ग्रेटर नोएडा में डीएम कार्यालय, सूरजपुर कोर्ट, किसान चौक, घंटाघर चौक, तिलपता चौक और गौर चौक जैसे प्रमुख इलाकों में स्ट्रीट लाइटों की स्थिति पर सवाल उठ रहे हैं। Bharat News 360 TV ने पिछले करीब दो महीनों में कई बार जमीनी पड़ताल की और लोगों की शिकायतें जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुंचाईं। सुधार का आश्वासन मिलने के बावजूद कई स्थानों पर अपेक्षित बदलाव नजर नहीं आया। आखिर GNIDA का E&M विभाग कब करेगा सर्वे और कब मिलेगी जनता को अंधेरे से राहत?
ग्रेटर नोएडा। शहर को स्मार्ट और व्यवस्थित बनाने के बड़े-बड़े दावे, करोड़ों का बजट और विकास के लिए टेंडर… लेकिन जरा जमीन पर भी नजर डालिए! ग्रेटर नोएडा के कई प्रमुख इलाकों में स्ट्रीट लाइटों को लेकर सामने आ रही शिकायतें प्राधिकरण की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही हैं। आखिर शहर को रोशन करने का दावा करने वाली व्यवस्था में इतना अंधेरा क्यों है?
Bharat News 360 TV ने पिछले करीब दो महीनों में कई बार खुद इन इलाकों की जमीनी पड़ताल की। लगातार यहां से गुजरने वाले लोगों की शिकायतें सामने आईं। डीएम कार्यालय, सूरजपुर कोर्ट, किसान चौक, घंटाघर चौक, तिलपता चौक और गौर चौक जैसे महत्वपूर्ण इलाकों में स्ट्रीट लाइटों की स्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

विडंबना देखिए—जिन रास्तों से आम जनता के साथ अधिकारी भी गुजरते हैं, वहां की समस्याओं पर ध्यान दिलाने के लिए मीडिया को खुद मैदान में उतरना पड़ रहा है! क्या ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण का E&M विभाग नियमित सर्वे नहीं करता? क्या खराब लाइटों की जानकारी जुटाना भी जनता और पत्रकारों की जिम्मेदारी है?
इस समस्या की जानकारी Bharat News 360 TV ने जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुंचाई। सुधार का आश्वासन मिला और कुछ स्थानों पर काम जारी होने की बात भी कही गई। लेकिन जानकारी दिए जाने के दो सप्ताह से अधिक समय बाद भी, हमारी पड़ताल और लोगों की शिकायतों के मुताबिक, कई स्थानों पर अपेक्षित सुधार नजर नहीं आया।
अब सवाल है कि जब अधिकारियों को जानकारी मिल गई, तो कार्रवाई की समयसीमा क्या है? संबंधित वेंडर कंपनी की जवाबदेही कौन तय करेगा? और क्या दो महीने से अधिक समय तक बंद लाइटों की शिकायतों के बीच कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं हो सकती?
गोल चक्करों की सजावट से शहर सुंदर जरूर दिख सकता है, लेकिन असली विकास तब है, जब आम आदमी की सड़क भी रोशन हो।
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को इन इलाकों का निरीक्षण कराकर खराब लाइटें ठीक कराने और कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। जनता को अब आश्वासन नहीं, जमीन पर समाधान चाहिए।
Bharat News 360 TV का सवाल साफ है—आखिर कब तक विकास की फाइलें चमकेंगी और सड़कें अंधेरे में रहेंगी?
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