धान कटाई के मौसम में पराली जलाने की घटनाओं को रोकने और फसल अवशेष प्रबंधन की जमीनी स्थिति जानने के लिए भारत सरकार की केंद्रीय टीम ने गौतमबुद्धनगर के 20 से अधिक गांवों का निरीक्षण किया। टीम ने कृषि यंत्रों की उपलब्धता, उपयोग और कस्टम हायरिंग सेंटरों की कार्यप्रणाली देखी। किसानों को FARMSS ऐप के जरिए किराये पर कृषि मशीनरी लेने की सुविधा की जानकारी भी दी गई।
धान की कटाई के साथ ही हर साल खेतों में फसल अवशेष यानी पराली के प्रबंधन की चुनौती सामने आती है। पराली जलाने से जहां वायु प्रदूषण बढ़ता है, वहीं मिट्टी की सेहत और उर्वरता पर भी असर पड़ सकता है। ऐसे में सवाल यह है कि क्या किसानों के पास पराली का उचित प्रबंधन करने के लिए पर्याप्त संसाधन और आधुनिक कृषि यंत्र उपलब्ध हैं? इसी जमीनी हकीकत को समझने के लिए भारत सरकार की केंद्रीय टीम ने शुक्रवार को गौतमबुद्धनगर के विभिन्न गांवों का दौरा कर व्यवस्थाओं का स्थलीय निरीक्षण किया।
भारत सरकार के निर्देशों के क्रम में हुई इस जांच का उद्देश्य धान कटाई के दौरान फसल अवशेष जलाने की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाना, वायु प्रदूषण को नियंत्रित करना और फसल अवशेषों के वैज्ञानिक प्रबंधन की वास्तविक स्थिति का आकलन करना था।
20 से अधिक गांवों में पहुंची केंद्रीय टीम
निरीक्षण टीम ने जेवर, दादरी और बिसरख विकासखंडों के अंतर्गत घरबरा, पारसोल, दादरी, नूरपुर, फूलपुर सहित 20 से अधिक गांवों का भ्रमण किया। इस दौरान कस्टम हायरिंग सेंटर (सीएचसी) और किसानों के खेतों में पहुंचकर कृषि मशीनों की उपलब्धता, उनके इस्तेमाल और फसल अवशेष प्रबंधन के तरीकों को देखा गया।
टीम में भोपाल स्थित केंद्रीय कृषि मशीनरी प्रशिक्षण एवं परीक्षण संस्थान (CFMTTI) के निदेशक डॉ. नांदेडे, गौतमबुद्धनगर के उप कृषि निदेशक विवेक दुबे और वरिष्ठ सहायक साजिद गहलौत शामिल रहे। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने किसानों से बातचीत की और खेतों में उपलब्ध कृषि यंत्रों के उपयोग की जानकारी ली।
जिले में 4 कस्टम हायरिंग सेंटर, 20 से अधिक एकल कृषि यंत्र
उप कृषि निदेशक विवेक दुबे ने केंद्रीय टीम को बताया कि जनपद में विभिन्न कृषि योजनाओं के तहत चार कस्टम हायरिंग सेंटर संचालित हैं। इनके अलावा 20 से अधिक एकल कृषि यंत्र भी उपलब्ध हैं। इन केंद्रों और मशीनों के माध्यम से किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक का लाभ दिया जा रहा है।

उपलब्ध मशीनों में रोटावेटर, मल्चर, एमबी प्लाऊ, जीरो सीड ड्रिल, सुपर सीडर, हैप्पी सीडर, श्रेडर, श्रममास्टर, रीपर कंबाइनर, क्रॉप रीपर, लेजर लैंड लेवलर और डिस्क हैरो सहित अन्य कृषि यंत्र शामिल हैं।
इन मशीनों की मदद से फसल अवशेषों का इन-सीटू और एक्स-सीटू दोनों तरीकों से प्रबंधन किया जा रहा है। इन-सीटू पद्धति में पराली को खेत में ही मिट्टी में मिलाया जाता है, जिससे मिट्टी के स्वास्थ्य और उसकी उर्वरा शक्ति को बनाए रखने में मदद मिलती है। वहीं एक्स-सीटू पद्धति में फसल अवशेषों को खेत से बाहर ले जाकर दूसरे उपयोगों में लगाया जाता है।
पशुचारे से लेकर बायोगैस और ब्रिकेट निर्माण तक इस्तेमाल
