तोड़े मिनटों में गायब कर देते थे लग्जरी गाड़ियां, 50 इलेक्ट्रॉनिक चाबियां बरामद

रोहिणी स्पेशल स्टाफ ने अंतरराज्यीय ऑटो लिफ्टर गैंग के चार शातिर बदमाशों को दबोचा, 11 चोरी की हाई-एंड कारें, एक ऑटो, की-प्रोग्रामिंग मशीन, कंप्यूटर सिस्टम और कई हाईटेक उपकरण बरामद

New Delhi , Latest Updated On - Jul 07 2026 | 18:11:00 PM
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दिल्ली पुलिस की रोहिणी स्पेशल स्टाफ ने एक ऐसे हाईटेक अंतरराज्यीय वाहन चोर गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो इलेक्ट्रॉनिक तकनीक से डुप्लीकेट चाबी बनाकर बिना किसी तोड़फोड़ के महंगी कारें चोरी करता था। पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार कर 11 चोरी की कारें, एक ऑटो और वाहन चोरी में इस्तेमाल होने वाले आधुनिक उपकरण बरामद किए हैं।

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 राजधानी दिल्ली में लगातार बढ़ रही वाहन चोरी की घटनाओं के बीच रोहिणी जिले की स्पेशल स्टाफ टीम ने एक ऐसे अंतरराज्यीय ऑटो लिफ्टर गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसने वाहन चोरी के पारंपरिक तरीकों को पीछे छोड़ते हुए आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक तकनीक को अपना हथियार बना लिया था। यह गिरोह बिना कार का शीशा तोड़े, बिना लॉक तोड़े और बिना किसी शोर-शराबे के कुछ ही मिनटों में हाई-एंड गाड़ियों को गायब कर देता था।

दिल्ली पुलिस की इस कार्रवाई में चार शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। इनके कब्जे से 11 चोरी की लग्जरी कारें, एक चोरी का ऑटो रिक्शा, 50 इलेक्ट्रॉनिक डुप्लीकेट चाबियां, कंप्यूटरीकृत की-कटिंग मशीन, कंप्यूटर सिस्टम, टैबलेट, जीपीएस डिटेक्टर, फर्जी नंबर प्लेट और कई अन्य उपकरण बरामद किए गए हैं।

बढ़ती वाहन चोरी पर बनाई गई थी विशेष टीम

रोहिणी जिले में लगातार बढ़ रही वाहन चोरी की घटनाओं को देखते हुए स्पेशल स्टाफ के प्रभारी इंस्पेक्टर संदीप गोदारा के नेतृत्व में एसीपी ऑपरेशन अजरमेर सिंह की निगरानी में एक विशेष टीम गठित की गई थी।


टीम में एसआई राजकुमार, एएसआई विनोद नैन, हरजीत, हेड कांस्टेबल विकास सांगवान, विनोद, मनदीप, राजीव, अतुल, विशाल तथा कांस्टेबल अजय, कुलदीप और विनीत को शामिल किया गया। टीम को चोरी की वारदातों की तह तक पहुंचकर पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने की जिम्मेदारी सौंपी गई।

तकनीकी निगरानी और मुखबिर की सूचना से मिला सुराग

पुलिस टीम ने लगातार कई दिनों तक तकनीकी सर्विलांस, अपराध के पैटर्न का विश्लेषण और मुखबिर तंत्र की मदद से संदिग्धों की गतिविधियों पर नजर रखी। जांच के दौरान पुलिस को एक ऐसा तरीका सामने आया जिसने अधिकारियों को भी चौंका दिया।

पुख्ता सूचना मिलने के बाद अलग-अलग स्थानों पर एक साथ छापेमारी की गई, जहां से चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।

गिरफ्तार आरोपी कौन हैं?

पुलिस ने जिन चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, उनमें शामिल हैं—

  • कुलदीप सिंह उर्फ लकी (47 वर्ष), निवासी झंगोला अलीपुर, दिल्ली। यह पूरे गिरोह का मास्टरमाइंड है और अलीपुर थाने का हिस्ट्रीशीटर है। इसके खिलाफ पहले से 25 आपराधिक मामले दर्ज हैं। यह इलेक्ट्रॉनिक की-प्रोग्रामिंग का विशेषज्ञ बताया गया है।
  • बलविंदर उर्फ बिंदा (32 वर्ष), निवासी झंगोला, अलीपुर, दिल्ली। इसके खिलाफ 15 चोरी के मामले दर्ज हैं। इसका काम दिन में रेकी कर चोरी के लिए वाहन चिन्हित करना था।
  • दीपक उर्फ देव (32 वर्ष), निवासी झुंझुनूं, राजस्थान। यह चोरी की गाड़ियों को दूसरे राज्यों और रिसीवरों तक पहुंचाने का काम करता था।
  • बख्शीश सिंह उर्फ मन्नी (37 वर्ष), निवासी विकासपुरी, दिल्ली। इसके खिलाफ 8 आपराधिक मामले दर्ज हैं। यह चोरी के वाहनों को खोलकर उनके महंगे पार्ट्स बेचने का काम करता था।

