गौतमबुद्धनगर के विकासखंड बिसरख स्थित ग्राम दुजाना को पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत मॉडल सोलर विलेज के रूप में विकसित करने की तैयारी तेज हो गई है। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में हुई जिला स्तरीय समिति की बैठक में डीपीआर का प्रस्तुतीकरण किया गया। गांव में सोलर रूफटॉप, सोलर स्ट्रीट लाइट के साथ सोलर मिल्क चिलर, आटा चक्की और कोल्ड प्रेस यूनिट जैसी सुविधाएं विकसित करने की योजना है।
उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्धनगर में अब एक गांव की पहचान सिर्फ उसकी आबादी या खेतों से नहीं, बल्कि सौर ऊर्जा के इस्तेमाल और ऊर्जा आत्मनिर्भरता से होने की तैयारी है। विकासखंड बिसरख का ग्राम दुजाना जल्द ही जिले के ऐसे मॉडल गांव के रूप में विकसित किया जा सकता है, जहां बिजली की जरूरतों से लेकर ग्रामीण आजीविका और कृषि आधारित गतिविधियों तक में सौर ऊर्जा का इस्तेमाल बढ़ाने पर जोर रहेगा।
दरअसल, पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत ग्राम दुजाना को मॉडल सोलर विलेज के रूप में विकसित करने को लेकर 18 अगस्त 2026 को जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में गांव को सौर ऊर्जा आधारित मॉडल ग्राम बनाने के लिए तैयार की गई कार्ययोजना और प्रस्तावित सौर ऊर्जा परियोजनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक का सबसे अहम हिस्सा रहा विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी डीपीआर का पावर प्रजेंटेशन। परियोजना से जुड़े अधिकारियों ने जिलाधिकारी के सामने गांव के लिए तैयार की गई योजना का प्रस्तुतीकरण किया और बताया कि किस तरह दुजाना में सौर ऊर्जा के अधिकतम उपयोग के जरिए ग्रामीण क्षेत्र को स्वच्छ और हरित ऊर्जा की दिशा में आगे बढ़ाया जा सकता है।

मॉडल सोलर विलेज की योजना को केवल घरों में सोलर पैनल लगाने तक सीमित नहीं रखा गया है। प्रस्तावित योजना के मुताबिक घरेलू और सार्वजनिक भवनों पर सोलर रूफटॉप सिस्टम लगाए जाएंगे।
इसका उद्देश्य ग्रामीण परिवारों और सार्वजनिक संस्थानों की बिजली जरूरतों में सौर ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ाना है। इससे पारंपरिक बिजली स्रोतों पर निर्भरता कम करने और बिजली की बचत को बढ़ावा देने की उम्मीद है।
वहीं गांव की सड़कों और सार्वजनिक स्थलों पर सोलर स्ट्रीट लाइटिंग की व्यवस्था भी प्रस्तावित है। यानी जिस ऊर्जा का उत्पादन गांव में होगा, उसका इस्तेमाल गांव की सार्वजनिक सुविधाओं को बेहतर बनाने में भी किया जाएगा।
योजना का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि सौर ऊर्जा को सीधे ग्रामीण आजीविका और कृषि आधारित गतिविधियों से जोड़ने की तैयारी है।
सोलर मिल्क चिलर से आटा चक्की तक, कमाई के साधनों से जुड़ेगी सौर ऊर्जा
परियोजना अधिकारी यूपीनेडा गौतमबुद्धनगर लवेश कुमार सिसोदिया ने बैठक में प्रस्तावित योजनाओं की जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि मॉडल सोलर विलेज के तहत ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़ी कई गतिविधियों को सौर ऊर्जा आधारित बनाने का प्रस्ताव है। इनमें सोलर मिल्क चिलर, सोलर आटा चक्की और सोलर कोल्ड प्रेस यूनिट जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
सोलर मिल्क चिलर जैसी व्यवस्था से दुग्ध उत्पादन से जुड़े ग्रामीणों को लाभ मिलने की उम्मीद है, जबकि सोलर आटा चक्की और कोल्ड प्रेस यूनिट जैसी सुविधाएं स्थानीय स्तर पर छोटे व्यवसाय और रोजगार के अवसर पैदा कर सकती हैं।
इसके अलावा जरूरत के अनुसार कृषि और ग्रामीण आजीविका से जुड़े अन्य सौर ऊर्जा आधारित उपकरण भी स्थापित किए जाने की योजना है।
यानी दुजाना को मॉडल सोलर विलेज बनाने का लक्ष्य केवल बिजली पैदा करना नहीं, बल्कि सौर ऊर्जा को गांव की रोजमर्रा की जरूरतों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का हिस्सा बनाना है।

बैठक में जिलाधिकारी ने अधिकारियों को परियोजना के प्रभावी और समयबद्ध क्रियान्वयन के निर्देश दिए। उन्होंने संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने और जरूरी तकनीकी एवं प्रशासनिक प्रक्रिया को जल्द पूरा करने को कहा।
जिलाधिकारी ने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि प्रस्तावित सौर ऊर्जा परियोजनाओं का लाभ केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि सीधे ग्रामीणों तक पहुंचे।
उन्होंने दुजाना को स्वच्छ और हरित ऊर्जा के क्षेत्र में एक ऐसा मॉडल बनाने पर जोर दिया, जिसे देखकर जिले के अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में भी सौर ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जा सके।
बिजली की बचत के साथ रोजगार और आय के अवसर
इस परियोजना से कई स्तरों पर लाभ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
सौर ऊर्जा के बढ़ते इस्तेमाल से गांव में बिजली की बचत हो सकती है। साथ ही पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम होगी। दूसरी ओर, सौर ऊर्जा आधारित ग्रामीण गतिविधियों से स्थानीय रोजगार और आय के नए अवसर पैदा होने की संभावना है।
कृषि और ग्रामीण व्यवसायों में सौर ऊर्जा के इस्तेमाल से ऊर्जा लागत को नियंत्रित करने में भी मदद मिल सकती है। इसका सीधा असर छोटे किसानों, पशुपालकों और ग्रामीण उद्यमियों की आर्थिक गतिविधियों पर पड़ सकता है।
इसके साथ ही स्वच्छ ऊर्जा के इस्तेमाल से पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। प्रदूषण कम करने और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में यह योजना ग्रामीण स्तर पर एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

सरकार की योजना ग्राम दुजाना को सिर्फ एक सोलर गांव बनाने की नहीं, बल्कि इसे अनुकरणीय मॉडल के रूप में विकसित करने की है।
अगर प्रस्तावित योजनाएं प्रभावी ढंग से जमीन पर उतरती हैं, तो दुजाना में घरों की छतों से लेकर सार्वजनिक स्थानों, ग्रामीण व्यवसायों और कृषि गतिविधियों तक सौर ऊर्जा का इस्तेमाल दिखाई दे सकता है।
इसके बाद इस मॉडल को जनपद गौतमबुद्धनगर के दूसरे ग्रामीण क्षेत्रों और प्रदेश के अन्य गांवों में भी अपनाने की संभावना बन सकती है।
फिलहाल परियोजना की डीपीआर प्रस्तुत हो चुकी है और संबंधित विभागों को आवश्यक प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए गए हैं। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि कागज पर तैयार सोलर विलेज का मॉडल जमीन पर कब दिखाई देता है और दुजाना के ग्रामीणों को इसका वास्तविक लाभ कब मिलना शुरू होता है।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी भालचंद्र त्रिपाठी, संबंधित विभागों के अधिकारी और जिला स्तरीय समिति के सदस्य मौजूद रहे।
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