निरीक्षण के दौरान किसानों को पराली प्रबंधन की अलग-अलग तकनीकों के बारे में बताया गया। अधिकारियों ने समझाया कि धान की पराली को जलाने के बजाय उसका उपयोग पशुओं के चारे के रूप में भी किया जा सकता है।
इसके अतिरिक्त बेलर मशीन की मदद से पराली की गांठें बनाई जाती हैं। इन गांठों को नजदीकी कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) संयंत्रों और ब्रिकेट निर्माण इकाइयों तक पहुंचाया जा सकता है। इससे फसल अवशेषों का उपयोगी निस्तारण होता है और खेतों में पराली जलाने की जरूरत कम की जा सकती है।
जनपदीय अधिकारियों के अनुसार, पिछले वर्ष भी जिले में पराली जलाने की घटनाएं संज्ञान में नहीं आई थीं। इस बार भी प्रशासन और कृषि विभाग का जोर किसानों को उपलब्ध संसाधनों के माध्यम से वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए प्रेरित करने पर है।
FARMSS ऐप से किराये पर मिलेंगी कृषि मशीनें
निरीक्षण के दौरान सीएफएमटीटीआई के निदेशक डॉ. नांदेडे ने किसानों से सीधे संवाद किया। उन्होंने कृषि यंत्रों के संचालन और उनके उपयोग का नियमित रिकॉर्ड रखने के लिए लॉगबुक तथा मूवमेंट रजिस्टर संचालित करने की जानकारी दी। इससे मशीनों के इस्तेमाल और उनकी उपलब्धता का रिकॉर्ड व्यवस्थित रखा जा सकेगा।
उन्होंने कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से विकसित FARMSS (फार्म मशीनरी सॉल्यूशंस) ऐप के बारे में भी बताया। इस ऐप के माध्यम से किसान अपने आसपास उपलब्ध कृषि यंत्रों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं और जरूरत के अनुसार उन्हें किराये पर बुक कर सकते हैं।
यह सुविधा खासतौर पर लघु और सीमांत किसानों के लिए उपयोगी हो सकती है, जिन्हें महंगी कृषि मशीनें खरीदना मुश्किल होता है। ऐप के जरिए उन्हें उचित किराये पर आधुनिक कृषि मशीनरी उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
उचित किराये पर मशीनें देने के निर्देश
सीएफएमटीटीआई निदेशक ने कस्टम हायरिंग सेंटर संचालकों को निर्देश दिए कि वे किसानों को कृषि यंत्र उचित और वाजिब किराये पर उपलब्ध कराएं, ताकि अधिक से अधिक किसान इनका लाभ उठा सकें। उन्होंने किसानों से भी अपील की कि वे फसल अवशेषों का वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन करें, उपलब्ध मशीनों का अधिकतम उपयोग करें और पराली जलाने से बचें।
उन्होंने कहा कि फसल अवशेषों का सही प्रबंधन मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनाए रखने, वायु प्रदूषण रोकने और टिकाऊ कृषि व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण है।
उप कृषि निदेशक विवेक दुबे ने बताया कि जिले में चार कस्टम हायरिंग सेंटर और 20 से अधिक एकल कृषि यंत्रों की उपलब्धता के साथ किसानों को आधुनिक तकनीक और डिजिटल सुविधाओं से जोड़ा जा रहा है।
केंद्रीय टीम का यह निरीक्षण ऐसे समय हुआ है, जब धान कटाई के बाद पराली प्रबंधन की जरूरत बढ़ जाती है। अब चुनौती यह होगी कि उपलब्ध मशीनें किसानों तक समय पर और उचित किराये पर पहुंचें, ताकि खेतों में पराली जलाने के बजाय उसका उपयोगी प्रबंधन हो सके।
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