ऐसे करते थे हाईटेक तरीके से वाहन चोरी

पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह बेहद योजनाबद्ध तरीके से काम करता था।

सबसे पहले बलविंदर दिन के समय कॉलोनियों और पार्किंग स्थलों में घूमकर ऐसी महंगी गाड़ियों की पहचान करता था जिन्हें रात में आसानी से चोरी किया जा सके। इसके बाद वह वाहन की लोकेशन और अन्य जानकारी कुलदीप सिंह तक पहुंचाता था।

कुलदीप अपने कंप्यूटर, विशेष सॉफ्टवेयर, टैबलेट और कंप्यूटरीकृत की-कटिंग मशीन की मदद से उसी वाहन की डुप्लीकेट इलेक्ट्रॉनिक चाबी तैयार करता था। इसके बाद देर रात आरोपी बिना लॉक तोड़े और बिना किसी नुकसान के गाड़ी लेकर फरार हो जाते थे।

यही वजह थी कि कई मामलों में वाहन मालिकों को सुबह तक चोरी का पता भी नहीं चलता था।


दो तरीके से ठिकाने लगाई जाती थीं चोरी की गाड़ियां

पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि चोरी के बाद गाड़ियों को दो अलग-अलग तरीकों से ठिकाने लगाया जाता था।

महंगी एसयूवी और लग्जरी वाहनों को दिल्ली और अन्य राज्यों में सक्रिय रिसीवरों के जरिए बेच दिया जाता था। जबकि सामान्य वाहनों को सुनसान स्थानों पर ले जाकर उनके इंजन, गियर बॉक्स, ईसीयू, अलॉय व्हील, दरवाजे, बोनट, बंपर, हेडलाइट और अन्य महंगे पार्ट्स अलग-अलग निकालकर ग्रे मार्केट में बेच दिए जाते थे।

वाहनों के पार्ट्स ढोने के लिए आरोपी एक चोरी के ऑटो रिक्शा का इस्तेमाल करते थे ताकि किसी को उन पर शक न हो।

GPS से बचने के लिए भी थी खास तैयारी

पुलिस के अनुसार आरोपी आधुनिक वाहनों में लगे जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम से बचने के लिए जीपीएस डिटेक्टर और स्कैनर का इस्तेमाल करते थे। वारदात के दौरान पहचान छिपाने के लिए चेहरे पर मास्क पहनते थे और फर्जी नंबर प्लेट लगाकर चोरी की गाड़ियों को आसानी से दूसरे राज्यों तक पहुंचा देते थे।


बरामदगी ने खोले कई राज

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से कुल 11 चोरी की कारें बरामद की हैं। इनमें एक हुंडई अल्काजार, एक महिंद्रा थार, तीन हुंडई क्रेटा, दो मारुति बलेनो, एक मारुति वैगनआर, एक हुंडई ऑरा, एक मारुति स्विफ्ट डिजायर और एक हुंडई आई-20 शामिल हैं।

इसके अलावा एक चोरी का ऑटो रिक्शा, 50 इलेक्ट्रॉनिक डुप्लीकेट वाहन चाबियां, कई फर्जी नंबर प्लेट, कंप्यूटरीकृत की-कटिंग मशीन, वाहन की-प्रोग्रामिंग सॉफ्टवेयर वाला कंप्यूटर सिस्टम, टैबलेट, जीपीएस डिटेक्टर, ड्रिलिंग मशीन, फेस मास्क तथा वाहन चोरी और उन्हें खोलने में इस्तेमाल होने वाले अन्य उपकरण भी बरामद किए गए हैं।

अन्य राज्यों तक फैले नेटवर्क की जांच जारी

दिल्ली पुलिस का मानना है कि यह गिरोह केवल दिल्ली तक सीमित नहीं था, बल्कि आसपास के राज्यों में भी सक्रिय था। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि चोरी की गाड़ियां खरीदने वाले रिसीवर कौन हैं, इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं तथा अब तक कितनी वारदातों को अंजाम दिया गया है।

पुलिस ने मामले में आगे की जांच जारी होने की बात कही है और उम्मीद जताई है कि पूछताछ के दौरान वाहन चोरी के कई और मामलों का खुलासा हो सकता है।

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