लखनऊ की आईटी सिटी योजना में शामिल गांवों के विकास के लिए एलडीए 100.71 करोड़ रुपये खर्च करेगा। धीमी प्रगति पर तीन सहायक अभियंताओं को प्रतिकूल प्रविष्टि दी गई, जबकि आउटसोर्सिंग पर तैनात रेवेन्यू इंस्पेक्टर को कार्यमुक्त कर दिया गया। बरसात में जल निकासी के लिए काटी गई सड़कों को भी एक महीने में दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आईटी सिटी योजना के आसपास बसे गांवों की तस्वीर बदलने की तैयारी है। जिन इलाकों में बेहतर सड़क, सीवर, पेयजल और जल निकासी की सुविधाओं का इंतजार है, वहां अब लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) करीब 100 करोड़ रुपये खर्च करेगा। लेकिन इस विकास योजना की समीक्षा में काम की रफ्तार उम्मीद के मुताबिक नहीं मिलने पर अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की गई है।
एलडीए के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने मंगलवार को आईटी सिटी योजना का स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान विकास कार्यों की धीमी प्रगति सामने आने पर उन्होंने संबंधित अधिकारियों और अभियंताओं को फटकार लगाई तथा एक महीने के भीतर व्यवस्था सुधारने का अल्टीमेटम दिया। तीन सहायक अभियंताओं को प्रतिकूल प्रविष्टि देने और एक रेवेन्यू इंस्पेक्टर को तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त करने की कार्रवाई भी की गई।
100.71 करोड़ रुपये से सड़क, सीवर और पेयजल की सुविधा
आईटी सिटी योजना में शामिल गांवों और उनके मजरों में बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए लगभग 100.71 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। योजना के तहत सड़कों का निर्माण, सीवर लाइन, पेयजल की व्यवस्था, वॉटर लाइन और ड्रेनेज से जुड़े कार्य कराए जाएंगे।
इसका उद्देश्य केवल आईटी सिटी के विकसित सेक्टरों को बेहतर बनाना नहीं, बल्कि योजना के दायरे में आने वाले आबादी वाले क्षेत्रों में भी बुनियादी सुविधाओं का विस्तार करना है। इन कार्यों के पूरा होने से ग्रामीण इलाकों में आवागमन और जल निकासी की समस्याओं को दूर करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

7 गांव और 10 मजरों में होंगे विकास कार्य
आईटी सिटी योजना के अंतर्गत आने वाले सात गांवों और दस मजरों में सड़क, सीवर, पेयजल तथा ड्रेनेज के कार्य प्रस्तावित हैं।
इनमें ग्राम पहाड़नगर टिकरिया, मोहारी खुर्द, मोहारी कलां, रकीबाबाद, सिकंदरपुर अमोलिया, परेहटा और सिद्धपुरा शामिल हैं।
इसके अलावा अलीपुर, भवानी खेड़ा, देव सिंह खेड़ा, स्वामी खेड़ा/जगमत खेड़ा, कुंवर बहादुर खेड़ा, नबीखेड़ा, सल्लाही खेड़ा, सोनई पूर्वा, उम्मीद खेड़ा और वीरमपुर में भी विकास कार्य कराए जाएंगे।
एलडीए के मुताबिक, इन सभी क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए निर्धारित बजट के तहत काम कराया जाएगा। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि स्वीकृत योजनाएं जमीन पर कितनी तेजी से आकार लेती हैं।
1465 किसानों को मिले 2197 भूखंड, छह सेक्टरों में पहले पूरा होगा काम
आईटी सिटी योजना के लिए एलडीए लैंड पूलिंग नीति के तहत जमीन देने वाले किसानों और भू-स्वामियों को योजना के भीतर ही विकसित भूखंड आवंटित कर रहा है। प्राधिकरण के अनुसार, अब तक 1465 किसानों को 2197 भूखंड आवंटित किए जा चुके हैं।
ये भूखंड योजना के सेक्टर-15, 16, 17, 18, 30 और 09 में दिए गए हैं। निरीक्षण के दौरान उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने निर्देश दिया कि इन सेक्टरों में विकास कार्य प्राथमिकता के आधार पर पूरे कराए जाएं, ताकि भूखंड पाने वाले किसानों और भू-स्वामियों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हो सकें।

40 टेंडर, 25 सड़कें और काम सिर्फ तीन पर आगे बढ़ा!
विकास कार्यों की समीक्षा में सामने आया कि आईटी सिटी योजना के तहत अब तक कुल 40 टेंडर किए जा चुके हैं। इनके माध्यम से 25 सड़कों का निर्माण और दो सेक्टरों में विकास कार्य कराया जा रहा है। हालांकि, निरीक्षण के दौरान पाया गया कि अभी तक केवल तीन सड़कों पर ही गिट्टी डालकर गैन्युलर सब-बेस (GSB) तैयार किया गया है।
काम की इस धीमी रफ्तार पर उपाध्यक्ष ने नाराजगी जताई। उन्होंने सहायक अभियंता विनीत शर्मा, गौरव सिंह और उर्वशी श्रीवास्तव को प्रतिकूल प्रविष्टि देने के निर्देश दिए। वहीं, योजना के कार्य के लिए आउटसोर्सिंग पर तैनात रेवेन्यू इंस्पेक्टर सूर्य प्रकाश को तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त कर दिया गया।
इसके अलावा डिजाइन, ड्राइंग और एस्टिमेट समय पर प्रस्तुत नहीं करने के मामले में आर्किटेक्ट एएनबी पर प्रति एकड़ एक हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इन कार्रवाइयों के जरिए प्राधिकरण ने स्पष्ट किया कि विकास कार्यों में देरी और निर्धारित जिम्मेदारियों में लापरवाही को लेकर जवाबदेही तय की जाएगी।
बरसात में काटी गई सड़कें एक महीने में होंगी दुरुस्त
आईटी सिटी योजना के आबादी वाले इलाकों में बारिश के दौरान जलभराव की स्थिति पैदा होने पर पानी निकालने के लिए कुछ स्थानों पर सड़कों की कटिंग कराई गई थी। इससे जल निकासी का रास्ता तो बनाया गया, लेकिन अब उन सड़कों को दोबारा ठीक करना भी जरूरी हो गया है।

निरीक्षण के दौरान प्रथमेश कुमार ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि रोड कटिंग के कारण क्षतिग्रस्त हुई सड़कों को एक महीने के भीतर पुनर्स्थापित किया जाए। उन्होंने अधिकारियों और अभियंताओं को समग्र व्यवस्था सुधारने के लिए भी एक महीने का समय दिया।
निरीक्षण के दौरान मुख्य अभियंता मानवेन्द्र सिंह, अधिशासी अभियंता निशांत कुमार, जोनल अधिकारी देवांश त्रिवेदी, चकबंदी अधिकारी तुलसीराम सहित अन्य अधिकारी और अभियंता मौजूद रहे।
अब निगाह काम की रफ्तार पर
आईटी सिटी योजना में शामिल गांवों के लिए 100.71 करोड़ रुपये का बजट और अधिकारियों पर हुई कार्रवाई विकास को गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। हालांकि, असली बदलाव तब दिखाई देगा, जब गांवों में सड़क, सीवर, पेयजल और ड्रेनेज की सुविधाएं जमीन पर उपलब्ध होंगी।
अब एलडीए के सामने चुनौती तय समयसीमा में काम पूरा कराने की है। एक महीने के अल्टीमेटम के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विकास कार्यों की रफ्तार कितनी बढ़ती है और बरसात में जलभराव से प्रभावित इलाकों की सड़कें तय समय पर बहाल हो पाती हैं या नहीं।
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